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सरकार के साथ IAS व IPS अफसरों का बना रहा गतिरोध, चहेतों की बेहतर पोस्टिंग के कारण कई अफसर कर चुके हैं दिल्ली का रुख

राज्य गठन के बाद से कई आईएएस भी आमने-सामने हुए हैं, एक-दूसरे पर भी लगायें हैं आरोप, मामला राजभवन से केंद्र तक भी पहुंचा

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Ranchi : राज्य गठन के बाद से सरकार और ब्यूरोक्रेट्स और आईपीएस अफसरों के बीच गतिरोध बना रहा है. अब तक कई सरकारें आयीं और गयीं सभी ने अपने मनमुताबिक अफसरों को तवज्जो दिया. कई आईएएस अफसर आमने-सामने भी हुये. वर्तमान सरकार में भी आईएएस और आईपीएस अफसरों के कई गतिरोध सामने आये. हालांकि किसी अफसर ने खुलकर अपनी बात नहीं रखी. चहेतों को बेहतर पोस्टिंग के कारण कई ब्यूरोक्रेट्स दिल्ली की ओर रुख करना मुनासिब समझा.

केस नंबर 1 : अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर उदय प्रताप सिंह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से झारखंड कैडर में वापस लौटे. उन्हें भरोसा दिलाया गया कि राज्य में मुख्य सचिव बनाया जायेगा. राजीव गौबा के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने तक उन्हें खान एवं उद्योग विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गयी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सरकार ने ऐन वक्त पर राजबाला वर्मा को मुख्य सचिव की जिम्मेवारी सौंप दी. इसके बाद वो दुबारा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गये. 1984 बैच के अफसर उदय प्रताप सिंह वर्तमान में डीडीसी के उपाध्यक्ष हैं.

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केस नंबर 2 : अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर अमित खरे को विकास आयुक्त बनाया गया. इसके साथ ही योजना सह वित्त विभाग की भी जिम्मेदारी सौंपी गयी. पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के रिटायरमेंट के पहले सत्ता के गलियारों में चर्चा रही कि अमित खरे ही अगले मुख्य सचिव होंगे. सूत्रों के अनुसार सरकार ने भी दिलासा दिया था कि अमित खरे को ही मुख्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी जायेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐन वक्त सुधीर त्रिपाठी को प्रोजेक्ट भवन बुलाकर उन्हें मुख्य सचिव की कमान सौंप दी गयी. इसके बाद अमित खरे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में चले गये. वर्तमान में अमित खरे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सचिव हैं.

केस नंबर 3 : पूर्व वन विभाग की प्रधान सचिव अलका तिवारी ने भी सरकार की व्यवस्था से नराज होकर दिल्ली का रूख करना मुनासिब समझा. सूत्रों की माने तो उस समय तत्कालीन सरकार अपने मनमुताबिक काम कराना चाहती थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अलका तिवारी वर्तमान में खाद व रासायनिक मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं.

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केस नंबर 4 : प्रधान सचिव रैंक के अफसर मुखमित सिंह भाटिया भी सरकार में फिट नहीं बैठ रहे थे. उन्हें महिला बाल विकास की जिम्मेदारी दी गयी थी. अपने को असहज महसूस करने के कारण उन्होंने ने भी दिल्ली का रुख कर लिया. इसी तरह सुरेंद्र सिंह मीणा को मंत्रिमंडल की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. लेकिन ये भी फिट नहीं बैठे और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में चले गये. मीणा वर्तमान में सामाजिक एवं न्याय मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं.

निधि और रहाटे ने भी दिया है आवेदन

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स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे और गृह विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे ने भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने का आवेदन दिया है. सूत्रों की माने तो सितंबर तक इन दोनों अफसरों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने का एनओसी भी मिल जायेगा. रहाटे जब झारखंड कैडर में वापस लौटे तो उन्हें ऊर्जा सचिव बनाया गया. उस वक्त अडाणी पावर प्लांट के एमओयू को लेकर सरकार के साथ कुछ गतिरोध भी हुआ. इसके बाद रहाटे एक महीने के लिये छुट्टी पर चले गये. जब छुट्टी से वापस लौटे तो उन्हें श्रम विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गयी. वर्तमान में रहाटे गृह विभाग के प्रधान सचिव हैं.

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सरकार और आईपीएस अफसरों के बीच भी रहा है गतिरोध

सरकार और आइपीएस अफसरों के बीच भी गतिरोध उभर कर सामने आया. बाकोरिया कांड को लेकर सीआईडी के आईजी रेजी डुंगडुंग को हटाया गया. रांची जोन की आईजी सुमन गुप्ता, डीआईजी पलामू हेमंत टोप्पो, और लातेहार एसपी अजय लिंडा को हटा दिया गया. टीपीसी के खिलाफ आक्रमक कार्रवाई करने के कारण एडीजी ऑपरेशन अनिल पालटा का तबादला कर दिया. जब बाकोरिया कांड की जांच में तेजी आयी और सच सामने आने लगा तो ऐन वक्त पर एमवी राव को हटा दिया गया. इसकी तरह एडीजी सीआईडी प्रशांत सिंह का तबादला कर दिया गया.

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