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राज्य प्रशासनिक सेवा के छह अफसर बर्खास्तगी के बॉडर्र लाइन पर, पांच हो चुके हैं डिसमिस

विजय मतियस टोप्पो, रूपेश कुमार सहित चार सीओ डिसमिस होने के कगार पर, एक को अनिवार्य सेवानिवृति दी गई

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Ranchi: राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर आरोपों से जुदा नहीं रहे हैं. जनवरी से लेकर अब तक राज्य प्रशासनिक सेवा के पांच अफसर बर्खास्त हो चुके हैं. छह बर्खास्तगी के कगार पर हैं. सभी पर जमीन के अवैध हस्तांतरण और योजनाओं में भारी अनियमितता का आरोप है. विजय मतियस टोप्पो, रूपेश कुमार सहित चार सीओ बर्खास्तगी के कगार पर हैं. कार्मिक सूत्रों के अनुसार, इन अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूरी कर ली गई है.

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ये हो चुके हैं बर्खास्त

जेवियर हेरेंज: तत्कालीन विशेष विनियन पदाधिकारी जेवियर हेरेंज पर सीएनटी की धारा 71(ए) का दुरुपयोग करने के आरोप लगा. हेरेंज ने बिना जांच किये आदिवासी जमीन के लिये क्षति पूर्ति निर्धारित कर भूमि का अवैध हस्तांतरण कर दिया.

अर्जुन राम: इंदिरा आवास योजना के तहत कुल नौ चेक के द्वारा 41,69,880 रुपये का भुगतान कर दिया. एक लाख रूपये रिश्वत लेने का आरोप प्रमाणित हुआ. 8,96,700 रुपये की फर्जी निकासी कर ली.
आगुस्टिन प्रफुल्ल बेक: हंटरगंज के तत्कालीन बीडीओ आगुस्टिन प्रफुल्ल बेक ने इंदिरा आवास योजना के कार्यान्वयन में अनियमितता बरती. गलत ढंग से लाभुकों का चयन किया. एक ही भूमि की दोहरी जमाबंदी की. सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृति का आदेश दिया.

निर्मल टोप्पो: तत्कालीन चास सीओ निर्मल टोप्पो ने वन भूमि का गलत ढंग से उत्तराधिकारी नामांतरण कर दिया. साथ ही बिना सूचना व अनुमति के अनाधिकृत रुप से अनुपस्थित रहे.

डॉ अनवर हुसैन: जरीडीह के तत्कालीन बीडीओ डॉ अनवर हुसैन पर मिट्टी मोरम पथ योजना और रोकड़ पंजी निर्धारण में गंभीर वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगा. सरकार ने बर्खास्त किया.

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ये अफसर हैं रडार पर

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विजय मतियस टोप्पो: जमीन के अवैध हस्तांतरण का आरोप, सरकार इनके जवाब से संतुष्ट नहीं. विभागीय कार्रवाई पूरी हो चुकी है.
रुपेश कुमार: फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने का आरोप हो चुका है प्रमाणित.
हेमा प्रसाद (सीओ): जमीन के अवैध हस्तांतरण का आरोप- चल रही है विभागीय कार्रवाई.
अंचना दास (सीओ): कर्त्तव्य में लापरवाही- विभागीय कार्रवाई जारी.
अभय कुमार झा (सीओ): कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित.
मनोज कुमार तिवारी (सीओ): रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, निलंबित.

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किस आधार पर हो रही कार्रवाई

असैनिक सेवाएं वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियमावली 1935 के तहत इन अफसरों पर विभागीय कार्रवाई चलेगी. इससे 15 अफसरों के खिलाफ 49 के तहत कार्रवाई करने की समीक्षा कार्मिक विभाग कर रहा है. नियम 49 में सेवा समाप्ति का भी प्रावधान है.

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घूस लेते ये अफसर रंगे हाथ हो चुके हैं गिरफ्तार

दिनेश प्रसाद: तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी, रांची; एसीबी न्यायालय ने दो साल सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनायी. फिलहाल वे निलंबित है.
अरूण उरांव: निगरानी धावा दल द्वारा गिरफ्तार, सरकार ने निलंबित किया.
अशोक कुमार सिन्हा (बीडीओ): घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, सरकार ने निलंबित किया.
सतीश कुमार (बीडीओ): घूस लेते रंगे हाथ पकड़ाये. सरकार ने बर्खास्त किया.
जामनी कांत (कार्यपालक दंडाधिकारी): रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, निलंबित.

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