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परिचर्चा में वक्‍ताओं ने कहा : संविधान के अधिकारों पर ध्यान देते हैं लोग, लेकिन नहीं करते कर्तव्यों की बात

गणतंत्र के 70 वर्ष और आम आदमी विषय पर परिचर्चा का आयोजन

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Ranchi : वर्तमान में समस्त देश की जो हालत है, उससे यही प्रतीत होता है कि संविधान को लोग खेल समझते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कहीं न कहीं आम जनता को दबाया जाता है. संविधान की प्रस्तावना में अद्भुत बातें लिखी गयी हैं, जिसे लोग समझते नहीं. उक्त बातें गणतंत्र के 70 वर्ष और आम आदमी विषय पर आयोजित परिचर्चा में शुक्रवार को वक्ताओं ने कहा. परिचर्चा का आयोजन आल इंडिया पीपुल्स फोरम की ओर से किया गया.

जिसमें वक्ताओं ने कहा कि लोग अधिकारों की बात तो करते हैं. लेकिन अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ लेते है. कुछ लोगों की अवधारणा अब ये भी बन गयी है कि जो हो रहा है उसे होने दिया जाए. ऐसे में समाज विपरित परिस्थितियों में चला जा रहा है. आने वाले समय में स्थिति और भी विकट हो जायेगी. जिस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा. परिचर्चा का आयोजन मंथन युवा संस्थान में किया गया.

मानव को वस्तु बना दिया गया है

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वक्ताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मानव को वस्तु बना दिया गया है. तभी तो लोगों को प्रशिक्षित करने के बजाय, सीधे उन्हें काम से निकाल दिया जाता है. जबकि होना ये चाहिए कि किसी भी काम के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया जाए. वक्ताओं ने कहा कि राज्य की स्थिति तो इस मामले और भी बदतर है. क्योंकि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ यहां की नीति बन गयी है.

पहले ही हो चुकी थी भविष्यवाणी

गणतंत्र की स्थिति देश में ऐसी होगी, इसकी भविष्यवाणी बहुत पहले हो चुकी थी. 60-70 के दशक के कविताओं को उपान्यासों में इसका जिक्र मिलता है कि एक समय ऐसा आयेगा जब इंसान कौड़ी के मोल बिकेंगे. वक्ताओं ने कहा कि आज की स्थिति भी ऐसी ही है. जहां इंसान की कोई कीमत नहीं. लोगों के स्वाभिमान, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा आदि में ठेस पहुंचाया जाता है. अधिकारियों की बात नहीं मानने से उनका शोषण किया जाता है.

ये थे उपस्थित

मौके पर बसीर अहमद, हरबिंदर बीर सिंह, डॉ फ्रेंकलीन बारला, बसीर अहमद, फैसल अनुराग, अनिल अंशुमन, प्रेमचंद्र मुर्मू, एके रशीदी, जेवियर, नदीम खान समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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