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राज्य के बस बॉडी बिल्डरों का नहीं है एआरएआइ और आइकैड से निबंधन

250 से अधिक बस बन कर तैयार, नहीं हो रहा है रजिस्ट्रेशन

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झारखंड सरकार ने केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के गजट को किया लागू

Ranchi : राज्य के बस बॉडी बिल्डरों को अब केंद्रीय सड़क,परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के गजट के  अनुरूप अपनी इकाई का निबंधन और नव निर्मित बसों की डिजाइन का एप्रूवल कराना भी अनिवार्य कर दिया है. बस बॉडी निर्माताओं को यह बताना भी होगा कि उन्होंने बस में कौन-कौन से समान (शीशा, वाइपर, लाइट तथा अन्य उपस्कर) लगाये हैं. सिर्फ केंद्रीय एजेंसियों से नव निर्मित बस बॉडी की डिजाइन के अप्रूवल के लिए 22.50 करोड़ रुपये चाहिए. यहां यह बताते चलें कि डिजाइन एप्रूव नहीं होने से अब परिवहन विभाग की तरफ से इन बसों का निबंधन ही नहीं रजिस्ट्रेशन भी नहीं हो पा रहा है.

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13.4.2018 के केंद्रीय गजट को झारखंड में लागू किया गया

झारखंड सरकार ने 13.4.2018 को जारी केंद्रीय गजट का अक्षरश: राज्य में पालन करने का आदेश निकाल दिया है. इसकी वजह से राजधानी में बस ऑनरों के 250 बने-बनाये बस सड़कों में पड़े हुए हैं. छह महीने से अधिक समय से पड़े इन वाहनों से बस मालिकों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है. बस मालिक प्रत्येक तिमाही को हो रहे नुकसान से अलग परेशान हैं. इसमें राजधानी के अधिकतर बड़े बस मालिक शामिल हैं. बस ऑनर्स एसोसिएशन के अरुण बुधिया का कहना है कि केंद्र सरकार के फैसले को लागू करने से पहले राज्य सरकार ने बस मालिकों से किसी तरह की बात ही नहीं की और न ही इसके बाबत कोई अनुशंसा मांगी गयी.

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बस की बॉडी पर सेल्फ एटेस्टेशन कराना जरूरी

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केंद्र सरकार ने सेंट्रल मोटर वेहीकल एक्ट 1989 की धारा 212 में संशोधन कर दिया है. इसके तहत किसी भी बॉडी बिल्डर को बस बनाने के पहले ड्राइव अवे चेसिस पर निर्मित बस की बॉडी पर सेल्फ एटेस्टेशन कराना जरूरी है. यानी बस की चेसिस में जो भी सामान लगाये जायेंगे, उसकी पुष्टि स्वंय निबंधित बॉडी बिल्डरों को करनी होगी और सरकार को सूचित करना होगा कि यह केंद्रीय मोटर यान अधिनियम के अनुरूप किया गया है. श्री बुधिया का कहना है कि पड़ोसी राज्य ओड़िसा ने केंद्रीय एजेंसियों से कहा है कि वे वहां के बस बॉडी निर्माताओं को एक्ट की जानकारी दें और उन्हें प्रशिक्षित करें. झारखंड सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है.

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एक बस को प्रमाणित कराने का खर्च नौ लाख रुपये

एक नव निर्मित बसों को ऑटोमोटिव रीसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और आइकैड हरियाणा समेत पांच एजेंसियों से प्रमाणित कराने का खर्च नौ लाख रुपये पड़ता है. बस बॉडी निर्माता झारखंड मोटर गाड़ी नियमावली 2001 की धारा 140 से लेकर धारा 163 के अनुरूप चेसीस पर पूरी गाड़ी को स्वरूप देते हैं, वहीं सेंट्रल मोटर गाड़ी नियमावली की धारा 128 के तहत लग्जरी गाड़ियों को बनाने की व्याख्या की गयी है. केंद्र सरकार द्वारा नियमों में किये गये संशोधन से भारत स्टैंडर्ड-3, बीएस-4, बीएस-5 भी निबंधित बस बॉडी मालिकों को ही दिया जाने लगा है. बस बॉडी निर्मताओं को केंद्र की एजेंसियों से लाइसेंस लेने के अलावा डिजाइन का अप्रूवल कराना भी जरूरी कर दिया गया है.

 

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