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झारखंड के 24 में से 13 जिले के एसपी के पास अपने काम के अलावा अतिरिक्त प्रभार का बोझ

Saurav Singh

Ranchi: इन दिनों झारखंड में आइपीएस अधिकारियों की कमी हो गयी है. वर्तमान में हालत ये है कि राज्य में 24 जिले और दो रेल जिले को मिलाकर कुल 26 पुलिस जिला है.

इन 26 जिले में से 13 जिला ऐसे हैं, जिनके एसपी अपने जिले की सुरक्षा और विधि व्यवस्था से संबंधित कामकाज देखने के साथ-साथ जैप,आइआरबी और एसआइआरबी जैसे बटालियन के कामकाज को भी देख रहे हैं.

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जिस तरह से एसपी रैंक के अधिकारियों को जैप, एसआइआरबी और आइआरबी के कई बटालियन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. ऐसे में सवाल ये है कि वो मिले अतिरिक्त प्रभार पर कितना ध्यान दे पायेंगे. इससे साफ जाहिर होता है कि जवानों की सुविधाओं पर ध्यान रखनेवाला कोई नहीं है.

13 जिले के एसपी को मिला अतिरिक्त प्रभार

नाम पद अतिरिक्त प्रभार
अमित रेनू ग्रामीण SP, धनबाद जैप- 3
नरेंद्र कुमार सिंह SP, देवघर जैप-5
मयूर पटेल SP, हजारीबाग जैप-7
अजय लिंडा SP, पलामू जैप-8
अमन कुमार SP, साहेबगंज जैप-9
अंशुमन कुमार SP, जामताड़ा आइआरबी-1
अखिलेश वारियर SP, चतरा आइआरबी- 3
प्रशांत आनंद SP, लातेहार आइआरबी- 4
अंजनी कुमार झा SP, गुमला आइआरबी- 5
कौशल किशोर SSP, धनबाद एसआइआरबी-1
आशुतोष शेखर SP, खूंटी एसआइआरबी-2
शैलेंद्र वर्णवाल SP, गोड्डा आइआरबी-8
सुरेंद्र कुमार झा SP, गिरिडीह आइआरबी-9
इंद्रजीत महथा SP, चाईबासा आइआरबी-10

 

JAP,SIRB,IRB की कुल 20 बटालियन में से 14 प्रभार के भरोसे

झारखंड सरकार ने केंद्र से मिलनेवाली राशि से नयी-नयी बटालियन का गठन तो कर लिया है,लेकिन उनमें कामकाज सुचारु रूप से हो इसकी व्यवस्था ही नहीं की है. बटालियन में कमांडेंट तक की पोस्टिंग नहीं की जाती है.

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हालात यह है कि जैप, एसआइआरबी और आइआरबी कुल 20 बटालियन में से 14 बटालियन प्रभार के भरोसे चल रही है.जिनमें जैप के दस में से पांच बटालियन प्रभार के भरोसे है. आइआरबी के आठ में से सात बटालियन प्रभार के भरोसे और एसआइआरबी के दोनों बटालियन प्रभार के भरोसे ही चल रही है.

जवानों सुविधाओं पर ध्यान रखनेवाला कोई नहीं

जैप,आइआरबी और एसआइआरबी की कुल 20 बटालियन के जवानों को नक्सल प्रभावित इलाकों में बनाये गये 115 से अधिक पिकेटों पर तैनात किया गया है.

झारखंड आइआरबी का गठन नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने के लिए किया गया है. इसकी आठ बटालियन के गठन के लिए पूरी राशि केंद्र सरकार ने दी है,ताकि नक्सलियों से जारी लड़ाई में अर्द्धसैनिक बलों पर निर्भरता को कम किया जा सके.

बटालियनों में कमांडेंट के नहीं होने से पिकेटों के निरीक्षण का काम बंद हो गया है. पिकेटों में निरीक्षण के जो आंकड़े बन रहे हैं, वह ज्यादातर कागजों पर बन रहे है. नियमानुसार, कमांडेंट को साल में एक बार हर पिकेट का निरीक्षण करना है और वहीं पर रात भी बितानी है.

जिस तरह से एसपी रैंक के अधिकारियों को जैप,आइआरबी और एसआइआरबी के कुल 20 में से 14 बटालियन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. ऐसे में सवाल ये है कि वो मिले अतिरिक्त प्रभार पर कितना ध्यान दे पायेंगे. इससे साफ जाहिर होता है की जवानों सुविधाओं पर ध्यान रखनेवाला कोई नहीं है.

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