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#EastSinghbhum के #minerals की हो रही #Smuggling, हर साल 1000 करोड़ के राजस्व का नुकसान

Jamshedpur : जमशेदपुर और आसपास के कई इलाकों में खनिज की तस्करी करने वाले कारोबारी बेखौफ घूम रहे हैं. जमशेदपुर के पोटका, पटमदा, बोड़ाम और घाटशिला के इलाकों में खनन माफिया सक्रिय हैं.

इन इलाकों में मैग्नीज, लौह अयस्क, कैनाइट, बॉक्साइट, सेफ्टी बोल्डर और चिप्स की भरमार है. प्रशासन की नाक के नीचे खनन माफिया इन कीमती खनिजों का अवैध खनन करने में सफल हो रहे हैं.

हर दिन खनिजों का दोहन ट्रकों और ट्रैक्टर से किया जा रहा है. इन ट्रकों में लदे खनिजों की कीमत प्रति ट्रक 50 हजार से ढाई लाख तक होती है जो दूसरे राज्यों में चोरी-छिपे भेज दी जाती है.

2015 के खनन विभाग के आंकड़ों के हिसाब से हर साल झाऱखंड को करीब 1000 करोड का चूना खनन माफिया लगा देते हैं जिसमें कोयला के अलावा अन्य खनिजों की तस्करी भी शामिल है.

सबसे ज्यादा कोयले की तस्करी के बाद जमशेदपुर के खनिजों का नंबर है जो सरकार को करीब 100 करोड़ का चूना हर साल लगा रही है.

खास बात ये है कि प्रशासन के कई एक्शन प्लान भी अब तक तस्करी पर लगाम कसने में असफल साबित हुए हैं.

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दूसरे राज्य के माफिया सक्रिय

जिले में हो रही बेखौफ तस्करी का कारण ओड़िशा और बंगाल के खनन माफिया हैं. इन राज्यों के तस्करों की नजर लौह अयस्क, मैंग्नीज, बॉक्साइट और कैनाइट पर होती है.

एक ट्रक में 16-17 टन खनिज लादी जाती है जिसकी कीमत बाजार में ढाई लाख तक होती है. रात के अंधेरे में खनन माफिया खनिजों से लदे ट्रक को बॉडर पार करा लेते हैं.

चिप्स और बोल्डर पर स्थानीय खनन माफिया का कब्जा है जो आमतौर पर ट्रैक्टर का सहारा लेते हैं ताकि नो इंट्री के चक्कर से बच सकें. इनका काम ज्यादातर सुबह के समय होता है.

कैसे होता है अवैध खनन

राज्य में खनिज ढुलाई की नई व्यवस्था लागू है. अब उन्हीं वाहनों से खनिज ढुलाई होती है जिनको खान एवं भूतत्व विभाग में रजिस्टर्ड कराया जाता है.

जो वाहन रजिस्टर्ड नहीं होते उनको खनिज ढुलाई के लिए ऑनलाइन चालान नहीं मिलता.

इसका मतलब खनिज से लदी गाड़ी में खनन विभाग को या पुलिस को ऑनलाइन चालान नहीं मिला तो उसे अवैध माना जायेगा. लेकिन खेल यहीं होता है.

ऑनलाइन चालान यदि एक गाड़ी को मिलता है तो उसके साथ-साथ दो-तीन और गाड़ियों को पास कर दिया जाता है.

जिले में माफियाओ के बीच एक का पांच कहावत भी चलती है जिसका मतलब है की एक चालान पर पांच गाड़ी को निकाली जाये.

यह एक मुंहबोला समझौता है जिसमें खनन विभाग, वन विभाग और पुलिस के अधिकरियों की भी मिलीभगत होती है.

सूत्रों की मानें तो अधिकारियों और खनन माफिया के बीच एक सिंडीकेट बन चुका है जो इस पूरे खेल को अंजाम देने में सफल हो रहा है.

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प्रशासन का प्रयास असफल

उपायुक्त के निर्देश पर जिला खनन पदाधिकारी नदीम सैफी ने कई बार विशेष अभियान चलाया है जहां गाडियों की धर-पकड़ भी हुई है. लेकिन खनन माफिया इसे अब एक रुटीन चेक मानते हैं.

जब रुटीन चेक का समय आता है तो खनन माफिया सतर्क हो जाते हैं और गाड़ियों की धर-पकड़ महज खाना-पूर्ति साबित होती है.

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