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सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ : आरोप साबित नहीं, सीबीआई की अदालत से सभी 22 आरोपी बरी

कोर्ट ने कहा कि पुलिसवालों पर आरोप साबित नहीं हुए. अदालत ने 22 पुलिसवालों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने गवाहों के बयान से पलटने पर कहा कि अगर कोई बयान न दे तो इसमें पुलिस की गलती नहीं है.

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Mumbai : देश के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में शुक्रवार को सीबीआई की अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि पुलिसवालों पर आरोप साबित नहीं हुए. अदालत ने 22 पुलिसवालों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने गवाहों के बयान से पलटने पर कहा कि अगर कोई बयान न दे तो इसमें पुलिस की गलती नहीं है. बता दें कि इस मामले में 210 गवाहों से पूछताछ की थी,  जिसमें से 92 मुकर गये थे.  सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में स्पेशल सीबीआई जज ने अपने आदेश में कहा कि सभी गवाह और सबूत साजिश और हत्या को साबित करने के लिए काफी नहीं थे.  कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े परिस्थितिजन्य सबूत भी पर्याप्त नहीं है.  बता दें, ये पूरा मामला साल 2005 का है.  इस पूरे मामले की सुनवाई विशेष सीबीआई कोर्ट कर रही थी.  इस मामले में लगभग 22 लोगों पर मुकदमा चल रहा था जिनमें से अधिकतर पुलिसवाले थे. इसके साथ की सीबीआई की अदालत ने कहा, तुलसीराम प्रजापति की हत्या का आरोप सही नहीं है. यह आरोप सही नहीं है कि साजिश के तहत तुलसीराम प्रजापति की हत्या की गयी थी. कहा कि  पेश किये गये सबूत और गवाह संतोषजनक नहीं है.

एनकाउंटर में अपराधी सोहराबुद्दीन शेख को मार गिराया था

इस मामले में सीबीआई का कहना था कि कथित गैंगेस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी प्रजापति को गुजरात पुलिस ने एक बस से उस वक्त अगवा कर लिया था, जब वे लोग 22 और 23 नवंबर 2005 की रात हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे.  बता दें कि गुजरात एटीएस और राजस्थान एसटीएफ ने 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के नजदीक एक एनकाउंटर में मध्य प्रदेश के अपराधी सोहराबुद्दीन शेख को मार गिराया था.  इसके एक साल बाद 28 दिसंबर 2006 को सोहराबुद्दीन के सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को भी एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था.  2010 से इस मामले की जांच सीबीआई कर रहा थी. 22 नवंबर को सीबीआई ने केस के 500 में से 210 गवाहों की जांच कर केस बंद किया था.  इसके बाद पांच दिसंबर को सीबीआई के विशेष लोकअभियोजक बीपी राजू ने स्वीकार किया था अभियोजन के केस में कई लूपहोल थे और सीबीआई ने चार्जशीट जल्दबाजी में दाखिल की थी.

 

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