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जो बायोमेट्रिक मशीनें कई संस्थानों में चलती हैं स्मूदली, वो रांची के निगम ऑफिस में हैं फेल!

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  • Ewit Infotech Pvt Ltd. ने लगायी हैं कुल 60 मशीनें
  • यही मशीनें इंडियन नेवी, आइआइटी दिल्ली, मेकॉन, एचईसी में बढ़िया तरीके से चल रही हैं

Ranchi: रांची नगर निगम इन दिनों फर्जी सफाईकर्मियों के नाम पर लाखों की हेराफेरी के कारनामों को लेकर चर्चा में है. हेराफेरी के लिए निगम के आला अधिकारी बॉयोमेट्रिक मशीनों पर हाजिरी नहीं लगने की बात कह रहे हैं. जांच के लिए अपर नगर आयुक्त ने जोन वाइज समिति भी बनायी है. सूत्रों के मुताबिक शहर के विभिन्न वार्डों में बॉयोमेट्रिक मशीनें Ewit Infotech Pvt Ltd कंपनी ने लगायी हैं. कुल 60 मशीनें लगायी गयी हैं. निगम के अधिकारियों का कहना है कि ये मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर रही हैं. इसलिए सफाईकर्मी मैन्युअल हाजिरी बना रहे थे. लेकिन वास्तविकता यह है कि इसी कंपनी की मशीनें आज राजधानी के एचईसी परिसर, मेकॉन सहित भारत सरकार के कई विभागों, इंडियन नेवी, आइआइटी दिल्ली में बेहतर तरीके से सेवा दे रही हैं.

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क्या है “फर्जी सफाईकर्मी और बायोमेट्रिक मशीन का खेल”

गत 5 मार्च को खबर छपी थी कि सभी वार्डों में कार्यरत सफाईकर्मियों में कुछ ऐसे भी हैं, जो निगम के कर्मी नहीं हैं. फिर भी उनके नाम से वेतन भुगतान हो रहा है. मामले की जानकारी होने की बात स्वास्थ्य शाखा से जुड़े अधिकारियों ने भी स्वीकारी थी. उन्होंने कहा था कि पिछले एक वर्षों से वार्डों में लगी बायोमेट्रिक मशीनें खराब पड़ी हैं. इसके बाद से ही सभी सफाईकर्मी मैन्युअली हाजिरी बना रहे थे. ऐसे में संभावना हो सकती है कि कुछ कर्मी इसी का फायदा उठा कर वेतन ले रहे हों. हालांकि मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी Ewit Infotech Pvt Ltd इससे इत्तेफाक नहीं रखती है. कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि केवल निगम में बायोमेट्रिक मशीनों के खराब होने की बात सामने आयी है. जबकि उपरोक्त संस्थानों की तरफ से मशीनों के खराब होने की शिकायत कभी नहीं आयी है.

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वार्डों में लगी थीं 60 मशीनें, पर भुगतान आधे का ही

कंपनी का कहना है कि वर्ष 2018 की शुरुआत में निगम के सभी वार्डों में बायोमेट्रिक मशीनें लगाने के लिए एग्रीमेंट (करीब 21 लाख रुपये में) हुआ था. इसके तहत कुल 60 मशीनें वार्डों में लगायी जानी थीं. कंपनी ने सभी वार्डो में ये मशीनें लगा भी दीं. इसके बावजूद अभी तक कंपनी को केवल 9 लाख का ही भुगतान हुआ है. जब भी कंपनी निगम से बकाया राशि देने की मांग करती है, तो जवाब यही मिलता है कि मशीनें खराब हैं. निगम द्वारा कंपनी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाएगा.

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लेट से शुरू हुआ दर्ज रिकॉर्ड के तहत भुगतान

निगम से जुड़े एक व्यक्ति ने भी स्वीकारा कि कंपनी ने तो पहले ही तय एग्रीमेंट के तहत मशीनें निगम को हैंडओवर कर दी थीं. मशीनों ने काम भी शुरू कर दिया. लेकिन इन मशीनों में सफाईकर्मियों द्वारा दर्ज हाजिरी का वेतन भुगतान नवंबर-दिसम्बर माह के बाद से शुरू किया गया. मशीन लगने के बाद भी स्वास्थ्य शाखा द्वारा सफाईकर्मियों को मैनुअल हाजिरी से भुगतान किया जा रहा था. निगम का कहना है कि कई मशीनें खराब हो चुकी हैं. तो इसपर कंपनी का कहना है मशीन जलने की न कोई वारंटी होती है न ही गारंटी. इसके बावजूद वार्डों में खराब हो चुकी मशीनों को कंपनी रिप्लेस कर रही है. अबतक करीब 6 मशीनों को रिप्लेस किया जा चुका है. इसके बावजूद कंपनी को पेमेंट नहीं किया जा रहा है. मशीनें लगने के बाद भी किस आधार पर इन फर्जी कर्मियों को मैनुअल हाजिरी से भुगतान हुआ. यह एक जांच का विषय है.

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