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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांटः एस्सेल इंफ्रा ने कहा- 90 % डेब्ट लाइबिलिटी वहन करे सरकार

160 करोड़ की जगह अब 90 करोड़ होंगे खर्च, 11.5 मेगावाट (प्रतिदिन) की जगह अब होगा 6 मेगावाट बिजली का उत्पादन

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Ranchi: राजधानी रांची के झिरी में लगने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगने का रास्ता साफ होता दिख रहा है. नगर विकास विभाग सचिव के निर्देश के बाद एस्सेल इंफ्रा कंपनी ने नगर आयुक्त को रिपोर्ट सौंपी है. जिसमें बताया गया है कि कंपनी प्लांट लगाने को तैयार है. पहले इस प्लांट पर जहां 160 करोड़ राशि खर्च होनी थी, वहीं अब करीब 90 करोड़ की लगात आएगी. जल्द ही प्लांट लगाने का काम शुरू किया जाएगा. इससे शहर से निकलने वाले कूड़े से करीब 6 मेगावाट यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकेगा.

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कंपनी का कहना है कि प्लांट लगाने में कुछ पेंच अभी भी है. भविष्य में अगर कंपनी को कभी टर्मिनेट कर दिया जाता है. उस दशा में प्लांट पर खर्च किये कंपनी की राशि की करीब 90 प्रतिशत डेप्थ लाइबिलिटी सरकार को वहन करनी चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी जिन अन्य शहरों में सफाई कार्य और प्लांट का काम देख रही है, उसमें भी सरकार एक बड़ी राशि डेब्ट लाइबिलिटी के रुप में वहन कर रही है. इसपर नगर आयुक्त ने कंपनी को अगले 7 दिनों में प्लांट के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (पीएमसी) को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. ताकि उसके सुझाव को विभाग को भेजा जा सके.

2011 में बनी थी योजना, अबतक नींव नहीं पड़ी

मालूम हो कि झिरी में लगने वाला यह प्लांट, राज्य का पहला वेस्ट पावर प्लांट हैं. झिरी डंपिंग यार्ड में जमा होने वाले कचरे से इस प्लांट के द्वारा करीब 11.5 मेगावाट (प्रतिदिन) बिजली उत्पादन करने की बात कही गयी थी. कचरे से बिजली पैदा करने की योजना वर्ष 2011 में बनी थी. तब शहर की सफाई का जिम्मा संभाल रही तत्कालीन एटूजेड कंपनी यहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम देख रही थी. कंपनी ने करीब ढाई साल तक शहर की सफाई का काम किया. लेकिन वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट लगाने की दिशा में कुछ नहीं कर सकी.

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उसके बाद सफाई का काम लेने वाली एस्सेल इन्फ्रा के साथ अक्टूबर 2015 में झिरी में प्लांट लगाने का एग्रीमेंट किया गया. इसके तहत कंपनी को शहर से कूड़ा का उठाव करने के साथ ही पावर प्लांट लगाने का काम भी करना था. करीब तीन साल बीतने को हैं, लेकिन अबतक प्लांट की नींव तक नहीं पड़ी है.

नगर विकास सचिव ने दिया था निर्देश

प्लांट नहीं लगने से हो रही आलोचनाओं को देखते हुए नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह ने गत 8 सितम्बर को विभाग के आला अधिकारियों संग एक बैठक की थी. बैठक में उन्होंने कंपनी को आदेश दिया था कि, वह अगले एक सप्ताह में निगम आयुक्त को रिपोर्ट सौंप कर बतायें कि वह प्लांट का निर्माण करना चाहती है कि नहीं. इसी आलोक में दो दिन पहले नगर आयुक्त ने कंपनी के आला अधिकारियों संग एक बैठक की थी. बैठक में कंपनी ने कहा कि कंपनी प्लांट लगाना चाहती है, लेकिन इसमें कुछ पेंच हैं, जिसका निदान करना जरुरी है.

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90 फीसदी डेब्ट लाइबिलिटी वहन करे सरकार

सचिव के दिये निर्देश के बाद, नगर आयुक्त को बताया गया कि कंपनी झिरी में प्लांट लगाने को तैयार है. जहां इस प्लांट पर कंपनी को करीब 160 करोड़ की राशि खर्च करनी थी, वहीं अब प्लांट में कंपनी करीब 90 करोड़ राशि खर्च करेगी. वहीं प्लांट से अब 11.5 मेगावाट की जगह करीब 6 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा. हालांकि देश के अन्य शहरों में किये जा रहे कामों का हवाला देते हुए कंपनी का कहना है कि अन्य राज्य सरकारों ने वहां लगे प्लांट में एक बड़ी राशि डेप्थ लाइबिलिटी के रुप में वहन की है.

इसी के तर्ज पर झिरी प्लांट पर कंपनी का कहना है कि अगर भविष्य में कंपनी को कभी टर्मिनेट किया जाता है, तो उस दशा में प्लांट पर लगने वाली राशि की 90 प्रतिशत डेब्ट लाइबिलिटी सरकार को वहन करनी चाहिए. अन्य शहरों में सफाई कार्य और प्लांट पर (इसमें इंदौर, जिसे स्वच्छता में प्रथम स्थान मिला था) 90 प्रतिशत डेब्ट लाइबिलिटी के साथ वायबिलिटी गैप फंडिंग में करीब 40 प्रतिशत राशि कंपनी को दी गयी है.

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मांग जायज, PMC को रिपोर्ट सौंपे कंपनी

नगर आयुक्त ने न्यूज विंग से बातचीत में कहा कि कंपनी की यह मांग एक तरह से जायज है. भविष्य में अगर कंपनी को कभी टर्मिनेट कर भी दिया जाता है, तो कंपनी प्लांट को यहां से लेकर नहीं जाएगी. रांची मेयर को भी इसकी जानकारी दी गयी है. कंपनी को कहा गया है कि अगले 7 दिनों में प्लांट के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेट (पीएमसी) को वह अपनी रिपोर्ट सौंप दें. कंपनी की मांग संबंधी रिपोर्ट को पीएमसी के सुझाव के साथ विभाग को भेज दी जाएगी.

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