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2018-19 में मनरेगा के तहत भूमि विकास संबंधी योजनाओं को प्राथमिकता, मृदा एवं जल संरक्षण पर विशेष जोर

श्रम बजट तैयार करने का केंद्र से मिला है निर्देश, मनरेगा योजनाओं की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति 10 जनवरी से 20 जनवरी कर लेनी है प्रखंड को

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Ranchi : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत ग्रामीण क्षेत्र के हर घर को साल में 100 दिन का काम मिलने का कानूनी अधिकार दिया गया है. लेकिन, राज्य में मनरेगा मजदूरों को 100 दिन काम नहीं मिल पता है. मनरेगा योजना में बिना कार्य किये योजना राशि की निकासी, समय पर काम पूरा नहीं करना, बजट से अधिक योजना की राशि निकाल लेना, ऐसे कई कारनामे राज्य में किये जा चुके हैं. देश की सबसे बड़ी योजनाओं में एक मनरेगा योजना है. झारखंड की स्थिति यह है कि मनरेगा योजना जारी रहने के बाद भी बड़े पैमाने पर पलायन राज्य से होता रहा है. वहीं, मनरेगा योजना की कमियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को 2018-19 की योजनाओं के लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा श्रम बजट तैयार करने को कहा है. मनरेगा योजना के लिए वर्ष 2018-19 के लिए 55,000 करोड़ का बजट केंद्र सरकार द्वारा तय किया गया है. इसकी विस्तृत मार्गदर्शिका सभी राज्यों को भेजी गयी है. इसके अलोक में ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार की ओर से मनरेगा अयुक्त ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों, उपविकास आयुक्तों सह जिला कार्यक्रम समन्वयकों को श्रम बजट तैयार करने का दिशा-निर्देश जारी किया गया है.

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किस तरह की योजनाओं को मिलनी है श्रम बजट में प्राथमिकता

मनरेगा आयुक्त द्वारा सभी जिलों को मार्गदर्शिका एवं दिशा-निर्देश भेजे गये हैं. इस दिशा-निर्देश में मनरेगा योजनाओं में मृदा एवं जल संरक्षण आधारित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चयन करने को कहा गया है. मनरेगा योजना को रोजगारपरक बनने के लिए कृषि आधारित योजना का चयन किया जाना है, जिसमें कृषि भूमि, जो ऊंचाई (उच्च भूमि) पर है, वैसी भूमि का उचित प्रबंधन करने के लिए मेड़बंदी पर जोर देने की प्राथमिकता विभाग द्वारा निर्धारित की गयी है. इसमें कहा गया है कि मेढ़ मजबूत नहीं होने से अधिकांश वर्षा जल खेत से बाहर निकल जाता है, जिससे खेतों से उपजाऊ मिट्टी बह जाती है. यह प्रक्रिया साल-दर-साल  जारी रहने से कृषि भूमि की ऊपरी मिट्टी खत्म हो जा रही है. इसके कारण राज्य में लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है. वहीं विभाग का मानना है कि ग्रामीणों को सुदृढ़ करने हेतु अधिक से अधिक भूमि के विकास से संबंधित योजनाओं का चयन किया जाये.

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मनरेगा योजना को बेहतर संचालन के लिए जारी किया गया कैलेंडर

मनरेगा योजनाओं के बेहतर ढंग से संचालन के लिए नियोजन प्रक्रिया राज्य, प्रखंड पंचायत स्तर पर विभिन्न प्रशिक्षणों का आयोजन करने की आवश्यकता बतायी गयी है. इसके लिए तरीख भी तय कर दी गयी है. इसके तहत जिलास्तरीय अनुसहयोग एवं अनुश्रवण का राज्यस्तर पर प्रशिक्षण 15 नवंबर तक सभी जिलों में करने को कहा गया है. वहीं, सभी उपविकास आयुक्तों को राज्यस्तरीय एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम 20 नवंबर 2018 को करना है. वहीं, प्रखंड विकास पदाधिकारी का जिलास्तरीय एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम 25 नवंबर को पूरा करना है. प्रखंडस्तरीय मुख्य प्रशिक्षक का राज्य स्तर पर दो दिवसीय प्रशिक्षण 25 नवंबर को पूरा करना है. वहीं, मुखी योजना दल का चयन तीन दिसंबर 2018 तक पूरा किया जाना है. वार्डवार तीन दिवसीय नियोजन प्रक्रिया 7 दिसंबर से 31 दिसंबर तक पूरी करनी है. सभी योजनाओं को प्रखंड प्रशासन द्वारा तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति करने की तारीख 10 जनवरी से 20 जनवरी 2019 तक तिथि निर्धारित की गयी है.

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