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हिंदी दिवस पर विशेष : राजभाषा हिंदी कब बनेगी पूरे देश की भाषा

New delhi : 14 सितंबर को देश में हिंदी दिवस मनाने का प्रचलन है. वैसे सितंबर की शुरूआत से ही सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों में हिंदी पखवाडा मनाया जाता रहा है. इस साल कोरोना महामारी की वजह से हिंदी दिवस का शोर नहीं सुनाई पड़ रहा. हिंदी को राजभाषा का दर्जा 14 सितंबर 1949 को मिला और संविधान के भाग-17 में इससे संबंधित प्रावधान जारी किए गए. इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण  हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है. हिंदी बेशक राजभाषा है फिर भी अभी तक यह पूरे देश की भाषा नहीं बन सकी है. वैसे भारत भाषाई और सांस्कृतिक बहुलता वाला देश है और यहीं हमारी राष्ट्रीय एकता की पहचान भी है.

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25.79 करोड़ भारतीय मातृभाषा के रूप में हिंदी का इस्तेमाल करते हैं

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2001 की जनगणना के अनुसार, लगभग 25.79 करोड़ भारतीय हिंदी का उपयोग मातृभाषा के रूप में करते हैं. साथ ही 42.20 करोड़ लोग इसकी 50 से अधिक बोलियों में से एक इस्तेमाल करते हैं. हिंदी की प्रमुख बोलियों में मारवाड़ी, ब्रजभाषा, अवधी, भोजपुरी, गढ़वाली, हरियाणवी, कुमांऊनी, मागधी आदि शामिल है.

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हिंदी के राजभाषा बनने की कहानी

आजादी मिलने के बाद देश के समक्ष भाषा को लेकर सबसे बड़ा सवाल था. क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं.  ऐसे में कौन सी राष्ट्रभाषा चुनी जाएगी ये काफी जटिल सवाल था. हिंदी और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की भाषा चुना गया. हालांकि दक्षिण भारत के राज्यों में रहने वालों को डर था कि हिंदी के लागू हो जाने से वे उनकी भाषाएं कमजोर हो जायेगी. हिंदी को लागू करने और न करने के आंदोलनों के बीच वर्ष 1963 में ‘राजभाषा कानून’ पारित किया गया, जिसने 1965 के बाद अंग्रेजी को राजभाषा के तौर पर इस्तेमाल न करने की पाबंदी को खत्म कर दिया.

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हिंदी को देश की राजभाषा बनाने के बाद से ही दक्षिण भारत के राज्यों में आंदोलनों और प्रतिरोध का लंबा दौर चला. कई छात्रों ने आत्मदाह तक कर लिया. इसके बाद तताकालीन सूचना और प्रसारण मंत्री रहीं इंदिरा गांधी के प्रयासों से इस समस्या का समाधान ढूंढ़ा गया. समाधान यह था कि अंग्रेजी को देश की राजभाषा के रूप में तब तक आवश्यक मान लिया गया जब तक कि गैर-हिंदी भाषी राज्य ऐसा चाहते हो. आज भी यहीं व्यवस्था चली आ रही है.

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