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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर : डीजी बंजारा समेत सभी आरोपी बॉम्बे  हाई कोर्ट से बरी हो गये

बॉम्बे हाईकोर्ट ने चर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सोमवार को डीजी वंजारा समेत सभी पुलिसकर्मियों को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए बरी कर दिया

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 Mumbai : बॉम्बे हाईकोर्ट ने चर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सोमवार को डीजी वंजारा समेत सभी पुलिसकर्मियों को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए बरी कर दिया. बता दें कि निचली अदालत ने  गुजरात के आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन, गुजरात एटीएस के पूर्व प्रमुख डीजी वंजारा, गुजरात पुलिस के अधिकारी एनके अमीन, राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन और राजस्थान पुलिस के कॉन्स्टेबल दलपत सिंह राठौड़ को बरी कर दिया था. निचली अदालत द्वारा सभी पुलिसकर्मियों को आरोप मुक्त किये जाने के बाद उसके विरोध में छह याचिकाएं दायर की गयी थी.  इनमें से तीन पुनरीक्षण याचिका सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन ने दायर की थी. याचिकाएं गुजरात के पूर्व डीआईजी डीजी वंजारा, आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन और आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन के खिलाफ दायर की गयी थी.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केस मुंबई की विशेष अदालत में स्थानांतरित हुआ था

सीबीआई ने राजस्थान पुलिस के कॉन्स्टेबल दलपत सिंह राठौड़ व गुजरात पुलिस के अधिकारी एनके अमीन के खिलाफ याचिका डाली थी. इस क्रम में एक याचिका सह-आरोपी गुजरात आईपीएस विपुल अग्रवाल ने दायर की थी. बता दें कि विपुल अग्रवाल की आरोपमुक्त करने संबंधी याचिका पिछले साल निचली अदालत ने खारिज कर दी थी.  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह केस मुंबई की विशेष अदालत में स्थानांतरित हुआ था. जहां 2014 से 2017 के बीच 38 लोगों में से 15 को बरी कर दिया गया. आरोपमुक्त हुए लोगों में 14 पुलिस अधिकारी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शामिल हैं. बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बदर ने चार जुलाई के बाद से नियमित आधार पर सुनवाई की.

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सीबीआई ने मुठभेड़ को फर्जी करार दिया था

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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को सीबीआई ने फर्जी करार दिया था. सीबीआई के आरोप पत्र के अनुसार गुजरात के  संदिग्ध गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात एटीएस और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने हैदराबाद के पास से अगवा किया था. इसके बाद उन्हें नवंबर 2005 में फर्जी मुठभेड़ में मार दिया  गया.

सीबीआइ के अनुसार राजस्थान पुलिस के कुछ अधिकारियों ने गुजरात और राजस्थान के अधिकारियों के इशारे पर प्रजापति को भी दिसंबर 2006 में अन्य फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया. जिन अधिकारियों ने प्रजापति को मारने के निर्देश दिये थे, वे पति-पत्नी की हत्या में शामिल थे. हालांकि पुलिस का कहना था कि सोहराबुद्दीन के तार आतंकियों से जुड़े हुए थे.

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