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सोलर पावर : गाइडलाईन की अनदेखी कर अफसरों ने तय किया था 2.50-3.50 की जगह 4.90-4.95 रू प्रति यूनिट रेट

मनचाही कंपनियों का किया चयन, जरेडा सहित वितरण निगम के कई अफसरों पर होगी कार्रवाई. 1200 मेगावाट की जगह 600 मेगावाट का किया था टेंडर फाइनल, हुआ रद्द

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Ranchi: सोलर पावर खरीद की रेट को लेकर भारी अनियमितता बरती गयी. सोलर पावर खरीद को लेकर लगभग एक साल तक रेट पर जिच बरकरार रहा. इसपर मंत्री सरयू राय ने भी आपत्ति जतायी थी. इसके बाद रेट तय करने के लिये कमेटी भी बनी. फिर 4.90 से 4.95 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की गयी. जबकि बाजार में 2.50 से 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से सोलर पावर उपलब्ध है. इसको लेकर काफी विवाद हुआ. अंत में टेंडर रद्द करना पड़ा.

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क्यों रद्द करना पड़ा टेंडर

भारत सरकार के गाइडलाइन के अनुसार टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं की गयी. इसमें जितनी दर होनी चाहिए थी, उसका भी पालन नहीं किया गया. राज्य में 1200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था. 2015 में टेंडर जारी हुआ. इसमें अडाणी सहित एक दर्जन से ज्यादा कंपनियों ने हिस्सा लिया था. जब टेंडर फाइनल हुआ तो भारत सरकार ने राज्य सरकार से पूछा कि इतनी दर पर बिजली क्यों खरीदी जा रही है. इसके बाद राज्य सरकार ने 2.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से 600 मेगावाट बिजली खरीदने का निर्णय लिया और 600 मेगावाट के लिये हुए टेंडर को रद्द कर दिया.

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मनचाही कंपनियों को टेंडर देने का भी मामला

600 मेगावाट सोलर प्लांट के टेंडर में आठ कंपनियों ने क्वालिफाई किया. इसमें से सिर्फ छह कंपनियों का ही रेट मांगा गया. शेष दो कंपनियों को छोड़ दिया. इसके बीच वजह यह थी कि शेष दो कंपनियों की दर अन्य कंपनियों के मुकाबले कम थी. इसके बाद दोनों कंपनियां कोर्ट चली गयीं.

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नियामक आयोग ने भी रेट को नहीं दी स्वीकृति

झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने भी सरकार द्वारा तय किये गये रेट को स्वीकृति नहीं दी. इसके पीछे नियामक आयोग ने तर्क दिया कि भारत सरकार के नियमों के अनुसार टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं की गयी है. बाजार के रेट से ज्यादा रेट दिया गया है. इस वजह से इस दर को स्वीकृति नहीं दी जा सकती है.

क्या था लक्ष्य

राज्य सरकार ने 2019 तक 2650 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा था. लेकिन अब तक सिर्फ देवघर में ही 14 मेगावाट सौर ऊर्जा का ही उत्पादन हो रहा है. जबकि राज्य में 0.2 फीसदी सौर ऊर्जा भी नहीं है.

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राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने भी खड़े किये सवाल

इधर  राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने भी सौर ऊर्जा खरीद मामले को लेकर सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने ट्विट कर कहा है कि सोलर पावर के मामले ओडिशा का उदाहरण अनुकरणीय है. सोलर पैनल में ड्यूटी बढ़ने और लो रेडिएशन जोन के बाद भी 2.79 और 3.10 रुपये प्रति यूनिट की दर है. सोचिये, अगर झारखंड पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से सौर ऊर्जा खरीदता तो क्या होता? सवाल यह भी है कि झारखंड में किन अफसरों ने , किस फायदे के लिये और किसके कहने पर महंगे दर पर सोलर पावर खरीदने के लिये एमओयू किया, जिसे बाद में रद्द करना पड़ा.

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