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सोहराबुद्दीन हत्याकांड अमित शाह, डीजी वंजारा, पांडियन की साजिश : जांच अधिकारी

बचाव पक्ष के वकील ने बयान की कॉपी देखनी चाही तो पता चला कि वह अदालत के रिकॉर्ड में है ही नहीं. जज एसजे शर्मा के पूछने पर सीबीआई ने बताया कि बयान सीबीआई कार्यालय में रखे हैं.

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Mumbai :  भाजपा नेता अमित शाह, आईपीएस डीजी वंजारा, राजकुमार पांडियन, दिनेश एमएन सोहराबुद्दीन हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता थे. जांच में मिले सबूतों के आधार पर ही इन सभी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था. जांच अधिकारी आईपीएस संदीप तामगड़े ने अदालत में बुधवार को यह बात कही. जांच अधिकारी आईपीएस संदीप तामगड़े ने अदालत में कहा कि सोहराबुद्दीन और तुलसी फर्जी मुठभेड़ नेता और अपराधियों की साठगांठ का परिणाम था. बता दें कि जांच संदीप तामगड़े ने बुधवार को अदालत में अपनी जांच में पाये गये तथ्य दोहराये. सुबह 11 बजे से शाम साढ़े सात बजे तक चली सुनवाई में जांच अधिकारी ने यह सब बातें कही.  सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मुकदमे से नेता, व्यापारी और बड़े अफसरों पर आरोप भले ही आरोप खारिज हो चुके हैं लेकिन जांच से जुड़े अधिकारी अब भी अपनी जांच के तथ्यों पर कायम रह कर अदालत में  अपना बयान  दर्ज करवा रहे हैं.

अमित शाह, गुलाबचन्द कटारिया और विमल पाटनी के बयान लिये थे

मुख्य जांच अधिकारी संदीप तामगड़े ने बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर अदालत में कहा कि उन्होंने राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, मार्बल व्यापारी विमल पाटनी और हैदराबाद के आईपीएस सुब्रमण्यम और एसआई श्रीनिवास राव से पूछताछ कर उनके खिलाफ भी चार्जशीट पेश की थी. एक सवाल के जवाब में कहा कि तब के आरोपी अमित शाह, गुलाबचन्द कटारिया और विमल पटनी के बयान उन्होंने खुद लिये थे और उस पर हस्ताक्षर भी किये थे.  हालांकि बचाव पक्ष के वकील ने बयान की कॉपी देखनी चाही तो पता चला कि वह अदालत के रिकॉर्ड में है ही नहीं. जज एसजे शर्मा के पूछने पर सीबीआई ने बताया कि बयान सीबीआई कार्यालय में रखे हैं.

साथ ही हैदराबाद के आरोपी एसआई श्रीनिवास राव से संबंधित 19 में से 18 दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में नहीं होने का भी बात सामने आयी.  जान लें कि अदालत में सुनवाई के दौरान ऐसे कई मौके आये जब बचाव पक्ष ने आरोपों से मुक्त हो चुके आरोपियों से जुड़े सवाल कटघरे में मौजूद मुख्य जांचकर्ता से करने चाहे, लेकिन जज ने उन्हें इजाजत नहीं दी.

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