न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

जेट के आदेश को कुछ स्कूलों ने बताया तानाशाही, तो कुछ ने झाड़ा पल्ला

32
  • मनमानी फीस बढ़ोतरी करने पर रद्द हो सकती है स्कूलों की मान्यता

Ranchi : झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (जेट) संशोधन अधिनियम राज्य में लागू हो चुका है. लेकिन, इसे लेकर निजी स्कूल संचालकों में असंतोष देखा जा रहा है. निजी स्कूल संचालकों का इस विषय में अलग-अलग मत है. कुछ इसे तानाशाही बता रहे हैं, तो कुछ इसे गलत करनेवाले स्कूलों को डरानेवाली अधिसूचना बता रहे हैं. डीएवी आलोक के प्राचार्य अशोक कुमार ने कहा कि जेट का यह तानाशाही फरमान है. निजी स्कूल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में कटौती नहीं करते. ऐसे में सही फीस लिये बिना शिक्षा कैसे दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि एक तो सरकार कहती है कि शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन दिया जाये और दूसरी तरफ कहती है कि फीस नहीं बढ़ायें. ऐसे में बिना शिक्षकों को रखे विद्यार्थियों को शिक्षा कैसे दी जा सकती है.

स्कूल जेट नियमावली को माने, ऐसा जरूरी नहीं : राम सिंह

इस संबंध में जब डीपीएस के प्राचार्य राम सिंह से बात की गयी, तो उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि जेट नियमावली को स्कूल माने. स्कूलों की अपनी कमिटी होती ही है. जिला स्तर पर भी कमिटी होती है, जो फीस निर्धारण करती है. ऐसे तो स्कूल 10 प्रतिशत फीस खुद निर्धारण कर सकती है, लेकिन बैलेंस शीट का ब्योरा देकर फीस बढ़ायी जा सकती है. ऐसे में जिन अभिभावकों को इन स्कूलों में पढ़ाना है, वे तो पढ़ायेंगे ही. गलत करनेवाले स्कूलों को परेशानी होगी.

बिना कमिटी गठित किये जेट ने लिया निर्णय : अशोक कुमार

कुछ स्कूल प्रबधंकों का कहना है कि जेट का निर्णय बिल्कुल गलत है. बिना किसी कमिटी का गठन किये जेट ने निर्णय ले लिया. डीएवी आलोक के प्राचार्य अशोक कुमार ने कहा कि नियमतः जेट को कमिटी का गठन करना था, जिसमें अभिभावक, स्कूल प्रबंधक, शिक्षा से संबंधित लोग, इस क्षेत्र में कार्य कर रहीं संस्थाएं और सरकार के दो प्रतिनिधि होते हैं. तब जाकर सर्वसम्मति से फीस वृद्धि को लेकर निर्णय लिया जाता है. लेकिन, जेट ने ऐसा नहीं किया. यहां तक कि दूसरे राज्यों में लागू नियमावली से भी जानकारी ली जा सकती थी.

स्कूलों की कैटेगरी बनाये सरकार

इन स्कूलों का कहना है कि सरकार को पहले चाहिए कि निजी स्कूलों की कैटेगरी बनाये. कई स्कूल ऐसे हैं, जो खोले तो गये हैं, लेकिन उनमें विद्यार्थियों को सुविधाएं और सही शिक्षा नहीं मिलती. कैटेगरी बनाकर ही सरकार निर्णय ले. इस कारण से हर तरह के स्कूल नियमावली के कारण परेशानी उठाते हैं.

क्या है अधिनियम में

जेट अधिनियम के तहत निजी स्कूल मनमानी फीस नहीं बढ़ा सकते. अधिनियम प्रभावी होने के बाद अगर स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते हैं, तो 50,000 रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये तक जुर्माना लगेगा. साथ ही, स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जायेगी.

इन स्कूलों ने जवाब देने से किया इनकार

टेंडर हार्ट स्कूल, लाला लाजपत राय, सेक्रेड हार्ट स्कूल, ब्रिजफोर्ड स्कूल ने जवाब देने से इनकार कर दिया.

इसे भी पढ़ें- इंटरव्यू: सेवाभाव से काम करेंगे डॉक्टर तो उन्हें मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की जरुरत ही नहीं पड़ेगी

इसे भी पढ़ें- राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने DPS रांची के प्राचार्य के खिलाफ शुरू की कार्रवाई

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: