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श्रीदेवी वैसी हीरोइन जिसने 15 साल तक ब्रेक लेने के बाद कमबैक कर दिखाया कमाल

  • पुण्यतिथि पर विशेष

Naveen Sharma

श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की उन नायिकाओं में शामिल हैं जिन्होंने बहुत लंबे समय तक बॉलीवुड राज किया है. 80 के दशक का एक दौर ऐसा भी था जब श्रीदेवी की तूती बोलती थी. श्रीदेवी की लगातार एक के बाद एक कई फिल्में सुपरहिट हुई थीं.
जुदाई फिल्म के बाद श्रीदेवी ने 15 साल ब्रेक लेकर बच्चों की देखभाल की. बच्चे थोड़े बड़े हुए तो श्रीदेवी ने अभिनय यात्रा की दूसरी पारी इंग्लिश विंग्लिश से शुरू की. ये बहुत अच्छी फिल्म थी. श्रीदेवी ने मच्योर अभिनय किया था. इस फिल्म को आस्कर के लिए नामांकित किया गया था.

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अंतिम तोहफा Mom

इससे उम्मीद बंधी की अब उनकी और भी अच्छी फिल्में देखने को मिलेंगे. उन्होंने निराश नहीं किया और mom जैसी लाजवाब फिल्म अंतिम तोहफे के रूप में दी. इसमें उनकी सौतेली बेटी से दुष्कर्म के बाद आत्महत्या कर लेती है. इस पर एक साधारण शिक्षका का दोषियों से बदला लेनेवाली मां के रोल को उन्होंने यादगार बना दिया.एकदम सधा हुआ संवेदनशील अभिनय निभा कर वे दर्शकों के दिल पर हमेशा के लिए राज करने के लिए इस दुनिया को असमय ही अलविदा कह गईं.

80 का दशक हिंदी फ़िल्मों में हीरोइनों के लिहाज़ से श्रीदेवी का दशक कहा गया. जीतेंद्र और श्रीदेवी ने मिलकर एक के बाद एक करीब आधा दर्जन सुपरहिट जैसे हिम्मतवाला, तोहफ़ा, जस्टिस चौधरी और मवाली जैसी फ़िल्में दीं. चालबाज, नगीना, मिस्टर इंडिया जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया.

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चांदनी में दिखी अभिनय क्षमता की चमक

मुझे श्रीदेवी चांदनी फिल्म में पहली बार पसंद आईं. यश चोपड़ा की इस सुपरहिट फिल्म में श्रीदेवी कमाल की लगी हैं. शोख व चंचल चांदनी का सौंदर्य सम्मोहित करनेवाला था. इसमें श्रीदेवी ने चांदनी नाम की लड़की की भूमिका संजीदा ढंग से अदा की थी. इस फिल्म में ऋषि कपूर श्रीदेवी के अपोजिट थे औऱ विनोद खन्ना और जूही चावला भी सहकलाकारों में शामिल थे, लेकिन इन सभी लोगों की तुलना में श्रीदेवी को इस फिल्म से काफी शोहरत मिली. इसके साथ ही एक अच्छी अभिनेत्री के रूप में उनकी पहचान बनी थी.
इस फिल्म में श्रीदेवी की बच्ची जैसी आवाज में गाया गीत चांदनी ओ मेरी चांदनी जबरदस्त हिट रहा था. मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां गीत पर श्रीदेवी ने कमाल का नृत्य किया था. यह गीत विवाह समारोह का अनिवार्य गीत बन गया.

ये लम्हे ये पल हम

चांदनी के बाद यश चोपड़ा ने श्रीदेवी और अनिल कपूर को लेकर लम्हे फिल्म बनाई थी. ये फिल्म हालांकि फ्लाप हुई थी पर मुझे पसंद आई. इसकी कहानी थोड़ी अलग किस्म की थी जो लोगों के गले नहीं उतरी. श्रीदेवी और अनिल कपूर दोनों ने इसमें बेहतरीन अभिनय किया था. खासकर श्रीदेवी ने मां और बेटी का डबल रोल बड़े लाजवाब ढंग से निभाया था. इसमें चुड़ियां खनक गयी आधी रात मा गीत पर बेहद खूबसूरत अंदाज में डांस भी किया था.

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ऐ जिंदगी गले लगा ले

श्रीदेवी ने दर्जनों हिट फिल्में दी हैं पर अभिनय के लिहाज से उनकी सबसे अच्छी फिल्म कमल हासन के साथ सदमा थी. इसमें उन्होंने मंदबुद्धि युवती की भूमिका विश्वसनीय ढंग से निभाई थी. श्रीदेवी की बड़ी बड़ी बोलती आंखों और बच्चों सी मासूमियत ने सदमा को उनकी सबसे बेहतरीन फिल्म बना दिया था. इसका एक गीत ऐ जिंदगी गले लगा ले मुझे बेहद पसंद है पर श्रीदेवी को तो मौत ने ही गले लगा लिया.

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‘सोलहवां साल’ से लीड रोल शुरू किया

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु में हुआ था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत महज चार साल की उम्र में एक तमिल फिल्म कंधन करुणई से कर दी थी. उन्होंने बाल कलाकार के रूप में तेलुगू और मलयालम फिल्मों में भी अभिनय किया था. हिंदी की मशहूर फिल्म जूली में भी श्रीदेवी ने बाल कलाकार के रूप में काम किया था.
दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में काम करने के बाद श्रीदेवी ने साल 1979 में बतौर मुख्य कलाकार फ़िल्म ‘सोलहवां साल’ से अपने हिंदी फ़िल्म करियर की शुरुआत की.

श्रीदेवी ने फ़िल्मों में लंबी पारी खेली और ‘मॉम’ उनकी 300वीं फ़िल्म थी. छह बार उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड मिला.फ़िल्मों को उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से नवाज़ा गया था.

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