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एमपी बीजेपी में बगावत के सुरः गौर ने कहा- नहीं मिला टिकट तो निर्दलीय लड़ूंगा

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के बगावती तेवर से बीजेपी परेशान

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Bhopal: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट के बंटवारे पर बीजेपी और कांग्रेस में माथापच्ची जारी है. टिकट के लिए मचे घमासान के बीच भाजपा में बगावत शुरु होती दिख रही है. दरअसल गोविंदपुरा सीट से विधायक और प्रदेश के पूर्व सीएम बाबूलाल गौर ने पार्टी के खिलाफ बोलना शुरु कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि अगर उनका टिकट कटा तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे.

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बाबूलाल की बगावत !

भोपाल की गोविंदपुरा सीट पर बीजेपी ने फिलहाल प्रत्याशी का नाम घोषित नहीं किया है. और ये पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की परंपरागत सीट रही है. बीजेपी की पहली सूची में गोविंदपुरा का नाम नहीं होने से विरोध शुरू हो गया है. बाबूलाल गौर ने पार्टी छोड़ने की धमकी देते हुए कहा है कि पार्टी ने मेरा सीएम पद छीना, फिर मंत्री पद और अब टिकट भी नहीं दे रहे हैं. यह मेरा अपमान है. अपना इरादा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि अगर पार्टी से टिकट नहीं मिला तो बहू कृष्णा गौर गोविंदपुर से निर्दलीय लड़ेंगी और मैं हुजूर से निर्दलीय लड़ने का विचार कर रहा हूं.

अंदरखाने में खबर ये भी है कि गौर के विद्रोह का कांग्रेस फायदा उठाना चाह रही है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेता कमलनाथ ने बाबूलाल गौर से फोन पर बात की और उन्हें कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है. लेकिन इस बात की अब तक पुष्टि नहीं हुई है. इधर बीजेपी की दुविधा ये है कि अगर बाबूलाल गौर की बजाये उनकी बहू को टिकट देती है, तो राजनीति में परिवारवाद का विरोध करनेवाली उसकी छवि को नुकसान पहुंचेगा.

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गोविंदपुरा से दस बार विधायक रहे गौर

ज्ञात हो कि बाबूलाल गौर भोपाल की गोविंदपुरा सीट से 10 बार से विधायक हैं. 89 साल के बाबूलाल गौर ने भोपाल दक्षिण सीट से 1974 में पहला चुनाव लड़ा था. उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी. फिर 1977 में गोविंदपुरा सीट से जीत दर्ज की. तब से वे इस सीट पर लगातार 10 बार से जीतते आ रहे हैं. बाबूलाल गौर करीब 15 महीनों के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे. उन्हें 2016 में मंत्री पद छोड़ना पड़ा था. क्योंकि भाजपा ने 70 की उम्र पार के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी न देने का तय किया था. जिसके बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा.

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