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पर्यावरण, कानून नीति और ग्राम सभा के सेमिनार में वक्ताओं ने कहा- देश में पर्यावरण संरक्षण के जितने कानून उतनी ही दुर्दशा

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  • डॉ नीतीश प्रियदर्शी ने कहा एक सेंटीमीटर मिट्टी बनने में लगते हैं दस से पंद्रह साल, कटाई मिनटों में

Ranchi: पर्यावरण पर जिस तरह खतरा मंडरा है उससे यह स्पष्ट है कि मानव जाति का अस्तित्व संकट में है. देश दुनिया में आज पर्यावरण की बातें हो रही हैं. लेकिन लोगों को जब पर्यावरण संरक्षण की बातें समझ में आयीं तब समय हाथ से निकल गया और बहुत अधिक नुकसान हो गया. उक्त बातें पर्यावरणविद् डॉ नीतीश प्रियदर्शी ने कहीं. वे मंगलवार को बिरसा एमएमसी की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

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उन्होंने कहा कि सामान्य जीवन में भी हम पर्यावरण को कितनी आसानी से क्षति पहुंचाते हैं, इसका आकलन भी कभी किसी ने नहीं किया होगा. एक सेंटीमीटर मिट्टी बनने में दस से पंद्रह साल लगते हैं. लेकिन कितनी आसानी से लोग मिट्टी का नाश करते हैं. आनेवाली पीढ़ी के लिए कुछ नहीं बचने वाला.

पर्यावरण को बचाने के लिए जरूरी है कि मिट्टी को बचाया जाये. कार्यक्रम का आयोजन मनावाधिकार दिवस के अवसर पर किया गया. जिसका विषय पर्यावरण, कानून नीति और ग्राम सभा था.

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पर्यावरण को क्षति पहुंचाने में आदिवासियों की भूमिका सबसे कम

इस दौरान संजय बसु मल्लिक ने कहा कि दुनिया भर में यह देखा गया है कि जल जंगल को बचाने के लिए जितने भी आंदोलन हुए आदिवासियों ने किये. अब भी आदिवासी समाज प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है. पर्यावरण को क्षति पहुंचाने में आदिवासियों की भूमिका सबसे कम है. लोग जितना अत्याधुनिक संसाधनों से लैस हो रहे हैं, कार्बन का दोहन उतना ही अधिक हो रहा है. जबकि लोग जानते हैं कि पर्यावरण के लिए कार्बन हानिकारक है. इसके बाद भी उपकरणों के लोग आदि हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि हमारे देश में पर्यावरण संरक्षण के कई नियम कानून हैं. लेकिन इतने नियमों के बावजूद देश की दुर्दशा है. इन नियम कानूनों का सही से पालन नहीं होना दुर्दशा का मुख्य कारण है. उन्होंने कहा कि जरूरी है कि लोग प्रकृति के प्रति अपनी-अपनी जिम्मेवारी को समझें और इसके संरक्षण के लिए आगे बढ़ें.

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