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चालू खाता घाटा कम करने के लिये कुछ और उपायों की घोषणा जल्द : जेटली

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New Delhi : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि सरकार राजकोषीय घाटे को तय लक्ष्य के दायरे में रखने को प्रतिबद्ध है और चालू खाते के घाटे को कम करने तथा देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिये जल्द ही कुछ और कदम उठाये जायेंगे. जेटली ने यहां ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट’ में कहा विपरीत वैश्विक हालातों के बावजूद भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए एक प्रमुख स्थान बना रहेगा. हालांकि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को लेकर कुछ अस्थायी दिक्कतें रह सकती हैं, लेकिन यह भी वैश्विक हालात पर ज्यादा दिन निर्भर नहीं रहेंगी.
वित्त मंत्री ने कहा कि राजकोषीय स्थिति को सुदृढ़ बनाए रखना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है. उन्होंने कहा, ‘‘मेरे हिसाब से राजकोषीय अनुशासन को बनाये रखना सबसे जरूरी प्राथमिकताओं में से एक है. यह हमेशा मदद करता है। आप तभी कुछ सुविधा ले सकते हैं जब आपकी राजकोषीय स्थिति मजबूत होती है अन्यथा यह मुमकिन नहीं.’’ जेटली ने कहा, ‘‘धीरे-धीरे राजकोषीय घाटे को हम 4.6% से नीचे लाए हैं और इस साल हम इसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3% पर लाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि जिस तरह का राजस्व संग्रहण प्रत्यक्ष कर से हो रहा है, हम इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे.’’
उन्होंने कहा, जहां तक कैड का सवाल है, यह कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों से जुड़ा है क्योंकि विदेशी मुद्रा का अधिकतर खर्च तेल खरीदने में होता है.

जेटली ने कहा, ‘‘ जिस तरह से कीमतें (कच्चे तेल की) ऊपर जा रही हैं, जो कि पिछले चार साल में सबसे अधिक पर हैं, इसका कैड पर थोड़ा प्रतिकूल असर होगा. हम इसे सीमित करने के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ कुछ और कदम उठाए जा सकते हैं लेकिन यह दो बाहरी बातों पर निर्भर करेंगे। पहला है तेल की कीमतें और दूसरा अमेरिका की नीतियां जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और इससे सारी दुनिया की मुद्राओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।’’
हालांकि, जेटली ने कैड को कम करने के लिये सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों को सार्वजनिक नहीं किया. लेकिन सरकार के कुछ कदमों का उदाहरण दिया.जेटली ने कहा कि सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिये बाजार उधारी के लक्ष्य में 70 हजार करोड़ रुपये की कमी की है. वहीं पेट्रोलियम पदार्थेां का विपणन करने वाले तेल कंपनियों को विदेशों से एक साल में 10 अरब डॉलर तक जुटाने की अनुमति दे दी है. इसके अलावा मसाला बांड पर विदहोल्डिंग कर को फिलहाल हटा लिया गया है.

देश की अर्थव्यवस्था के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि देश के पास मौजूदा वृद्धि दर को अगले एक दशक तक बनाए रखने की क्षमता है.अतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से देश के चालू खाते घाटे पर असर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हुई 85 डालर प्रति बैरल से ऊपर निकल गई हैं वहीं डालर के मुकाबले रुपया तेजी से गिरता हुआ 74 रुपये प्रति डालर के स्तर को छू गया है. इससे देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह पर दबाव बढ़ गया है. चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में चालू खाते का घाटा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.4% रहा जो 2017-18 की इसी तिमाही में 2.5% था.

 

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