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साठ रिटायर्ड नौकरशाहों का आरोप, नोटबंदी-राफेल डील पर ऑडिट रिपोर्ट टाल रहा है कैग

पत्र में कहा गया है कि नोटबंदी और राफेल फाइटर जेट डील पर ऑडिट रिपोर्ट लाने में अस्वाभाविक और अकारण देरी पर हमें चिंता पैदा हो रही है

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NewDelhi : नोटबंदी और राफेल डील पर ऑडिट रिपोर्ट जारी नहीं किये जाने पर देश के साठ रिटायर्ड नौकरशाहों ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को पत्र लिखा है. बता दें कि अपने पत्र में नोटबंदी और राफेल डील पर ऑडिट रिपोर्ट जानबूझ कर जारी नहीं करने का आरोप कैग पर लगाया है, ताकि अगले साल चुनाव से पूर्व राजग सरकार की किरकिरी न हो. पत्र में कहा गया है कि नोटबंदी और राफेल फाइटर जेट डील पर ऑडिट रिपोर्ट लाने में अस्वाभाविक और अकारण देरी पर हमें चिंता पैदा हो रही है. मांग की कि रिपोर्ट संसद के शीत सत्र में पटल पर रखी जानी चाहिए.  कहा गया कि समय पर नोटबंदी और राफेल सौदे को लेकर ऑडिट रिपोर्ट जारी करने में देर करने को पक्षपातपूर्ण कदम कहा जायेगा.  इससे संस्थान (कैग)की साख पर संकट पैदा हो सकता है. हालांकि कैग की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी है. नोटबंदी पर मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि तत्कालीन नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक शशिकांत शर्मा ने कहा था कि ऑडिट में नोटों की छपाई पर खर्च, रिजर्व बैंक के लाभांश भुगतान तथा बैंकिंग लेन-देन के आंकड़ों को शामिल किया जायेगा.

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नोटबंदी पर वादे के अनुसार ऑडिट रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई

कहा गया कि इस तरह की ऑडिट रिपोर्ट पर पिछला बयान 20 माह पहले आया था. आरोप लगाया कि  नोटबंदी पर वादे के अनुसार ऑडिट रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. जान लें कि पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले रिटायर्ड अधिकारियों में पंजाब के पूर्व डीजीपी जूलियो रिबेरो, पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी से सोशल एक्टिविस्ट बनीं अरुणा रॉय, पुणे के पूर्व पुलिस आयुक्त मीरन बोरवंकर, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार, इटली में पूर्व दूत के पी फेबियन समेत अन्य पूर्व अधिकारी शामिल हैं.  नौकरशाहों ने दावा किया है कि ऐसी खबरें थीं कि राफेल सौदे पर ऑडिट सितंबर 2018 तक हो जायेगा लेकिन संबंधित फाइलों का कैग ने अब तक परीक्षण नहीं किया है. पूर्व नौकरशाहों ने कहा है कि टू जी, कोयला, आदर्श, राष्ट्रमंडल खेल घोटाले पर कैग की ऑडिट रिपोर्ट से तत्कालीन संप्रग सरकार के कार्यों के बारे में जनधारणा प्रभावित हुई थी और विभिन्न हलकों से इसे सराहना मिली थी. लेकिन ऐसी धारणा बनाने का आधार बढ़ रहा है कि कैग मई 2019 के चुनाव के पहले नोटबंदी और राफेल सौदे पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में जानबूझकर देरी कर रहा है ताकि मौजूदा सरकार की किरकिरी नहीं हो.

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