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Srijan Samvad : कोरोना काल में अपनी कला को मंच दिया इन कलाकारों ने, जान‍िए

Jamshedpur : संस्था ‘सृजन-संवाद’ की 110 वीं गोष्ठी ‘कलाओं की दुनिया’ पर केन्द्रित रही. डॉ. विजय शर्मा ने विश्व रंगमंच दिवस की बधाई देते हुए सबका स्वागत किया. इस कार्यक्रम में देहरादून से शशिभूषण बडौनी, जमशेदपुर से रूपा झा, मुंबई से अमृता सिन्हा तथा बंगलुरू से परमानंद रमण ऑनलाइन जुड़े थे.

शशिभूषण बडौनी ने कहा कि वे साहित्य की दुनिया में रमे हुए थे, लिखना-पढ़ना कर रहे थे, लेकिन एक दुर्घटना के बाद लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा. उन्होंने साहित्य के साथ-साथ रेखांकन प्रारंभ किया. वे रेखांकन के साथ आजकल एक्रिलिक चित्रांकन कर रहे हैं. मधुबनी पेंटर रूपा झा ने कहा कि बचपन से चित्रांकन का शौक था. मगर शादी के बाद मात्र हाउसवाइफ़ बन कर रह रही थीं. करोना काल में जब चारों ओर तबाही मची हुई थी तब परेशानियों के बीच उन्होंने फ़िर से काम शुरू किया. पति ने चित्रकारी को फ़ेसबुक पर लगा दिया तो तत्काल उन्हें कई सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली. उनका उत्साहवर्धन हुआ और वे जोर-शोर से मधुबनी पेंटिंग बनाने में जुट गई.

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मुंबई की कवयित्री अमृता सिन्हा बचपन से पेंटिंग कर रही हैं. उन्हें इस दिशा में पिता और भाई तथा अब अपने छोटे बेटे से खूब सहायता और प्रोत्साहन मिला है. स्कूल-कॉलेज के दिनों से वे प्रदर्शनी में भाग एवं पुरस्कार बटोरती आई हैं. शादी और बच्चों की परवरिश के दौरान चित्रकला कुछ समय के लिए स्थगित हुई, मगर लेखन और कुकरी जारी रही. कोरोना काल में ऑनलाइन चित्रांकन प्रदर्शनी में भाग लिया है और अब उन्हें कमीशन्ड कार्य भी मिल रहा है. मूर्तिकार परमानंद रमण ने बाकायदा मूर्तिकला का प्रशिक्षण लिया है. उन्होंने मोनोलिथ, इंश्टॉलेशन, मॉडलिंग आदि के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी.

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