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रोड एक्सीडेंट में घायलों को अस्पताल पहुंचानेवाले व्यक्तियों को प्रोत्साहन राशि देने के लिए बना एसओपी

प्रति स्वास्थ्य केंद्र दिये जायेंगे 25000 रुपये, गवाही के लिए 1000 रुपये प्रतिदिन दिये जायेंगे

Ranchi : राज्य सरकार ने झारखंड गुड सेमेरिटन पॉलिसी 2020 के तहत गुड सेमेरिटन (नेक नागरिक) को प्रदान किये जानेवाले रिवार्ड एवं प्रोत्साहन के लिए नया मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अधिसूचित कर दिया है. नीति को स्वास्थ्य विभाग के पत्र के आलोक में फरवरी 2021 में कैबिनेट की मंजूरी मिली थी. इसके तहत सरकार ने संवेदनशीलता दिखते हुए झारखंड गुड सेमेरिटन पॉलिसी लागू की. ताकि सड़क हादसे में घायलों की मदद के लिए लोग आगे आयें और किसी के जीवन की रक्षा हो सके. घायलों को अस्पताल पहुंचानेवालों को प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाना है. सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डेन आवर एक घंटा के अंदर अस्पताल पहुंचानेवाले व्यक्तियों को नेक नागरिक मानते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया जायेगा. गुड सेमेरिटन को प्रदान की जानेवाली प्रोत्साहन राशि आदि के लिए लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा परिहवन विभाग झारखंड द्वारा सबसे पहले प्रति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 25000 रुपये सभी जिला परिवहन पदाधिकारी को सड़क सुरक्षा कोष से आवंटित किया जायेगा. जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा उक्त राशि बिना किसी विलंब के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को हस्तांतरित करेंगे. इस राशि का उपयोग झारखंड गुड सेमेरिटन पॉलिसी 2020 के नियमानुसार संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा गुड सेमेरिटन (नेक नागरिक) को प्रोत्साहन राशि पुलिस थानों में पूछताछ अथवा न्यायालय में गवाही के लिए बुलाये जाने पर किराये के वाहन के उपयोग के मामले में भुगतान आदि करने के लिए किया जायेगा. जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उपलब्ध करायी गयी यह राशि खाते में रखनी होगी. जारी आदेश के अनुसार गुड सेमेरिटन (नेक नागरिक) को पुलिस थाने में पूछताछ अथवा न्यायालय में गवाही के लिए बुलाये जाने पर प्रति दिन 1000 रुपये की दर से राशि का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जायेगा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के द्वारा इस राशि के लिए अलग से नियमानुसार रोक पंजी रखी जायेगी तथा कार्यालय के ऑडिट के साथ इसका भी ऑडिट कराना होगा. सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को गोल्डन आवर में नजदीकी अस्पताल में पहुंचानेवाले व्यक्ति को गुड सेमेरिटन मानते हुए अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा नीति के तहत प्रपत्र में आवश्यक सूचना दर्ज करायी जायेगी. इसे संबंधित स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी और डीटीओ को भी दिया जायेगा. इसे पदाधिकारी उसी दिन या अगले कार्यदिवस के दिन स्वीकृत करेंगे. इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पदाधिकारी हर माह जिला परिवहन पदाधिकारी को रिपोर्ट करेंगे. इस मद में अगर राशि कम होने की स्थिति में डीटीओ तुरंत राशि का आवंटन भी करना होगा.

हर साल पांच हजार से अधिक रोड एक्सीडेंट, तीन हजार मौत

झारखण्ड में हर साल पांच हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं और तीन हजार से अधिक मौतें होती हैं. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के कारण दुर्घटना और इनमें होने वाली मौतों में काफी गिरावट दर्ज की गयी. इस साल अक्टूबर तक 3366 सड़क हादसे हुए और इनमें 2294 लोगों की मौत हुई है. दुघर्टना में अधिकांश मौत युवाओं की हो रही है. इसको लेकर सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए यह पॉलिसी लागू की थी.

न रहा पुलिस के सवालों का डर, बेफिक्र होकर करें मदद

झारखंड में सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की मृत्यु दर अधिक है. अक्सर देखने में आता है कि सड़क किनारे कोई दुर्घटना हो जाती है और कोई मदद को आगे नहीं आता. इसकी वजह होती है कि ऐसे मामलों में मदद करने वाले को पुलिस द्वारा परेशान किया जाता है. लेकिन अब सरकार ने ऐसे नेक आदमी के संरक्षण के लिए नियम बना दिये हैं. सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की जीवन रक्षा तथा अंग की हानि कम करने के लिए गोल्डन आवर(प्रथम 60 मिनट) में उपचार सर्वाधिक प्रभाव होता है, जिसके लिए घायल व्यक्तियों का गोल्डन आवर में निकटवर्ती अस्पताल में ले जाना आवश्यक है. लेकिन आम लोग, राहगीर द्वारा मानवता के आधार पर सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को निकटवर्ती अस्पताल पहुंचाने की इच्छा रहने के बावजूद भी पुलिस के सवाल-जवाब एवं कानूनी प्रक्रिया में उलझने के डर से अस्पताल ले जाने का प्रयास नहीं किया जाता है.

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