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स्टेट बैंक के विलय से मिलेगी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती : महेश पोद्दार

स्टेट बैंक के निजीकरण से सम्बंधित अफवाहों को सिरे से किया खारिज

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Ranchi : झारखण्ड से राज्यसभा सांसद श्री महेश पोद्दार ने कहा कि स्टेट बैंक के विलय से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. उन्होंने कहा कि बदलते वक्त के साथ बैंकिंग क्षेत्र की जरूरतें और चुनौतियां बदली है और बदले परिदृश्य में स्टेट बैंक का विलय एक सकारात्मक फैसला साबित होगा.

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स्टेट बैंक निजीकरण की अफवाहों को किया खारिज

उन्होंने स्टेट बैंक के निजीकरण से संबंधित अफवाहों को सिरे से खारिज किया. पोद्दार राज्यसभा में स्टेट बैंक (निरसन और संशोधन) विधेयक 2017 पर चर्चा के क्रम में सरकार के पक्ष में बोल रहे थे.
श्री पोद्दार ने स्टेट बैंक के साथ अपने भावनात्मक संबंधों की चर्चा के साथ अपना संबोधन शुरू किया. उन्होंने कहा कि बैंकों के विलय का यह पहला मामला नहीं है. अग्रेजी शासन के समय 1927 में प्रेसीडेंसी बैंक ऑफ कोलकाता, मद्रास एवं बॉम्बे का विलय कर इम्पीरियल बैंक का गठन किया गया था. आजादी के बाद यह परम्परा दिनों दिन मजबूत हुई है. कंसोलिडेशन और बैंकों की ताकत बढ़ाने के लिए दुनिया भर में प्रयास हो रहे हैं.

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स्टेट बैंक का विलय वक्त की मांग

श्री पोद्दार ने कहा कि स्टेट बैंक विलय के बाद कमजोर नहीं होगा और जमाकर्ताओं के पैसे भी सुरक्षित हैं. पूरे विश्व में बैंकिंग क्षेत्र में कुछ नई जरूरतें महसूस की जा रही हैं, आईटी, टेलीकम्युनिकेशन के बहुत सारे नए-नए आयाम खुल रहे हैं, बैंकिंग से अपेक्षा बढ़ रही है, तरीका बदल रहा है. बैंकिंग सेक्टर के रिस्क मैनेजमेंट की जरूरतें भी अब बदल रही हैं. श्री पोद्दार ने कहा की ज्यादातर देशों में 4-5 बड़े बैंक हैं. जबकि हमारे यहां 27 पब्लिक सेक्टर बैंक्स हैं, बहुत सारे निजी बैंक्स भी हैं. ऐसे में स्टेट बैंक का विलय वक्त की मांग है.स्टेट बैंक के विलय से मिलेगी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती : महेश पोद्दार

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स्टेट बैंक की पहुंच देश के कोने -कोने तक

श्री पोद्दार ने कहा कि 2008 में विश्व के अधिकांश बैंकों के मेल्टडाउन के वक्त भी भारत की बैंकिंग इंडस्ट्री एक मजबूत बैंकिंग इंडस्ट्री मानी गयी. लोगों ने स्वीकार किया कि SBI के रिस्क मैनेजमेंट का तरीका, क्षमता और उसका आर्किटेक्चरल फ्रेमवर्क दूसरे बैंकों की तुलना में काफी मजबूत और मॉडर्न है. अनुषंगी बैंकों के साथ स्टेट बैंक की पहुंच देश के कोने कोने तक है. विलय के बाद करीब 37 लाख करोड़ की परिसंपत्ति के साथ यह दुनिया के टॉप 50 बैंक्स में शामिल हो जाएगा. ग्राहकों की संख्या तो बढ़ेगी ही कर्मचारियों की संख्या 2 लाख 70 हजार हो जायेगी.

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