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सामाजिक संगठनों ने जारी किया 24 सूत्री एजेंडा, चुनाव में भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का लिया संकल्प

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Ranchi : झारखंड बचाओ समन्वय समिति की मंगलवार को हुई बैठक में सामाजिक संगठनों ने 24 सूत्री प्रस्ताव पास किया. साथ ही, भाजपा की सरकार को राज्य से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया गया. पुरूलिया रोड में आयोजित बैठक में सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया था, जिसमें झाविमो से बाबूलाल मरांडी, कांग्रेस से सुबोधकांत सहाय, राजद से डॉ मनोज, झामुमो से अंतु तिर्की शामिल हुए. बैठक में सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा विचार-मंथन करते हुए कहा गया कि कई दशकों के आंदोलन और कुर्बानियों के बाद झारखंड अलग राज्य का सपना पूरा हुआ. लेकिन, झारखंड राज्य के विकास का जो स्वरूप झारखंड के आंदोलनकारियों ने तैयार किया था, उसे दरकिनार कर बीते 18 वर्षों में जन विकास की अवहेलना करते हुए कॉरपोरेट विकास की अवधारणा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी. जनता को ऐसा लगा, जैसे अब अच्छे दिन आनेवाले हैं, लेकिन जिनके लिए झारखंड बना, उन पर आज गोलियां चलायी जा रही हैं. पिछले 18 वर्षों में झारखंड के आदिवासी-मूलवासियों के अरमानों का गला घोंटा गया, उन्हें अपमानित किया गया, संवैधानिक अधिकारों की बात करनेवाले लोगों पर देशद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद किया गया. पत्थलगड़ी कार्यक्रम के तहत आदिवासियों द्वारा अपने संवैधानिक अधिकारों को आम जनता तक पहुंचाने की पारंपरिक व्यवस्था को भी गैर कानूनी घोषित करने की कोशिश करते हुए आदिवासियों को देशद्रोही कहा जा रहा है.

सरकार ने युवाओं के साथ छल किया है

वक्ताओं ने कहा कि राज्य में संवैधानिक अधिकारों की धज्जियां उड़ायी गयीं. युवाओं को रोजगार देने की बात करनेवाली सरकार ने युवाओं के साथ छल किया है. सरकारी नियुक्तियों में बाहरी लोगों की बहाली का मार्ग प्रशस्त किया गया. झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से होनेवाली नियुक्ति प्रक्रियाओं को बाधित कर बाहरी लोगों को प्रशासनिक अधिकारी बनाये जाने का रास्ता बनाया गया. राज्य के विकास के नाम पर आदिवासी-मूलवासियों को धोखे में रखकर कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है. उपनिवेशवादी शोषण, अत्याचार, पुलिस जुल्म, राजनीतिक एवं आर्थिक भ्रष्टाचार, अफसरशाही चरम पर है. झारखंड राज्य की परिकल्पना जल, जंगल, जमीन और कृषि की रक्षा और उस पर आधारित दो-तिहाई आबादी के आर्थिक विकास की कल्पना है. हमारी विचारधारा समानता, धार्मिक सद्भाव और समरसता पर आधारित है. राज्य के विकास के नाम पर सिर्फ सरकारी खजाने को खर्च कर देना और विकास के झूठे आंकड़े पेश कर राज्य के विकास का दावा नहीं किया जा सकता. आदिवासियों और गैर आदिवासियों के बीच, ईसाई और सरना के बीच, हिंदू और मुस्लिम के बीच जातीय और धार्मिक तकरार पैदा कर झारखंड को अशांत करने का प्रयास झारखंड के आदिवासी-मूलवासियों की ताकत को कमजोर करने की साजिश है.

मौजूदा सरकार में समस्याएं बद से बदतर होती जा रही हैं : सुबोधकांत सहाय

बैठक को संबोधित करते हुए सुबोधकांत सहाय ने कहा कि मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान झारखंडियों के मूल अधिकारों पर हमला हो चुका है. समस्याएं बद से बदतर होती जा रही हैं. वर्तमान में झारखंड के विपक्षी दलों को एकसूत्र में बांधा नहीं गया, तो हालात नहीं बदलनेवाले हैं. राज्य के भविष्य का रोडमैप सामाजिक संगठनों को तैयार करना चाहिए. इस बाबत राजनीतिक दलों से जनमुददों पर वचनबद्धता करानी होगी.

सामाजिक संगठनों ने जारी किया 24 सूत्री एजेंडा, चुनाव में भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का लिया संकल्प

झारखंड की सबसे बड़ी त्रासदी है विस्थापन : बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने अपने संबेाधन में कहा कि झारखंड की सबसे बड़ी त्रासदी विस्थापन है. आजादी के बाद से विस्थापन की सबसे ज्यादा कीमत झारखंड के आदिवासीयों ने चुकायी है. लाखों लोग विस्थापन के कारण दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जा चुके हैं. यही कारण है कि झारखंड के मूल स्वरूप में जनसंख्या का जो आनुपातिक स्वरूप होना चाहिए, उसमें आदिवासीयों की संख्या दिनोंदिन घट रही है. राज्य की सरकार को हर नागरिक की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं नियोजन की गारंटी देनी चाहिए. जो योजनाएं झारखंड के हित में नहीं हैं, उन्हें रद्द करना चाहिए. जनसंगठनों के तमाम मुद्दों पर झाविमो पूर्णत: सहमत है. झामुमो की ओर से अंतु तिर्की, राजद की ओर से पार्टी के प्रवक्ता मनोज कुमार ने भी अपनी पार्टी की ओर से सामाजिक संगठन के एजेंडे पर सहमति जतायी.

कार्यक्रम को दयामनी बरला, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, थिओडोर किड़ो, नियेल तिर्की, पूर्व विधायक बहादुर उरांव, मंगल सिंह बोबोंगा, राजू महतो, नरेश मुर्मू, मुस्ताक आलम, एस अली, रतन तिर्की, ललित मुर्मू, सुशील उरांव, डेमका सोय, कुमारचंद मार्डी, प्रेमशाही मुंडा, सैम टुडू, संध्या कुंटिया, रायमुनी मुंडा, लूथर टोपनो, पत्रकार आशोक कु वर्मा ने वक्तव्य दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. करमा उरांव ने की और संचालन प्रेमचंद मुर्मू ने किया. धन्यवाद ज्ञापन दुर्गावती ओडे़या ने किया. जनमुद्दों पर आधारित दस्तावेज का संकलन प्रभाकर तिर्की एवं ललित मुर्मू ने किया.

ये प्रस्ताव किये गये पास

  1. भाजपा एवं भ्रष्टाचारमुक्त झारखंड का निर्माण हो.
  2. सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट की मूल भावना से छेड़छाड़ बंद हो.
  3. झारखंड का मुख्यमंत्री झारखंडी मूल का व्यक्ति हो.
  4. आदिवासी-मूलवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा एवं आर्थिक विकास के लिए किये गये संवैधानिक प्रावधानों की सुरक्षा सुनिश्चित हो.
  5. आदिवासियों की भूमि की रक्षा के लिए किये गये कानूनों का अनुपालन सख्ती से किया जाये.
  6. आदिवासियों की लूटी गयी जमीन की वापसी के लिए सरकार द्वारा गठित एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक हो एवं जमीन वापसी की कार्रवाई को समय-सीमा के अंतर्गत पूरा किया जाये.
  7. सरकार द्वारा बनायी गयी स्थानीय नीति को रद्द किया जाये एवं खतियान तथा 1951 की जनगणना के आधार पर नयी डोमिसाइल नीति बनायी जाये. झारखंड की स्थानीय नीति को ठेकेदारी, माइनिंग लीज, नियुक्तियों में स्थानीय नीति लागू की जाये.
  8. झारखंड में विस्थापन आयोग का गठन किया जाये.
  9. भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाये. आदिवासी परामर्शदात्री समिति को सशक्त बनाया जाये, उसकी संरचना को दुरुस्त किया जाये तथा उसके संचालन के लिए एक सचिवालय की व्यवस्था की जाये, जिसकी अनुमति के बिना सरकार किसी प्रकार का मनमाना निर्णय न ले.
  10. आदिवासियों के पारंपरिक धर्म कोड को जनगणना कॉलम में शामिल किया जाये.
  11. राज्य सरकार द्वारा जारी भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन आदेश रद्द किया जाये.
  12. शैक्षणिक एवं गैर शिक्षण संस्थानों के मुख्य पदों पर स्थानीय आदिवासी एवं मूलवासियों को नियुक्त किया जाये.
  13. पेसा कानून का एवं समता जजमेंट का अक्षरश: अनुपालन सुनिश्चित किया जाये.
  14. राज्य सरकार राज्य में हुई संविदा के आधार पर सभी प्रकार की नियुक्तियों को रद्द करे तथा विधिसम्मत आरक्षण का अनुपालन सुनिश्चित करे.
  15. राज्य में महिला नीति की घोषणा की जाये.
  16. झारखंड के स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों की स्थापना की जाये.
  17. झारखंड में आदिवासी होड़ोपैथी को आयुष में शामिल किया जाये.
  18. झारखंड में हो बेस्ड माइक्रो इंडस्ट्री की स्थापना हो.
  19. झारखंड की आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषाओं के अध्ययन-अध्यापन तथा शोध की व्यवस्था केजी से पीजी तक की जाये.
  20. झारखंड में फिल्म नीति के तहत आदिवासी एवं स्थानीय फिल्मों तथा उससे जुड़े फिल्म मेकर को प्राथमिकता दी जाये तथा 1 फरवरी से होनेवाले फिल्म फेस्टिवल में आदिवासी विषयों एवं स्थानीय विषयों पर बनी फिल्मों को प्राथमिकता दी जाये.
  21. राज्य में कृषि विकास की नीति बनायी जाये.
  22. राज्य से होनेवाले सभी प्रकार के विस्थापन एवं पलायन पर रोक लगायी जाये तथा उनके रोजगार की समुचित व्यवस्था झारखंड में की जाये.
  23. युवाओं के विकास के लिए उनके रोजगार की व्यवस्था झारखंड में की जाये.
  24. झारखंड सरकार आदिवासी-मूलवासी विरोधी सभी प्रकार के कानून को निरस्त करे.

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