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बुजुर्ग मां को बेटे ने भीख मांगने को छोड़ा, शरीर हैं लाचार, सरकारी मदद का है इंतजार

Ranchi : राजधानी रांची के वीआइपी मार्ग हरमू रोड में एक महिला आस लगाये बैठी रहती है कि कोई उसे सहारा दे ताकि उसकी तकलीफ कुछ कम हो सके. यह वही मार्ग है जहां से मुख्यमंत्री, मंत्री सहित कई आइएएस व आइपीएस पदाधिकारी गुजरते हैं.

सायरन की अवाज में भले ही इस बूढ़ी महिला की आवाज दब जाती हो लेकिन आज भी उसे उम्मीद है कि कोई तो उसकी मदद करने आयेगा. वो मदद भी ऐसी चाहती है जो सिर्फ उसके चलने में मददगार साबित हो.

जी, यह दिव्यांग महिला बिलास देवी सड़क किनारे एक झुग्गी में रहने को लाचार है, यह चल नहीं सकती, जिस कारण आने-जाने वाले लोगों से जो मिलता है उसी से अपना गुजारा करती है.

जबकि महिला का कहना है कि वो लोगों से सिर्फ एक व्हील चेयर दिलाने की बात करती है ताकि उसकी तकलीफ थोड़ी कम हो सके,. लेकिन सरकारी तंत्र में इतनी लंबी प्रक्रिया है कि महिला की जरूरत पूरी होने में कई माह लग सकते हैं या पूरी होने की उम्मीद पर ग्रहण भी लग सकता है.

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निशक्तता आयुक्त ने पूरे मामले को लिया गंभीरता से

इस पूरे मामले को जब राज्य निशक्तता आयुक्त सतीश चंद्र के सामने रखा गया तो उन्होंने महिला को मदद करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि इसकी मदद के लिए कई मापदंडों को पूरा करना होगा, लेकिन यह महिला जब अकेली है और इसके साथ कोई नहीं है तो ऐसी परिस्थिति में उसे मदद की जा सकती है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही उसकी मदद के लिए आगे आयेंगे.

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घंटो सड़क पर घिसटने को मजबूर हैं बुजुर्ग

मां-बाप को भगवान का दर्जा दिया जाता है, कई दुख तकलीफ और दर्द के साथ वह अपने बच्चों को बड़ा करते हैं ताकि वो बेहतर जिंदगी जी सकें. लेकिन जिंदगी के आखिरी पड़ाव में वही बच्चे उनका साथ छोड़ देते हैं. यही स्थिति इस दिव्यांग महिला के साथ है.

हरमू रोड स्थित सहजानंद चौक के पास यह घंटों घिसटने को मजबूर है, लेकिन कोई इंसान मदद के लिए भी आगे नहीं आ रहा है. बुजुर्ग महिला बताती है कि उसके बेटे ने उसे इस हाल में जीने को छोड़ दिया है.

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