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कोई तो ले लो इनके दीये, इन्हें भी मनानी है दिवाली

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Ranchi : राजधानी से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर भूसुर बस्ती में आशा सेंटर है. इस सेंटर में दिवाली की तैयारियां खूब चल रही हैं. महीनों पहले से यहां बच्चे दीये बना रहे हैं. सोंच कर थोड़ी हैरानी होगी कि किसी सेंटर में बच्चे भला क्यों दीये बनायेंगे. तो आपको बता दें कि यह सेंटर अनाथ और असहाय बच्चों की छत है. जहां ये बच्चे चैन से जिंदगी जीते हैं. महंगाई की मार कहें कि वर्तमान समय में इन बच्चों को अपनी जरूरत की चीजों के लिए तरसना पड़ा रहा है. जिससे उभरने के लिये ये बच्चें दिवाली के महीनों पूर्व से दीये बना रहे है.

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पिछले आठ साल से चल रहा सेंटर

आशा सेंटर की स्थापना अजय जायसवाल ने की. पिछले आठ सालों से इस सेंटर में वे अनाथ और असहाय बच्चों को पनाह दें रहे हैं. वर्तमान में इनके सेंटर में 80 बच्चे हैं.

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आर्थिक स्थिति है खराब

संस्थापक अजय जायसवाल ने जानकारी दी कि सेंटर की आर्थिक स्थिति काफी खराब है. बच्चों को दो वक्त का खाना भी बड़ी मुश्किल से दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस संबध में कई बार शिक्षकों को मंत्रियों और अधिकारियों से बात की गयी, लेकिन हर स्तर पर सिर्फ आश्‍वासन ही मिलें. अब सेंटर की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि बस किसी तरह दिन काटा जा रहा है.

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स्कूल के बाद बनाते हैं बच्चे दीये

अजय ने बताया कि इन बच्चों के हुनर को निखारने के लिये सेंटर में पेपर क्विलिंग, दीये, ज्वेलरी आदि बनाने समेत अन्य प्रशिक्षण पीछले एक सालों से दिया जा रहा है. स्कूल से आने के बाद ये बच्चे दीये बनाते हैं. दीयों को सुखाने के बाद इन दीयों में एक्रिलिक और वाटर कलर से रंग भरा जाता है. इस केंद्र में नवजात बच्‍चे से लेकर दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे हैं. बच्चों के बनायें 5000 दीयों का अब तक ऑर्डर आ चुका है. अजय ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों के साथ ही आस पड़ोस के राज्यों से भी ऑर्डर मिला है. जिसमें आडिशा, बिहार जैसे जिले हैं.

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दीया बेचकर बनायेंगे दिवाली

उन्होंने बताया कि केंद्र की हालत इस कागार पर पहुंच गयी है कि इस साल दिवाली बनाने की बात सोंची नहीं जा सकती थी. लेकिन बच्चों का मनोबल कमजोर न हो इसके लिये दीयों बनाकर बेचने का निर्णय लिया गया. जिससे दिवाली के बाद के भी खर्च निकल जायेंगे.

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