Fashion/Film/T.V

श्रीदेवी की दोनों बेटियों खुशी और जाह्नवी के नाम रखे गये थे इन फिल्मों से प्रेरित होकर

जयंती पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : मुझे श्रीदेवी चांदनी (89) फिल्में में पहली बार पसंद आईं. निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा की इस सुपरहिट फिल्म में श्रीदेवी कमाल की लगी हैं. शोख व चंचल चांदनी का सौंदर्य सम्मोहित करनेवाला था. इसमें श्रीदेवी की बच्ची जैसी आवाज में गाया गीत चांदनी ओ मेरी चांदनी जबरदस्त हिट रहा था. वहीं मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां गीत पर इन्होंने कमाल का नृत्य किया था. यह गीत एक समय में विवाह समारोह का लगभग अनिवार्य गीत बन गया था.

ये लम्हे ये पल हम

चांदनी के बाद यश चोपड़ा ने श्रीदेवी और अनिल कपूर को लेकर लम्हे फिल्म बनाई थी. ये फिल्म हालांकि फ्लाप हुई थी पर मुझे पसंद आई थी. इसकी कहानी थोड़ी अलग किस्म की थी.

इसमें नायक अनिल कपूर नायिका बनी श्रीदेवी को पसंद करते हैं लेकिन नायिका की शादी दूसरे व्यक्ति से होती है. नायिका की मौत हो जाती है और उनकी बेटी (श्रीदेवी ने ही ये भूमिका निभायी है) बड़ी होकर अपने से दोगुनी उम्र के नायक से ही प्रेम करने लगती है. ये कहानी लोगों के गले नहीं उतरी. श्रीदेवी और अनिल कपूर दोनों ने इसमें बेहतरीन अभिनय किया था.

इसे भी पढ़ें :अब राज्य में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को झारखंड से मैट्रिक-इंटर पास होने पर ही मिलेगी सचिवालय में नौकरी

हीरो से ज्यादा पैसे लेतीं थी

श्रीदेवी ने अपने अभिनय के दम पर उस समय में वो जगह बनाई जो शायद उस वक्त किसी अभिनेत्री के लिए बॉलीवुड में बनाना बहुत ही मुश्किल था. यही वजह थी कि उस दौरान श्रीदेवी एक अभिनेता से अधिक फीस लेती थीं. नगीना फिल्म के लिए उन्होने ऋषि कपूर से अधिक फीस ली थी.

इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर के अजिताभ बोस ने लिखी कॉमेडी किंग कपिल शर्मा की पहली बॉयोग्राफी “द कपिल शर्मा स्टोरी”

ऐ जिंदगी गले लगा ले

श्रीदेवी ने दर्जनों हिट फिल्में दी हैं पर अभिनय के लिहाज से उनकी सबसे अच्छी फिल्म कमल हासन के साथ वाली सदमा थी. इसमें इन्होंने मंदबुद्धी युवती की भूमिका विश्वसनीय ढंग से निभाई थी.

श्रीदेवी की बड़ी बड़ी बोलती आंखों और बच्चों सी मासूमियत ने सदमा को उनकी सबसे बेहतरीन फिल्म बना दिया था. इसका एक गीत ऐ जिंदगी गले लगा ले अच्छा गाना है.
बोनी कपूर की फिल्म मिस्टर इंडिया में भी श्रीदेवी जंची थीं.

इसे भी पढ़ें :एक सप्ताह में सभी शिकायतों का करें निष्पादनः मनरेगा आयुक्त

इंग्लिश विंग्लिश

जुदाई फिल्म के बाद श्रीदेवी ने 15 साल ब्रेक लेकर बच्चों की देखभाल की. बच्चे थोड़े बड़े हुए तो श्रीदेवी ने अभिनय यात्रा की दूसरी पारी इंग्लिश विंग्लिश (2012) से शुरू की . ये बहुत अच्छी फिल्म थी. श्रीदेवी ने मच्योर अभिनय किया था. इस फिल्म को आस्कर के लिए नामांकित किया गया था.

इसे भी पढ़ें :कांग्रेस को रंग बदलने में तनिक भी समय नहीं लगता: प्रतुल शाहदेव

Mom

इससे उम्मीद बंधी की अब उनकी और भी अच्छी फिल्में देखने को मिलेंगे. इन्होंने निराश नहीं किया और mom (2017) जैसी लाजवाब फिल्म अंतिम तोहफे के रूप में दी. इसमें उनकी सौतेली बेटी से दुष्कर्म के बाद आत्महत्या कर लेती है.

इस पर एक साधारण शिक्षका का दोषियों से बदला लेनेवाली मां के रोल को उन्होंने यादगार बना दिया.एकदम सधा हुआ संवेदनशील अभिनय निभा कर वे दर्शकों के दिल पर हमेशा के लिए राज करने के लिए इस दुनिया को असमय ही अलविदा कह गईं.

इसे भी पढ़ें :इंटरनेट की दुनिया में मचेगा धमाल! अब Reliance Jio को टक्कर देने आ रही ये दिग्गज कंपनी

जीवन यात्रा

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु में हुआ था. श्रीदेवी का असली नाम अम्मा अयंगर अयप्पन था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत महज चार साल की उम्र में एक तमिल फिल्म कंधन करुणई से कर दी थी. उन्होंने बाल कलाकार के रूप में हिंदी की जूली फिल्म तथा तेलुगू, मलयालम फिल्मों में भी अभिनय किया था.

दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में काम करने के बाद श्रीदेवी ने बड़े होने पर 1979 में बतौर मुख्य कलाकार फ़िल्म ‘सोलहवां सावन’ से अपने हिंदी फ़िल्म करियर की शुरुआत की.

इसे भी पढ़ें :BIG NEWS : हवाई किराये में सरकार ने की भारी बढ़ोत्तरी, जाने किस उड़ान में लगेगा कितना किराया

पहले श्रीदेवी को ऑफर की गई थी बेटा फिल्म

ऐसा कहा जाता है कि अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की सुपरहिट फिल्म ‘बेटा’ सबसे पहले श्रीदेवी को ऑफर की गई थी, लेकिन इन्होंने यह कहते हुए इसे करने से इंकार कर दिया था कि वे अनिल के साथ कई सारी फिल्में कर चुकी हैं.

श्रीदेवी की दो बेटियां हैं खुशी और जाह्नवी. कहा जाता है अपनी दोनों बेटियों का नाम श्रीदेवी के पति बोनी कपूर की दो फिल्मों के देखने के बाद रखा था. इन फिल्मों का नाम ‘जुदाई’ और ‘हमारा दिल आपके पास है.’

इसे भी पढ़ें :राज्य स्तरीय पदों में अब सिर्फ मुख्य परीक्षा होगी, कार्मिक विभाग ने नयी नियमावली लागू की

80 का दशक की सुपरस्टार

80 का दशक हिंदी फ़िल्मों में हीरोइनों के लिहाज़ से श्रीदेवी का दशक कहा गया. जीतेंद्र और श्रीदेवी ने मिलकर एक के बाद एक करीब आधा दर्जन सुपरहिट जैसे हिम्मतवाला, तोहफ़ा, जस्टिस चौधरी और मवाली जैसी फ़िल्में दीं. इसके बाद चालबाज, नगीना, मिस्टर इंडिया जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया.

श्रीदेवी ने फ़िल्मों में लंबी पारी खेली और ‘मॉम’ उनकी 300वीं फ़िल्म थी. छह बार उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड मिला. mom के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया. फ़िल्मों को उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से नवाज़ा गया था.

इसे भी पढ़ें :लोगार प्रांत पर भी कब्जा करने का दावा, काबुल से बस 90 KM दूर पहुंचे तालिबान

Advt

Related Articles

Back to top button