JHARKHAND TRIBESWest Bengal

मारांगबुरु की पूजा अर्चना के साथ शुरू हुआ आदिवासी समुदाय का सोहराय उत्सव

Bakura:  मारांगबुरु की पूजा-अर्चना के बाद आदिवासी समुदाय का सोहराय उत्सव शुरू हो गया. चार दिन चलने वाले उत्सव के तीसरे दिन धामसा मादल की गूंज के साथ आदिवासी नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा. गौरतलब है कि इलाके में सोहराय उत्सव को एक प्रकार से मिलन उत्सव के रूप माना जाता है.

सोहराय उत्सव की शुरुआत एक नवंबर को मारांगबुरु की पूजा अर्चना के मध्य शुरू हुई थी. प्रथा के अनुसार तीसरे दिन सभी परिजन एक साथ मिलकर पंक्ति भोज में शामिल होते हैं.

इसे भी पढ़ेंः भाजपा में गये शोभन चटर्जी को ममता ने बुलाया, फिर से थाम सकते हैं तृणमूल का दामन

Sanjeevani

थकान मिटाने का बहाना बनता है सोहराय

जिले के कोने-कोने से समुदाय के लोगों का समागम देखा गया. इस मौके पर दुर्गादास मुर्मू ने बताया कि हम सब कृषि जीवी लोग वर्ष भर खेती करते हैं. वर्ष भर खेती करने व कामकाज करने के बाद थकावट आती है. इसके बाद हमें उत्सव और आनंद की जरूरत होती है.

इस थकावट को दूर करने के उद्देश्य से ही सोहराय उत्सव का आयोजन किया जाता है. निर्दिष्ट दिन प्रतिपद से शुक्लपक्ष से ही उत्सव शुरू होता है. पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और झारखंड व बिहार में भी सोहराय मनाया जाता है. यहां हमारे देवता मारांगबुरु की पूजा की जाती है.

इसे भी पढ़ेंः #NRC के खिलाफ गोलबंद हुई वामपंथी पार्टियां, 15 नवंबर को यात्रा अगेंस्ट एनआरसी महारैली

Related Articles

Back to top button