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विश्व एड्स दिवस पर विशेष… असमानताओं को समाप्त करें, एड्स का करें अंत

World AIDS Day 2021: एक दिसंबर को हर साल पूरी दुनिया में विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है. इस दिन लोगों को एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम के बारे में जागरूक किया जाता है. एड्स एक खतरनाक बीमारी है. एड्स की बीमारी का काफी देर बाद पता चलता है और मरीज भी एचआईवी टेस्ट के प्रति सजग नहीं रहते, इसलिए अन्य बीमारी का भ्रम बना रहता है.  आमतौर पर असुरक्षित यौन संबंध बनाने से लोग एड्स की चपेट में आते हैं. इंफेक्शन से भी एडस फैलता है. इसलिए एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है.

असमानताओं को समाप्त करें, एड्स का अंत करें

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विश्व एड्स दिवस 2021 के लिए इस वर्ष की थीम है- ‘असमानताओं को समाप्त करें, एड्स का अंत करें.’ वर्ष 2008 के बाद, प्रत्येक वर्ष की थीम को विश्व एड्स अभियान (डब्ल्यूएसी) की ग्लोबल स्टीयरिंग कमेटी द्वारा चुना जाता है.

कैसे हुई विश्व एड्स दिवस की शुरुआत

अगस्त 1987 में वैश्विक स्तर पर विश्व एड्स दिवस मनाने की शुरूआत WHO के एड्स जागरुकता अभियान से जुड़े जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर नाम के दो व्यक्तियों ने की थी. शुरुआती दौर में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था. जबकि एचआईवी संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है.

विश्व एड्स दिवस पहली बार 1 दिसंबर, 1988 को मनाया गया था. इस दिन को पहली बार 1987 में एड्स पर वैश्विक कार्यक्रम के लिए दो सार्वजनिक सूचना अधिकारियों जेम्स डब्ल्यू. बन और थॉमस नेटर द्वारा प्रस्तावित किया गया था. अभियान के पहले दो वर्षों में, विश्व एड्स परिवारों पर एड्स के प्रभाव को उजागर करने के लिए बच्चों और युवाओं के विषय पर केंद्रित दिवस था. इसके बाद साल 1996 में HIV/AIDS पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इसके प्रचार और प्रसार का काम संभालते हुए साल 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत संचार, रोकथाम और शिक्षा पर काफी काम करना शुरू किया था.

लोगों को जागरूक करना उद्देश्य

वर्ल्ड एड्स डे मनाने का उद्देश्य एचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली महामारी एड्स के बारे में हर उम्र के लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है. एड्स आज के आधुनिक समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है. UNICEF की रिपोर्ट की मानें तो अब तक 37 मिलियन से ज्यादा लोग HIV के शिकार हो चुके हैं जबकि भारत सरकार द्वारा जारी किए गए आकड़ों के अनुसार भारत में एचआईवी के रोगियों की संख्या लगभग 3 मिलियन के आसपास है.

एचआईवी एक प्रकार के जानलेवा इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है. इसमें जानलेवा इंफेक्शन व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है जिसकी वजह से शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में सक्षम नहीं हो पाता.

एचआईवी के लक्षण

HIV मरीजों के लिए संक्रमण के अलग अलग स्टेज होने के कारण, AIDS के लक्षण भी अलग अलग होते हैं. हालांकि, HIV पीड़ित पहले कुछ महीनों में सबसे अधिक संक्रामक होते हैं, लेकिन फिर भी कई लोगों को यह एहसास नहीं होता है कि वे बाद के स्टेज तक संक्रमित हैं. शुरुआती स्टेज के दौरान, लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते या इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी जैसे कि बुखार, सिरदर्द, चकत्ते या गले में खराश नजर आता है. शरीर में गिल्टियों का बढ़ जाना व जीभ पर भी काफी जख्म आदि हो सकते हैं. जब इस तरह के लक्षण दिखे तो तुरंत अपनी जांच करवा लें.

HIV के शुरुआती लक्ष्ण नहीं दिखते

प्रारंभिक एचआईवी लक्षण आमतौर पर संचरण के एक से दो महीने के भीतर उत्पन्न होते हैं. हालांकि, वे एक्सपोजर के दो सप्ताह बाद ही आ सकते हैं. इसके अलावा, कुछ लोगों को एचआईवी होने के बाद शुरुआती लक्षणों का अनुभव नहीं हो सकता है. यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ये प्रारंभिक एचआईवी लक्षण सामान्य बीमारियों और स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़े हैं. एचआईवी स्थिति के बारे में सुनिश्चित होने के लिए, परीक्षण विकल्पों के बारे में स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करने पर विचार करें.

टेस्ट से ही HIV संक्रमण की पहचान

किसी व्यक्ति को एचआईवी है या नहीं, यह जानने का एकमात्र तरीका टेस्ट है. एचआईवी टेस्ट करवाना ही यह निर्धारित करने का एकमात्र तरीका है कि वायरस शरीर में है या नहीं. ऐसे ज्ञात जोखिम कारक हैं जो किसी व्यक्ति के एचआईवी संक्रमित करने की आशंका को बढ़ाते हैं. उदाहरण के लिए, जिन लोगों ने बिना कंडोम का इस्तेमाल किए एक से ज्यादा लोगों से यौन संबंध बनाएं हैं या एक ही सुई को साझा किया है वे अपने डॉक्टर से जांच करवाने का विचार कर सकते हैं.

HIV का इलाज

वर्तमान में HIV पूरी तरह से इलाज योग्य नहीं है. AIDS के इलाज में तीन या अधिक एंटीरेट्रोवाइरल (ARV) दवाएं शामिल हैं जिनका इस्तेमाल बीमारी को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है. एंटीरेट्रोवाइरल ट्रीटमेंट (ART) HIV संक्रमण का इलाज नहीं करता है, लेकिन यह शरीर में वायरल प्रतिकृति को काफी कम कर देता है और इम्यून सिस्टम को अवसरवादी संक्रमणों और कुछ विकृतियों से लड़ने की क्षमता को सुधारने और बहाल करने में मदद करता है.

सामान्य जीवन जी सकते हैं एचआईवी मरीज

एड्स का रोगी भी एक सामान्य जीवन जी सकता है. अगर समय से सही इलाज हो और मरीज नियमित रूप से दवा लें. जिस तरह से हाईपरटेंशन के मरीज एक गोली खाकर लंबी जिंदगी जी सकते हैं. उसी तरह एड्स के मरीज भी दवा का सहारा लेकर सामान्य जीवन जी सकते हैं.

 

Nayika

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