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मंद पड़ रही अर्थव्यवस्था की रफ्तार खतरे की घंटी : HDFC चेयरमैन

Mumbai : एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने भरोसा जताया कि कम खपत के कारण आयी नरमी की प्रकृति अस्थायी है क्योंकि देश भर में संपत्तियों की मांग पर्याप्त है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में साफ तौर पर नरमी है. जो की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है. यह 2018-19 में 6.8 प्रतिशत की कम जीडीपी वृद्धि दर से साफ झलकती है.

पारेख ने यह भी कहा कि नकद संकट की वजह से बहुत सारी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां भी कर्ज देने से डर रही हैं. पारेख ने कहा कि अगर इकॉनमी में ग्रोथ चाहिए तो फिर कर्जदाताओं में दोबारा विश्वास पैदा करना होगा.

क्योंकि कर्जदाताओं द्वारा रिस्क लेने से डरना फिलहाल बड़ी चुनौती बनी हुई है. गौरतलब है कि आठ कोर इंडस्ट्रीज की ग्रोथ 50 महीने के न्यूनतम स्तर पर गिरते हुए जून में 0.2 प्रतिशत पर पहुंच गयी. वहीं, मई में यह आंकड़ा 4.3 प्रतिशत का था.

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खपत में व्यापक तौर पर नरमी है

पारेख ने कंपनी की 42वीं सालाना आम बैठक में कहा कि खपत में व्यापक तौर पर नरमी है, अर्थव्यस्था में निहित मांग और उसके बढ़ने की संभावना को देखते हुए मुझे भरोसा है कि यह नरमी अस्थायी प्रकृति की है.

चेयरमैन ने उम्मीद जताई कि त्योहारों का मौसम नजदीक आते-आते हालात सामान्य होंगे. पारेख का मानना है कि समस्याओं को बढ़ाने में नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के पास नकद की कमी और बैंकों द्वारा कर्ज देने के प्रति कड़ा रुख अपनाना ही बड़ी वजह है.

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कमर्शियल रीयल एस्टेट की मांग बढ़ी

उन्होंने कहा कि देश भर में सस्ते मकान की पर्याप्त मांग बनी हुई है. सरकार की ‘क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना’ और कंपनियों को सस्ते आवास की आपूर्ति के लिये दिये जा रहे प्रोत्साहनों से इसे समर्थन मिल रहा है.

पारेख ने यह भी कहा कि कमर्शियल रीयल एस्टेट की मांग खासकर देश के प्रमुख आठ शहरों में अच्छी बनी हुई है. कुछ स्थानों पर खुदरा जगहों के लिये भी मांग बढ़ी है.

इसके अलावा आईटी क्षेत्र, ई- वाणिज्य और पेशेवर एवं सेवा क्षेत्र में वाणिज्यिक रीयल एस्टेट की मांग को भी साफ तौर पर देखा जा सकता है. हाल के दिनों में पेंशन कोष, सावरेन कोषों और निजी इक्विटी कोषों ने देश के वाणिज्यिक रीयल एस्टेट क्षेत्र में काफी रुचि दिखाई है.

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