JamshedpurJharkhandNEWSRanchi

चाईबासा मेडिकल कॉलेज का निर्माण कर रही सिंप्लेक्स ने 37 करोड़ लेने के बाद बंद किया काम, डिबार करने की तैयारी

30 महीने में पूरा करना था काम, 24 माह बाद महज 8 फीसदी काम हुआ, 334 करोड़ की योजना में केंद्र दे रहा है 60 फीसदी राशि

Aman Verma

Chaibasa : चाईबासा में 334 करोड़ की लागत से बन रहे मेडिकल कॉलेज का काम पांच साल बीतने के बाद भी धरातल से ऊपर उठ नहीं सका है. हालत यह है कि मात्र आठ फीसदी काम हुआ है, जबकि ठेका कंपनी को 37 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.  वर्ष 2016 में रांची आये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  500 बिस्तरों वाले इस मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल का ऑनलाइन शिलान्यास किया था. इस मेडिकल कॉलेज का काम कोलकाता की कंपनी सिंप्लेक्स इन्फ्राट्रक्चर लिमिटेड को मिला है. जुलाई 2019 में झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम ने कंपनी को कार्यादेश जारी किया. सरकारी इकरारनामा के मुताबिक अब तक 80 फीसदी काम हो जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब विभाग कंपनी को डिबार करने की तैयारी में है.

advt

जमीन के चलते दो बार बदल चुकी है जगह  

पहले इस मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल का निर्माण हाटगम्हरिया में किया जाना  था. लेकिन जमीन को लेकर हुए विवाद के कारण इसे झींकपानी में बनाने की योजना बनी, लेकिन वहां भी बात नहीं बनी. अंततः चाईबासा सदर प्रखंड के उलीझारी में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल बनना तय हुआ. जिला प्रशासन ने इसके लिए 25 एकड़ जमीन आवंटित की है. बड़ी कार्य योजनाओं में मोबिलाइजेशन के तहत एडवांस देने का प्रावधान है. ऐसे में विभाग ने कंपनी को योजना राशि की 5 फीसदी राशि अग्रिम दी और फिर  बाद में और 2.5 फीसदी राशि दी. कुल मिलकर ‌ मोबिलाइजेशन के नाम पर सिंप्लेक्स को  करीब 26 करोड़ रुपये दिये गये.

इसे भी पढ़ें – EXCLUSIVE : टाटानगर से संपर्क क्रांति के खुलते ही महिला यात्री ने दिया बच्ची को जन्म, ढाई किमी उलटा चलकर स्टेशन लौटी ट्रेन

कंपनी ने 2 साल में महज 8 फीसदी काम किया

काम शुरू करने के बाद कुछ ही दिन बाद  कंपनी ने काम बंद कर दिया. इस काम को 30 महीने में पूरा करना था, जबकि कंपनी ने 2 साल में महज 8 फीसदी काम किया है. सूत्र बताते हैं कि कंपनी ने जो थोड़ा–बहुत काम किया है, उसके बदले में भी उसे 11 करोड़ का भुगतान किया गया है. 4 करोड़ रुपये का बिल विभाग में भुगततान की प्रक्रिया में है. यानी कंपनी को कुल मिलाकर 37 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि कंपनी ने काम किया ही नहीं. बताया जा रहा है कि कंपनी की माली हालत ठीक नहीं है इसलिए वह काम नहीं कर सकी.

चाईबासा मेडिकल कॉलेज का निर्माण केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से कराया जा रहा है. इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 60 फीसदी और राज्य सरकार की 40 फीसदी है. 2 सालों में नहीं के बराबर काम होने के कारण वर्तमान राज्य सरकार ने इसमें संज्ञान लिया है और निर्माण कार्य करा रही कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. कंपनी को डिबार (टर्मिनेट) करने की प्रक्रिया चल रही है. सितंबर महीने में मैंने विभाग को पत्र लिखा था, जिसके बाद विभाग की ओर से कंपनी को नोटिस किया गया है. दिसंबर तक कार्य संतोषजनक नहीं रहा, तो कंपनी को टर्मिनेट कर दिया जायेगा.
-बिंदेश्वर उरांव, कार्यपालक अभियंता, झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: