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स्मार्ट सिटी मिशन प्रोजेक्ट को ब्यूरोक्रेसी में न फंसायें, दें विशेष पावर : कुणाल कुमार

वित्त विभाग के विशेष सचिव प्रशांत कुमार, रांची स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन के सीईओ आशीष सिंहमार सहित ग्वालियर, भोपाल, उज्जैन, राउरकेला, बिहार शरीफ, मुजफ्फरपुर और भागलपुर के सीईओ और विशेषज्ञ मौजूद थे.

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Ranchi : पूर्वी और मध्य भारत के 17 स्मार्ट शहरों के लिए आयोजित वर्कशॉप “IMPLEMENTATHON” में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी कुणाल कुमार ने न्यूज विंग संवाददाता को बताया कि 100 शहरों में बन रहे स्मार्ट सिटी (रांची स्मार्ट सिटी भी शामिल है) को लेकर सरकार के समझ क्या समस्याएं आ रही है. उन्होंने कहा कि हर मिशन को पूरा करने में कई तरह की समस्याएं आती है. आज बिना चुनौतियों के कोई शहर नहीं है. रांची स्मार्ट सिटी भी इन्हीं चुनौतियों को फेस कर रही है. ऐसी चुनौतियों में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, आईटी सेक्टर के कई प्रोजेक्टों शामिल है. मिशन बनने के पहले इस तरह की चुनौतियां फेस नहीं हुई थी. चुनौतियों के लिए नयी टीम व नयी विचार बनायी गयी है. जरूरी है कि ऐसे प्रोजेक्टों को रूटिंग ब्यूरोक्रेटिक प्रोसेस में नहीं फंसाते हुए अलग तरीके से पावर देकर (मेन पावर, फाइनेंस) नये इनोवेशन कर जल्दी से पूरा करें. दूसरे दिन के कार्यक्रम में स्मार्ट सिटी निदेशक राहुल कपूर, झारखंड सरकार के योजना वित्त विभाग के विशेष सचिव प्रशांत कुमार, रांची स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन के सीईओ आशीष सिंहमार सहित ग्वालियर, भोपाल, उज्जैन, राउरकेला, बिहार शरीफ, मुजफ्फरपुर और भागलपुर के सीईओ और विशेषज्ञ मौजूद थे.

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40,000 करोड़ के काम जमीन स्तर पर है चालू

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटी विजन की प्रशंसा करते हुए कुणाल कुमार ने कहा कि अभी तक मिशन से जुड़ी करीब 80,000 करोड़ की टेंडर निकाला गया है. करीब 9000 करोड़ के प्रोजेक्ट पूरे हो चूके है. साथ ही 40,000 करोड़ के काम जमीन स्तर पर अभी चालू है. इन प्रोजेक्टों को पूरा करने वाले स्मार्ट सिटी काफी आगे निकल चूके है. अगले दो-तीन वर्षों में देश में ऐसे स्मार्ट शहर निकलकर सामने आएगें, जिससे बाकी बचे शहरों को सीखने का काफी लाभ मिलेगा.

जर्नी है स्मार्ट सिटी मिशन, कई भी डेस्टिनेशन नहीं

उन्होंने कहा कि हर शहर के लोगों की अपनी एक सोच होती है. स्मार्ट सिटी की सोच वहीं है जो लोगों की है. रांची शहर की अपनी एक पहचान है. इसी पहचान के साथ यहां स्मार्ट सिटी मिशन को पूरा किया जाना है. जरूरी है कि मिशन से जुड़े सभी लोग जैसे कि टूरिज्म, इंडस्ट्री, कल्चलर के स्टॉक हॉल्डर आदि मिल कर काम करें. उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी एक जर्नी है. इसमें कई भी कोई डेस्टिनेशन नहीं है. यह किसी मंजिल का नाम नहीं है. जैसे जैसे मंजिल मिलते जाएंगे, उसके आगे का मंजिल हम पार करते जाएंगें.

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आवंटित राशि, प्रगति रिपोर्ट पर हुई चर्चा

दूसरे दिन के सत्र में दिसंबर तक की योजनाओं को पूरा किया जाने या संभावित प्रगति की रिपोर्ट पेश की गई. इस दौरान 17 शहरों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में आवंटित राशि, उसकी प्रगति रिपोर्ट और वर्क कंपलीशन पर चर्चा हुई. इसमें वॉटर सप्लाई स्कीम, डाटा सिक्योरिटी, ट्रैफिक कंट्रोल और साफ-सफाई दुरुस्त करने के लिए कमांड कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सेंटर, जैसे विषयों पर चर्चा हुई. विभिन्न शहरों के सीईओ और प्रतिनिधियों ने इन योजनाओं में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की. वहीं सफल शहरों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने इसके तौर तरीके बताएं. इस दौरान ज्वाइंट सेक्रेटरी कुणाल कुमार ने कहा कि विभिन्न शहरों को जो भी टेक्निकल असिस्टेंट की जरूरत हैं, उन्हें यह उपलब्ध कराया जाएगा.

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