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बढ़े हुए कोर्ट फीस की वापसी को लेकर आर पार के मूड में है स्टेट बार काउंसिल, कल की बैठक अहम

Ranchi: राज्य सरकार द्वारा कोर्ट फीस में की गयी बढ़ोत्तरी पर राज्य भर के अधिवक्ता आंदोलित है. बुधवार को झारखंड स्टेट बार काउंसिल इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकती है. इस संबंध में पूरे राज्य के जिला और अनुमंडल बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों की बैठक राजधानी रांची में बुलाई गई है जिसमें सरकार द्वारा बढ़ाए गए कोर्ट फीस की वापसी के संबंध में स्टेट बार काउंसिल अपनी नई रणनीति तय कर सकता है. पिछले दिनों 25 जुलाई इस मुद्दे पर एक दिन का न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर अधिवक्ताओं ने यह संकेत दे दिया है कि बढ़े हुए कोर्ट फीस के मामले को वह आसानी से स्वीकार नहीं करने वाले हैं.

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रांची बार भवन में होगी बैठक,फैसलों पर रहेगी नजर

Sanjeevani

रांची जिला बार एसोसिएशन के हॉल में दोपहर 12 बजे होने वाली बैठक में राज्य के सभी जिलों एवं अनुमंडल बार संघों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कोर्ट फीस वापसी के लिए आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी. अधिवक्ताओं की ज्यादा संख्या को देखते हुए पहले यह बैठक मोरहाबादी मैदान में होना था लेकिन वर्षा की आशंका के मद्देनजर रांची जिला बार एसोसिएशन के सहयोग से यह बैठक अब उसके हॉल में दोपहर 12 बजे से शुरू होगी, जो करीब दो घंटे तक चलेगी। अधिवक्ता एक स्वर में राज्य सरकार द्वारा बढ़ाये गये कोर्ट फीस का विरोध कर रहे हैं. विरोध स्वरूप अधिवक्ताओं ने गत 25 जुलाई को राज्य भर की अदालतों में एक दिन के लिये न्यायिक कार्य से दूरी भी बनायी थी. लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोर्ट फीस वृद्धि की वापसी के संबंध में अब तक कोई पहल नहीं होने या संकेत दिए जाने के अभाव में अब अधिवक्ता आर पार के मूड में नजर आ रहे हैं. सरकार के रूख को देखते हुए बैठक में कठोर निर्णय भी लिया जा सकता है. स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण ने बताया कि कोर्ट फीस वापसी को लेकर आंदोलन का क्या स्वरूप होगा, यह बैठक का मुख्य एजेंडा है.

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सरकार द्वारा की गयी कोर्ट फीस में बढोत्तरी असंवैधानिक: राजेंद्र कृष्ण

झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण का कहना है कि कोर्ट फीस को लेकर राज्य सरकार का नया एक्ट अव्यवहारिक,असंवैधानिक है. नए एक्ट में कोर्ट फीस छह से 10 गुना तक बढ़ा दी गयी है,एक बार में इतनी वृद्धि नहीं की जा सकती.अत्यधिक कोर्ट फीस होने से राज्य की गरीब जनता कोर्ट तक नहीं पहुंच पायेगी. लैंड प्रोपर्टी से जुड़े मामले इस कोर्ट फीस वृद्धि के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. संवैधानिक स्कीम के तहत लोगों को सुलभ और नि:शुल्क न्याय उपलब्ध कराना है,लेकिन कोर्ट फीस बढ़ोत्तरी से यह संभव नहीं है.राज्य सरकार को जनहित आधार पर कोर्ट फीस बढोत्तरी पर पुनर्विचार करना चाहिए.

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