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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ पहले स्थान पर, झारखंड नीचे से चौथा

झिरी में प्लांट नहीं लगने से रांची की स्थिति दयनीय

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Nitesh ojha

Ranchi: केन्द्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण में झारखंड को बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट का प्रथम पुरस्कार दिया था. लेकिन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में राज्य की स्थिति दयनीय है. शहरी विकास मंत्रालय ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर अपने वेबसाइट में स्टेट वाइज आंकड़े जारी किये हैं. इसमें झारखंड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में नीचे से चौथे स्थान पर है. वहीं छतीसगढ़ का स्थान पूरे देश भर में पहला है.

रांची शहर की बात की जाए तो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत झिरी में डिस्पोजल प्लांट लगना था. लेकिन रांची नगर निगम के अफसरों का प्लान अब तक कागजों पर ही सिमट कर रह गया है.

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2011 में बनी थी योजना, अब तक नहीं पड़ी नींव

शहर से निकलने वाले कचरे से बिजली पैदा करने की योजना वर्ष 2011 में बनी थी. तब शहर की सफाई कार्य करने वाली तत्कालीन एटूजेड कंपनी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम देख रही थी. उस दौरान निगम ने एटूजेड को शहर की साफ-सफाई के साथ-साथ झिरी में वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट लगाने की भी जिम्मेवारी सौंपी थी. कंपनी ने करीब 30 माह तक शहर की सफाई का काम किया, लेकिन वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट लगाने की दिशा में कुछ नहीं किया. उसके बाद निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम करने वाली कंपनी एस्सेल इन्फ्रा के साथ अक्टूबर 2015 में झिरी में प्लांट लगाने का एग्रीमेंट किया था. इसके तहत कंपनी को शहर से कूड़ा का उठाव करने के साथ ही प्लांट लगाने का काम भी करना था. लेकिन हकीकत यह है एस्सेल इंफ्रा आज तक झिरी में पावर प्लांट की नींव तक नहीं डाल पायी है.

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पहले प्लांट लगता, फिर होता कचरे का उठाव: आशा लकड़ा

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर झिरी में प्लांट नहीं लगने के मुद्दे पर न्यूज विंग रिपोर्टर नितेश ओझा ने रांची की मेयर आशा लकड़ा से बातचीत की. उनका कहना था कि शहर में कचरे का उठाव तो सही तरीके से किया जा रहा है, लेकिन अभी भी झिरी में प्लांट नहीं लग पाया है. हालांकि मेयर ने यह भी कहा कि इसपर अभी काम चल रहा है. संबंधित कंसल्टेंसी यहां कचरे के निष्पादन करने का प्रयास कर रही है.

2011 में प्लांट लगने की बनी योजना के सवाल पर मेयर आशा लकड़ा का कहना था कि 2016 में निगम की बोर्ड बैठक में इस विषय पर एक प्रस्ताव लाया गया था. उस वक्त उन्होंने यही कहा था कि झिरी में पहले प्लांट लगाया जाए, उसके बाद कचरे का उठाव हो. इसके बावजूद प्लांट तो नहीं लगा, लेकिन कचरे का उठाव होता रहा. नतीजा यह हुआ कि लाखों मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया.

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डिबार नहीं होने के डर से कंपनी शुरु करे काम: संजीव विजयवर्गीय

पूरे मामले पर मेयर के बयान के उलट रांची के डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय का कहना है कि अबतक इस कार्य के लिए निगम ने दो कंपनियों एटूजेड और एस्सेल इंफ्रा को काम सौंपा था. उन्होंने बताया कि पहली कंपनी एटूजेड ने सफाई का काम तो किया, लेकिन वेस्ट मैनेजमेंट का काम शुरु भी नहीं किया गया. इसके कारण उसे काम से हटाया गया. एस्सेल इंफ्रा कंपनी पिछले दो साल से शहर की साफ-सफाई का काम तो देख रही है, लेकिन झिरी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का काम अभी तक उसने शुरु नहीं किया है. चूंकि सफाई को लेकर कंपनी के साथ एक एग्रीमेंट किया गया है, इसलिए तत्काल तो उसे हटाया नहीं जा सकता. हालांकि निगम बोर्ड की बैठक में डिबार करने का निर्देश दिया गया है. उम्मीद है कि डिबार नहीं होने से बचने के लिए कंपनी झिरी में प्लांट लगाने का काम करेगी.

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छत्तीसगढ़ से पीछे है झारखंड : रिपोर्ट

शहरी विकास मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि देश में म्यूनिसिपल कचरे का 75 प्रतिशत हिस्सा, बिना प्रोसेसिंग के बिना ही डम्प की जा रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड का राज्यों में नीचे से चौथा स्थान है. इसके नीचे से अन्य तीन राज्य अरुणाचल प्रदेश, दादर नगर हवेली और जम्मू-कश्मीर हैं. वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन करीब 2,327 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है. इसमें करीब 2 प्रतिशत का ही प्रोसेसिंग हो पाता है. वहीं बेस्ट परफार्मिंग स्टेट कैटेगरी में झारखंड से पीछे होने के बावजूद छत्तीसगढ़ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में प्रथम स्थान पर है. रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 1,680 मीट्रिक टन कचरा प्रतिदिन पैदा होता है. इसमें करीब 74 प्रतिशत कचरे का प्रोसेसिंग वहां होता है.

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