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धनबाद: कोयला चुनकर जीवन यापन करनेवालों के सामने भुखमरी की स्थिति, नहीं मिल रही कोई मदद

Anil Pandey 

Dhanbad : कोलियरी क्षेत्र में बसे हजारों परिवार ऐसे हैं जो कोयला चुनकर होटलों में बेचते हैं. इसीसे उनका जीवन यापन होता है. लेकिन कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए देश मे लॉकडाउन लागू कर देने के बाद से उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

लॉकडाउन के कारण शहर के ढाबे, होटल और रेस्टोरेंट बंद हैं. जिस कारण इनके कोयले की बिक्री नहीं हो पा रही है. इसके बावजूद ये लोग घरों में बेचने के लिए सिर पर कोयला लेकर निकलते हैं तो इन्हें पुलिस का डंडा खाना पड़ता है.

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सरकारी सुविधाओं से हैं वंचित

झरिया के नॉर्थ तिसरा कोलियरी स्थित डिप्पू धौड़ा बस्ती में लगभग 60 घर हैं. यहां लगभग सभी घर का चूल्हा कोयला बेचकर ही जलता है. परिवार में महिला पुरुष सभी कोयला चुनकर ढाबों, होटलों और रेस्टोरेंट  में बेचते हैं. जिससे इन्हें 100 से 300 रुपये तक की आमदनी हो जाती है. लेकिन लॉकडाउन के कारण इनका कोयला नहींं बिक रहा है. जिस कारण इनके सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है.

इस बस्ती में रहने वाले लोगों को किसी तरह की सरकारी सुविधा भी नहीं मिल रही है. न तो इनके पास राशन कार्ड है और न ही जनधन खाता. इतना ही नहीं, इस बस्ती में रहने वाले अधिकतर लोगों के पास आधार कार्ड भी नहीं है जिस कारण इन्हें सरकारी सुविधाएं भी नहींं मिल पाती हैं.

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सभी भूखे रहने को हैं मजबूर

स्थानीय महिला रूपा देवी का कहना है कि जब से लॉकडॉन हुआ है तबसे हम लोग बेरोजगार हो गये हैं. पहले कोयला चुनकर बेचते थे. उसी से हम लोगों का परिवार चलता था. लेकिन अब कोयला चुनने या बेचने जाते हैं तो पुलिस भगा देती है. डंडा भी मारती है. हम लोग घर में बैठ गये हैं. जिससे भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. खाने के लिए काफी दिक्कत हो रही है. बच्चे, बड़े सभी भूखे रहने को मजबूर हैं.

कोई जनप्रतिनिधि भी नहीं आते मुहल्ले में

वहीं स्थानीय विनोद कुमार का कहना है कि यहां किसी के पास ना तो राशन कार्ड है ना जनधन खाता है. साथ ही कभी कोई जनप्रतिनिधि ही यहां सुध लेने के लिए आते हैं. जिससे यहां के लोगों को काफी परेशानी हो रही है.

लॉकडाउन को दो माह से अधिक हो गये हैं. इतने दिनों से हम सभी लोग घर बैठे हुए हैं. स्थिति बिगड़ गयी है. सभी लोग रोज कमाने – खाने वाले हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण सभी लोग भुखमरी की स्थिति में आ गये हैं.

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