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सिमडेगा : गेल इंडिया पर आरोप, भूमि अधिग्रहण नियमों का उल्लंघन कर बिछा रही पाइपलाइन, मुआवजा दिया मात्र 700 रुपये प्रति डिसमिल

पाइपलाइन बिछाने के लिए सिमडेगा जिले में उखाड़े गये फलदार वृक्ष, चुनाव के पहले विधायक विक्सल कोनगाड़ी नेउठायी थी आवाज, चुनाव के बाद हाल जानने भी नहीं पहुंचे

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 Ranchi :  गेल इंडिया की ओर से राज्य के कुछ इलाकों में गैस पाइपलाइन बिछायी जा रही है. फिलहाल सिमडेगा जिले के पतिअम्बा गांव में काम चालू है. यह गांव जिले के जलडेगा प्रखंड अंतर्गत आता है. आरोप है कि यहां किसानों के फलदार पेड़ों को पाइपलाइन के लिए उखाड़ा गया और मुआवजे के नाम पर मात्र 700 रुपये प्रति डिसमिल दिये गये, जबकि जिला अनुसूचित क्षेत्र में शामिल है. इसे लेकर स्थानीय विधायक से लेकर पीएमओ तक  शिकायत की गयी, लेकिन किसानों की अब तक नहीं सुनी गयी है.

पाइपलाइन बिछाने से पहले इन्हें नोटिस तक नहीं दिया गया

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जानकारी के अनुसार गांव के लगभग 37 किसानों की जमीन गेल इंडिया ने पाइपलाइन बिछाने के लिए ली, लेकिन पाइपलाइन बिछाने से पहले इन्हें  नोटिस तक नहीं दिया गया और इनकी जमीन पर काम शुरू कर दिया गया. किसानों द्वारा   लिखे गये पत्रों की मानें तो मई 2019 से गेल इंडिया इलाके में काम कर रही है. इससे पहले क्षेत्र में मनरेगा योजना के तहत बागबानी की गयी थी. गेल इंडिया द्वारा उखाड़े गये वृक्ष फलदार थे. जिससे आने वाले समय में किसानों को सालाना डेढ़ लाख तक की आमदनी होती. इस संबंध में  सबसे पहले  पीएमओ में शिकायत की गयी थी, लेकिन मामला अब तक लंबित है.

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कोलेबिरा विधायक ने कही थी चार गुणा अतिरिक्त मुआवजा दिलाने की बात

3.10.2019 को विधायक ने बैठक की थी

मामला तूल पकड़ने के बाद किसानों ने कोलेबिरा विधायक की मदद ली. पिछले साल चुनाव के पहले विधायक विक्सल कोनगाड़ी ने किसानों और गेल अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में गेल इंडिया की ओर से किसानों को दी जा रही मुआवजा राशि को विधायक ने गलत बताया था.

किसानों की मानें तो विधायक ने अधिकारियों से कहा था कि क्षेत्र अुनसूचित इलाके में आता है. ऐसे मे इन्हें चार गुणा अधिक मुआवजा मिलना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. विधायक के आश्वासन के बाद भी न ही गेल अधिकारियों ने इसमें रुचि दिखायी और न ही विधायक दोबारा कभी किसानों का हाल जानने पहुंचे. हालांकि 2019 के चुनाव में विधायक ने जीत हासिल कर ली.

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सात सौ रुपये मुआवजा और जमीन में खुदाई 20 फीट तक

लोगों की मानें तो गेल इंडिया की ओर से प्रति डिसमिल 1755  रुपये का 40 प्रतिशत किसानों को दिया जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार जब  वे गेल इंडिया से मुआवजे की गाइडलाइन की मांग करते है, तो उन्हें जेल में डालने की धमकी दी जाती है. 40 प्रतिशत के हिसाब से किसानों को 702 रुपये तक ही मुआवजा मिल पाया है.

जबकि पाइपलाइन बिछाने के लिए गेल इंडिया पतिअम्बा गांव में 15 से 20 फीट तक खुदाई कर रही है. वहीं गांव वालों को खुदाई की गयी जमीन में दोबारा फसल नहीं लगाने कहा जाता है, जबकि इलाका कृषि बहुल है. लोगों की मानें तो क्षेत्र में जमीन की कीमत प्रति डिसमिल लाखों में है.

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मनरेगा योजना के तहत लगाये गये हैं पेड़

साल 2018-19 में ग्रामीणों ने मनरेगा की बागबानी योजना के तहत इलाके में आम, पपीता, सागवान आदि के पौधे लगाये. आलोक साहू ने बताया कि उनकी  55.43 डिसमिल जमीन पर गेल ने कब्जा किया है. जिसमें पपीता के 30 पौधे, शरीफा के दो पेड़, कटहल का एक पेड़ समेत सागवान और गम्हार के पेड़ लगाये गये हैं.

बता दें योजना गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए है. जिससे मनरेगा योजना के तहत बागबानी के माध्यम से कम से कम 15 से 20 हजार रूपये आय की व्यवस्था की जा सके.

नियमत: गेल इंडिया को मनरेगा योजना के तहत लाभुकों को मुआवजा देना है. जिसमें पेड़ की कीमत, आने वाले कुछ सालों की आय और जमीन का मुआवजा शामिल हो. आरोप है कि गेल इंडिया ने ऐसा नहीं किया.

गेल इंडिया का जवाब

गेल इंडिया के जीएम एसके पाल ने कहा कि मुआवजा सरकारी निर्देश का पालन करते हुए दिया गया है. इसके लिए सरकारी अधिकारियों से एस्टिमेट बनाया गया था. कुछ जगहों पर पूरा मुआवजा मिला है तो  कई जगहों पर पेड़ पौधे का मुआवजा नहीं मिला है. प्रक्रिया अभी चल रही है. कहीं भी बगैर नोटिस काम शुरू नहीं किया गया है.

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