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…तो यहां साइकिल चलाकर निपटा जा रहा कोरोना से, साइकिल दुकानवाले पूरी नहीं कर पा रहे डिमांड

  • गिरिडीह में कोरोना काल में बढ़ी साइकिल की डिमांड
  • अकेले जून-जुलाई में हुआ 17 लाख का कारोबार

Manoj Kumar Pintu

Giridih : कोरोना से निपटने के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने और फिजिकल फिटनेस को दुरुस्त करने के लिए गिरिडीह के लोगों ने अलग राह पकड़ी है. भले ही अभी कोरोना से लड़ने के लिए कोई भी वैक्सीन या फॉर्मूला दुनिया के पास नहीं है, लेकिन जिले के लोग कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अपना अलग फॉर्मूले अपना रहे हैं. वह फॉर्मूला है साइकिलिंग.

जी हां, गिरिडीह के लोग साइकिलिंग कर अपनी इम्यूनिटी और फिटनेस बढ़ा रहे हैं. मॉर्निंग वॉक का वक्त हो या ईवनिंग वॉक का, साइकिल के जरिये लोग अपनी फिजिकल फिटनेस पर फोकस कर रहे हैं, ताकि वे कोरोना के अटैक से बच सकें. कोरोना काल में यहां साइकिलिंग का क्रेज इतना बढ़ गया है कि यहां साइकिल कारोबार में बढ़ोतरी दर्ज की गयी है.

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अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होते ही बढ़ी साइकिल की डिमांड

हालांकि, गिरिडीह के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र से मिले आंकड़ों के अनुसार मार्च में लॉकडाउन शुरू होते ही साइकिल की ब्रिकी कम हो गयी थी, लेकिन अनलॉक की प्रकिया शुरू होते ही एक बार फिर साइकिल की ब्रिकी में जबरदस्त उछाल आयी है. शहर में साइकिल कारोबार से जुड़े कारोबारी राकेश खंडेलवाल भी मानते हैं कि साइकिल चलाने के उत्साह ने एक बार फिर युवाओं में जोर पकड़ा है. राकेश खंडेलवाल कहते हैं कि पिछले दो सालों में इतनी साइकिल नहीं बिकी, जितनी अनलॉक की प्रकिया शुरू होने के साथ ही बिकने लगी.

सिर्फ दो महीने में 17 लाख रुपये का हुआ साइकिल कारोबार

आंकड़ों के अनुसार, जब मई में अनलॉक-1 की प्रकिया शुरू हुई, तो साइकिल की डिमांड बढ़ी. एक अनुमान के मुताबिक, अकेले जून-जुलाई में पूरे शहरी क्षेत्र में 18 हजार से अधिक साइकिल की ब्रिकी हुई है. राकेश खंडेलवाल के अनुसार जून-जुलाई में दो माह के भीतर 12 लाख रुपये से अधिक का ऑफलाइन साइकिल कारोबार हुआ. इसी प्रकार ऑनलाइन कारोबार भी एक अनुमान के अनुसार 14 लाख रुपये से अधिक का हुआ है. अनुमान के अनुसार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी करीब पांच लाख रुपये से अधिक का साइकिल का कारोबार हुआ.

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कुछ साइकिल दुकानों में पहले से करनी पड़ रही बुकिंग

राकेश खंडेलवाल कहते हैं कि कोरोना से सुरक्षित रहने के लिए हर कोई अपनी इम्यूनिटी को विकसित करने के प्रयास में है. यही नहीं, फिजिकल फिटनेस को दुरुस्त रखने के लिए युवाओं से लेकर 45 साल तक की उम्र वाले लोग साइकिलिंग को बेहतर साधन मान रहे हैं. खंडेलवाल ने बताया कि लोगों को गिरिडीह में अपनी पंसद की साइकिल नहीं मिल रही है, तो ऐसे लोग धनबाद से साइकिल की खरीद रहे हैं, क्योंकि कई बड़ी कंपनियों द्वारा गिरिडीह में साइकिल की आपूर्ति कुछ कम कर दी गयी है. डिमांड के अनुसार गिरिडीह के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में साइकिल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. शहर की कुछ दुकानों में बुंकिग होने की बात कही जा रही है और खरीदार अपनी पंसद की साइकिल के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

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