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खेल जीवन जीतने का सबक सिखाता है : मोहन भागवत

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Dhanbad : खेल जीवन जीने का सबक सिखाता है. खेल केवल टीम को जीतना नहीं बल्कि खेल देखने वाले को भी जीवन जीतने का सबक सिखाता है. चिंतन करने वाला मौन होकर काम करेगा और चिंतन करके काम सफल करेगा. उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने राजकमल विद्या मंदिर में चल रहे क्रीडा भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन शनिवार की शाम देश के 450 जिलों की इकाइयों से आये प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि लक्ष्य क्या है, पक्का होना चाहिए. हमें अपने देश को खेल जगत में उत्कर्ष बनाना है. इसके लिए हमें उत्कर्ष बनना है, यानी मेहनत करके अपने कृत्य से जीवन देश को समर्पित करना है.

लाभ के लक्ष्य बनाने वाला व्यापारी होता है

जो अपना लक्ष्य लाभ के लिए बनाता है, वह असमंजस में होता है. जिसका लक्ष्य खेल से लाभ लेने वाला होता है वह व्यापारी कहलाता है. लक्ष्य के मूल में विचार है, अपने राष्ट्र को परम वैभव बनाना. भौतिक वैभव, शारीरिक वैभव, धन का वैभव के साथ मन का वैभव भी बढ़ाना होगा. यह जो प्रयास चल रहा है, उसका सबसे व्यापक अंग हम हैं.

लक्ष्य और विचार स्पष्ट है तो अनुशासन आवश्यक है

मोहन भागवत ने कहा कि लक्ष्य और विचार स्पष्ट है तो उसके लिए अनुशासन होना आवश्यक है. जो विचार हम लेकर चले हैं, उसके लिए अनुशासन होना आवश्यक है. कार्य सिद्धि के लिए क्या करना है, ये सब मिलकर निर्णय करेंगे. मेरा निर्णय चाहें जो भी हो स्वीकार सामूहिक निर्णय को ही करना चाहिए. संघ युक्त होकर कार्य करना है यही ध्येय होना चाहिए. हम संगठन के घटक के नाते समाज में कुछ स्थान जरूर रखते हैं. कार्य सफलता के लिए ध्येय रखना आवश्यक है. अति उत्साह नहीं बल्कि बुद्धि, विवेक, चतुरता से काम लेना चाहिए. योग्य समय पर ही अपने कौशल का प्रयोग करना चाहिए.

अनुशासन टेक्नीकल नहीं होता

उन्होंने ने कहा कि अपने कार्य का अनुशासन क्या है जानना होगा. अनुशासन संवर्द्धित होता है टेक्निक्ल नहीं. यह मन से होता है. जिसमें आपसी सामंजस्य बैठता है. नहीं तो औपचारिकता को लेकर सब उल्टा पुल्टा हो जाता है. किसी भव्य लक्ष्य के लिये सभी को एकजुट होकर कार्य करना है, तो अपना कार्य साधना है. यह किसी के विरोध में नहीं है. सभी के कल्याण के लिए है और इस कार्य को करने वाला स्वयं भी अच्छा बन जाता है. जो सात्विक होकर कार्य करता है, वह पद की लालसा नहीं करता. मेरा काम कार्यक्रम को योग्य बनाना है.

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