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पांच रुपये में इलाज कर बिता दी पूरी जिंदगी, अब मिला डॉ एसपी मुखर्जी को पद्मश्री सम्मान

डॉ मुखर्जी ने इस सम्मान को गरीबों की सेवा का परिणाम बताया

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Ranchi :  पांच रुपए,  सही मायने में देखा जाये तो इस दौर में भरपेट खाना तक पांच रुपये में नसीब नहीं होता. महंगाई ऐसी है कि हजार रूपया भी कई बार दस रूपये वाली फीलिंग दे जाता है. वहीं इस कमरतोड़ महंगाई में परिवार को अच्छी परवरिश देना भी किसी चुनौती से कम नहीं है. और अगर ऐसे में बीमारी से पाला पड़ जाये तो फिर दिन में तारे नजर आ जाया करते हैं. डॉक्टर के चक्कर और महंगे टेस्ट से मुक्ति मिल जाये तो फिर महंगी दवाइयों का सिरदर्द आ धमकता है.

लेकिन इस परिवेश में भी एक डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ पांच रूपये में मरीजों का इलाज करते हुए अपनी पूरी जिंदगी गुजार दी. ऐसे समय में, लोग पैसे के पीछे भाग रहे हैं, लोगों को शान-ओ-शौकत बढ़ाने के लिए पैसे चाहिये- तब डॉ एसपी मुखर्जी ने पांच रुपये फीस लेकर इलाज करना शुरू किया. जिसका सिलसिला आज तक जारी है. पूछे जाने पर वो इस बाबत कहते हैं- हां, रकम बहुत छोटी जरूर है, मगर बदले में मरीजों की मिलने वाली दुआ किसी अमृत के घड़े से कम नहीं. मुझे इसी से ताकत और प्रेरणा मिलती है.

सबकुछ असंभव सा लगता है. लेकिन रांची में ऐसे ही डॉक्टर हैं एसपी मुखर्जी. लालपुर चौक के पास ही उनका क्लिनिक है. जहां वे प्रतिदिन शाम के वक्त मरीजों का इलाज करते हैं. वैसे तो इन्हें कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है. लेकिन बीते गणतंत्र दिवस के अवसर पर डॉ मुखर्जी को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया.

पटना से रांची आकर शुरू की प्रैक्टिस

डॉ मुखर्जी का जन्म पटना में हुआ है. उनकी पढ़ाई-लिखाई पटना कॉलेज से ही हुई है. सर्वप्रथम 1959 में आरा में सीविल असिस्टेंट, इसके बाद दरभंगा मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता और फिर रांची के रिम्स में प्रोफेसर के रूप में पोस्टिंग हुई. डॉ मुखर्जी बताते हैं कि 1966 से ही लालपुर चौक पर छोटा सा क्लिनिक खोलकर गरीब मरीजों की सेवा शुरू की, जो आज भी जारी है.

न्यूजविंग संवाददाता ने डॉ एसपी मुखर्जी से मिलकर कई विषयों पर बातें की, प्रस्तुत है उस बातचीत के कुछ प्रमुख अंश-

प्रश्न : पद्मश्री से आपको नवाजा गया इसके लिए बहुत-बहुत बधाई, आप इस सम्मान को कैसे देखते?

जवाब : मैं 50-55 साल से गरीबों की सेवा करता आ रहा हूं. यह उसी का परिणाम है. लोगों की दुआ और उनके आर्शिवाद से ही मुझे यह सम्मान मिला है.

प्रश्न : सिर्फ पांच रुपए में लोगों का इलाज आप कब से कर रहे है?

जवाब : जब से मैंने यह लोगों का इलाज करना शुरु किया, उसी समय पांच रुपए फीस तय किया गया था. जो आज तक बरकार है. न इसे कभी बढ़ाया गया और न ही आगे कभी बढ़ाया जायेगा.

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प्रश्न : दूसरे डॉक्टरों को क्या संदेश देंगे?

जवाब : सभी डॉक्टरों को प्रतिदिन कम से कम एक-एक व्यक्ति का नि:शुल्क इलाज करना चाहिए. इससे समाज का कल्याण होगा. लोगों की इच्छाएं बढ़ रही है. इसे पूरा करने के लिए लोग ज्यादा से ज्यादा इनकम करना चाहते हैं. ऐसे में इच्छाएं थोड़ी कम हो जाए तो सारी समस्याओं का समाधान स्वंय हो जायेगा.

 

प्रश्न : वर्तमान समय में डॉक्टर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रहे हैं, आप इसे कैसे देखते हैं.

जवाब : दोनों तरफ की बात है. हर बार कोई डॉ गलत नहीं होता. डॉ जानबूझकर लापरवाही नहीं करते हैं. एक्ट में मरीज और डॉक्टर दोनों को सुरक्षा मिलना चाहिए.

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