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अब तक झारखंड में नहीं लागू हो सका सवर्ण आरक्षण, सीएम रघुवर दास की घोषणा के बीते 120 दिन

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: 10 जनवरी 2019 को मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों के लिए आरक्षण को हरी झंडी दिखायी थी. 15 जनवरी को गुजरात के बाद झारखंड ऐसा दूसरा राज्य बना जिसने आरक्षण प्रभावी रूप से लागू करने की घोषणा की. 15 जनवरी को सीएम रघुवर दास ने सवर्ण आरक्षण को लागू करने की औपचारिक रूप से घोषणा की. बाकायदा कैबिनेट से प्रस्ताव को पास करा लिया गया. मीडिया में जोर-शोर से खबर छपी कि अब झारखंड की नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का फायदा मिलेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सीएम के घोषणा किये हुए आज 120 दिन बीत गये हैं, लेकिन न ही शिक्षण संस्थानों में और न ही झारखंड की नौकरियों में आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण का फायदा मिल रहा है.

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कहां फंसा पेंच

आनन-फानन में सीएम की घोषणा के बाद कानूनी रूप से इसे अमलीजामा आज तक नहीं पहनाया जा सका. कैबिनेट से प्रस्ताव पास करने के बाद आरक्षण लागू करने के लिए विधि विभाग से राय ली गयी. शुरुआत में इसे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के आधार पर लागू करने की योजना थी. लेकिन, जब कार्मिक विभाग ने विधि विभाग से राय ली गयी, तो विधि विभाग ने कहा कि सिर्फ कैबिनेट से पारित करा कर एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से यह लागू तो हो सकता है. दूसरी तरफ सरकार की मशीनरी इस बात में फंस गयी कि आखिर आरक्षण में स्थानीयता का आधार क्या होगा. इसके लिए केंद्र से पत्राचार किया जाने लगा.

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चुनाव आयोग का नहीं था पेंच, अब फाइल सीएम के टेबल पर

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कुछ लोगों का यह मानना था कि सवर्ण आरक्षण को राज्य में लागू करने में चुनाव आयोग का पेंच हो सकता है. लेकिन ऐसी बात नहीं थी. कुछ दिनों पहले कार्मिक ने झारखंड की पुरानी स्थानीयता को मानक मान कर फाइल सीएस कार्यालय को बढ़ायी. सीएस की तरफ से फाइल ओके होकर सीएम के टेबल पर आ कर रुक गयी है. अब देखना है कि सीएम अपनी घोषणा करने के 120 बाद और कितने दिनों तक मामले को रोकते हैं. कहा जा रहा है कि चुनावी व्यस्तता की वजह से फाइल सीएम देख नहीं पा रहे हैं. लेकिन वहीं दूसरी तरफ शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने का समय भी इसी वजह से खत्म भी हो रहा है.

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रघुवर सरकार बनने के बाद फिसड्डी साबित हुए जेपीएससी के 50 नौकरीवाले विज्ञापन

रघुवर दास की सरकार आने के बाद से राज्य में जेपीएससी द्वारा नौकरियों के लिए 50 बार विज्ञापन जारी किया गया. 50 विज्ञापन, 34 अलग-अलग विभाग या पदों के लिए जारी किये गये. बाकी को दोबारा या तीसरी बार निकाला गया है. लेकिन राज्य के युवाओं का दुर्भाग्य ये है कि सरकार उन्हें नौकरी नहीं दे सकी. ऐसा इसलिए, क्योंकि 50 विज्ञापनों में पांच को छोड़ दिया जाये तो अधिकतर नियुक्ति प्रक्रिया अधर में है और उसके पूरे होने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही. रघुवर दास की सरकार जेपीएससी सिविल सेवा की परीक्षा तक पूरी करा पाने में असमर्थ दिख रहा है. गौर करनेवाली बात यह भी है कि जेपीएससी के गठन से लेकर अब तक परीक्षा लेने और अन्य कामों में 40 करोड़ खर्च हो चुके हैं. फिर भी परीक्षा का रिजल्ट गड़बड़झाला ही रहा.

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