NEWS

‘सर ! मेरे पति का कुछ पता चला क्या…?

चमोली हादसा: कंट्रोल रूम के हर फोन कॉल पर परिजनों के मिलने की आस, कोई बेटा तो कोई पति कि कर रहा तलाश

 Chhaya

Ranchi: सर ! मेरे पति का कुछ पता चला क्या? 15 दिन से अधिक हो गये हैं अब तक घर नहीं लौटे हैं. बड़ी चिंता हो रही है… किसी तरह मुझे मेरे पति से बात करा दीजिये, वो केवल एक ही बात कहे जा रही है… कुछ देर बात कर फोन काट देती है. लेकिन वो लगातार फोन पर टकटकी लगाये रहती है. ये और कोई नहीं बल्कि, नौ महीने की गर्भवती कुलदीप की पत्नी है. कुलदीप, जो चमोली हादसे के बाद से लापता है. हादसे को पंद्रह दिन हो गये हैं. वहीं, पत्नी एक बच्चे को जन्म देने वाली है. महिला की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. बारबार कुलदीप की पत्नी श्रम कंट्रोल रूम को फोन करती है. अपने पति का हाल चाल जानना चाहती है. कहीं से कोई सूचना उसे उसके पति की मिले. कंट्रोल रूम वाले भी दिलासा दे रहे. कुलदीप लोहरदगा से है. जो चमोली एनटीपीसी में काम कर रहे थे. श्रम कंट्रोल रूम से जानकारी मिली की राज्य से लापता श्रमिकों में से कुलदीप के परिवार में ही गर्भवती महिला है. जो हर दिन अपने पति के लिये फोन कर पूछती है. फोन पर एक ही बात कि किसी तरह मेरे पति से बात करा दीजिये. इनसे बात करते हुए श्रम कंट्रोल रूम वालों की भी आंखें भर आयी. कुलदीप के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है. लेकिन परिवार और पत्नी को इंतजार है कि कुलदीप घर आयेंगे.

अब भी राज्य से 10 श्रमिक लापता हैं:

यह स्थिति सिर्फ कुलदीप के घर की है. जबकि अब भी राज्य से 10 श्रमिक लापता हैं. कंट्रोल रूम की मानें तो परिजनों के दु:ख का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. परिजनों का फोन आते सिर्फ एक ही बात, कोई जानकारी है तो बता दीजिये. सब ठीक तो है. चमोली में मलबा खुदाई कहां तक पहुंचा.

सात फरवरी को चमोली में ग्लेसियर पिघलने की घटना हुई थी:

सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली में ग्लेसियर पिघलने से त्रासदी आयी. इसमें राज्य के 14 लोग लापता हुए. चार के शव मिले हैं. एक लोहरदगा के विक्की भगत, ज्योतिष बाखला, सुनील बाखला और बोकारो से अमृत महतो हैं. विक्की भगत का शव शनिवार देर रात लोहरदगा पहुंचा. अन्य तीन का शव रविवार को मिला. जिन्हें राज्य पहुंचने में कुछ समय लगेगा. कंट्रोल रूम की मानें तो एनटीपीसी चमोली में रामगढ़ के चार, और लोहरदगा से अब भी छह लोग लापता हैं.

शरीर का एक अंग ही मिल जायें…’:

श्रम कंट्रोल रूम की मानें तो परिजनों की स्थिति बहुत दयनीय है. बार-बार फोन करते हैं. रात में भी परिजन फोन करके अपडेट पूछते हैं. पंद्रह दिन हादसा को हो गये. अब भी कुछ लोग कहते है कि लोग किसी तरह घर आ जायें. वहीं कुछ लोग इस उम्मीद में फोन करते हैं कि शरीर का एक अंग भी मिल जाये. जिससे डीएनए टेस्ट होकर लोगों की पहचान की जाये. पिछले दिनों कुछ परिजन भी चमोली गये थे. मलबा अधिक होने के कारण कंट्रोल रूम की ओर से उन्हें वापस बुला लिया गया.

काउंसलिंग एक माध्यम बोझ कम करने का:

कंट्रोल रूम की लीडर शिखा ने बताया कि फोन के जरिये ही परिजनों की काउंसलिंग की जा रही है. परिजन बहुत तनाव में लगते हैं. माता-पिता, पत्नी ही नहीं, भाई भतीजों के भी फोन आ रहे हैं. काउंसलिंग से थोड़ा राहत है. कुछ परिजन तो घंटों बात करतें है. कई बार ऐसा लगता है जैसे बात करने से उनके मन का बोझ कम होता है. सवाल ऐसे ऐसे होते है जो नियंत्रण के बाहर रहता है. ऐसा लग रहा है कि परिजनों को अपडेट के लिये कंट्रोल रूम में विश्वास है.

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: