न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

झारखंड में स्‍टार्टअप पॉलिसी फेल, 49 चयनित उद्यमियों को नहीं मिल रही स्‍टाइपेंड

चयन के लिए गठित स्टेट इवॉल्यूशन बोर्ड की बैठक मात्र दो बार की गयी

138

Chhaya

mi banner add

Ranchi : जितनी घोषणाओं के साथ राज्य सरकार ने स्टार्टअप पॉलिसी लागू की, उतनी पॉलिसी को सफलता नहीं मिल पाई. साल 2016 में राज्य में स्टार्टअप पॉलिसी लागू की गयी. जिसमें ऐसे उद्यमियों को बढ़ावा देना था जो अपने आइडिया से बेहतर और कुछ नया बिजनेस करने की चाह रखते हैं.

 

इसके लिए राज्य सरकार की ओर से सहायता राशि भी उद्यमियों को देने वाली थी. लेकिन अब तक सरकार की ओर से मात्र 49 उद्यमियों का चयन किया जा सका है. वो भी इन उद्यमियों का चयन साल 2018 में की गयी है. जबकि पॉलिसी राज्य में नवंबर 2016 से ही लागू है.

इतना ही नहीं राज्य में जो उद्यमी स्टार्टअप के लिए चयनित है, उन्हें सरकार की ओर से प्रथम चरण की राशि तक नहीं दी गयी है. जिसके कारण ये उद्यमी अन्य चरणों का लाभ पाने से भी वंचित है.

इसे भी पढ़ें : मिड डे मील: अब तीन के बजाय सिर्फ दो दिन ही बच्चों को दिया जायेगा अंडा

स्टाइपेंड के 8,500 तक नहीं मिले

चयनित उद्यमियों ने जानकारी दी कि पॉलिसी के तहत आइडिया में विकास, शोध और वैधता के लिए राज्य सरकार चयन होने के प्रथम 12 माह स्टाइपेंड के नाम पर 8,500 रुपये देने वाली थी. ये राशि प्रत्येक माह उद्यमियों या उद्यमी समूहों को देनी थी.

वहीं दिव्‍यांग या महिला उद्यमियों को स्‍टाइपेंड राशि में अतिरिक्त 2000 रुपये देने का प्रावधान था. उद्यमियों ने जानकारी दी कि राज्य के किसी भी चयनित उद्यमी को राशि नहीं मिली है. उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में चयनित स्टार्टअप उद्यमियों का ग्रुप है जो इस मांग को लेकर लगातार प्रयासरत है. स्टाइपेंड स्टार्टअप सहायता का पहला चरण है.

इसे भी पढ़ें : पलामू : चतरा सीट को लेकर महागठबंधन में हालात ठीक नहीं, राजद ने कांग्रेसियों का किया विरोध, धीरज साहू…

विभिन्न स्तरों पर देनी थी राशि

स्टाइपेंड के बाद उद्यमियों को उनके विकसित आइडिया के आधार पर बिजेनस स्थापित करने के लिए सरकार को 10 लाख देने थी. लेकिन राज्य में पहला चरण पूरा नहीं होने के कारण दूसरे चरण की राशि से उद्यमी वंचित है.

जबकि पॉलिसी के आधार पर चयन होने के 12 माह बाद उद्यमियों को इस राशि का भुगतान किया जाना चाहिए. जबकि सरकार की ओर से इसके लिए 50 करोड़ की राशि प्रत्येक साल आवंटित की जाती है.

इसे भी पढ़ें :मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए आदिवासी महिलाओं के साथ एडीएफ ने चुना महुआ

पॉलिसी के बाद से सिर्फ दो बार हुई एसईबी की बैठक

स्टार्टअप आवेदन के बाद स्टेट इवॉल्यूशन बोर्ड उद्यमियों का चयन करती है. एसईबी बैठक आयोजित कर उद्यमियों के आइडिया के आधार पर इनका चयन करती है.

लेकिन पॉलिसी लागू होने के दो साल बाद 2018 में बोर्ड की बैठक हुई. जबकि पॉलिसी के नियमों के अनुसार प्रत्येक चार माह में एसईबी की बैठक की जानी है.

इसे भी पढ़ें :पलामू संसदीय क्षेत्र में 8,52,459 महिला वोटर, निर्णायक साबित हो सकता है महिलाओं का वोट

झारखंड से आगे है बिहार

बिहार में भी झारखंड की तरह स्टार्टअप पॉलिसी लागू है. बिहार में पिछले तीन सालों में यहा 6,489 आवेदन आये, जिसमें से 931 उद्यमियों को चयनित किया गया.

वहीं 53 उद्यमियों को स्टाइपेंड की 8,500 राशि दी जा रही है. जबकि झारखंड पॉलिसी लागू होने के बाद से मात्र 297 उद्यमियों ने ही आवेदन दिए, जिसमें से मात्र 49 का चयन हुआ.

इसे भी पढ़ें : संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनाव, जुमलेबाजी में नहीं आयेगी जनता- CPIM

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: