Fashion/Film/T.VOpinion

सिल्वर स्क्रिन की राजकुमारी मनीषा कोइराला

जन्मदिन पर विशेष

नवीन शर्मा

16 अगस्त 1970 को नेपाल के काठमांडू में जन्मी मनीषा कोइराला की जिंदगी का सफर काफी उतार चढाव का रहा है. उनके पिता प्रकाश कोइराला नेपाल के कैबिनेट मंत्री थे. वे नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बिश्वेश्वर प्रसाद कोइराला की नातिन हैं. मनीषा हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं जो सिर्फ शोपीस बन कर नहीं रहीं. उन्होंने धीरे धीरे अभिनय की बारिकियां सीखीं और कई फिल्मों में अपने दमदार रोल से उनको यादगार बन दिया.

advt

इसे भी पढ़ें : अफगानिस्तान में एक बार फिर से तालिबान का कब्जा, मुल्क छोड़कर भागे राष्ट्रपति गनी

स्केच : प्रभात ठाकुर, कला निर्देशक, बॉलीवुड

सुपरहिट सौदागर से की शुरुआत

मैंने मनीषा की पहली फिल्म सौदागर 1991 देखी थी. उसमें वे सुंदर तो लगी थीं पर दिलीप कुमार व राजकुमार के रहते उनके पास अभिनय दिखाने का कोई खास स्कोप नहीं था. मनीषा ने इसके बाद दर्जनों चालू किस्म की फिल्मों में काम किया.

 

1942  अ लव स्टोरी

निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की 1942 ए लव स्टोरी से मुझे मनीषा कोइराला अच्छी लगने लगीं. इसमें वे कमाल की खूबसूरत लगीं हैं. उनपर फिल्माए गए गीत एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा और कुछ ना कहो में उनकी मासूमियत व सौंदर्य जादू कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं.

 

खामोशी व अग्नि साक्षी से किया संजीदा अभिनय का आगाज

1996 में पार्थो घोष निर्देशित फिल्म और निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म ख़ामोशी ने मनीषा को अपने अभिनय की काबिलियत दिखाने का मौका दिया. दोनों ही फिल्मों में मनीषा के दो अलग रूप देखने को मिले.  पहली फिल्म अग्नि साक्षी में मनीषा अपने एक बीमार पति का ध्यान रखते हुए एक पतिव्रता पत्नी के रूप में दर्शायी गयीं.  वंही दूसरी फिल्म खामोशी में वह अपने गूंगे माँ-बाप का ध्यान रखने वाली एक प्यारी सी बेटी ऐनी की भूमिका निभाती हुई नजर आयीं. दोनों ही फिल्मों में उनके सह कलाकार नाना पाटेकर थे.

साल 1997 में मनीषा बॉबी देओल और काजोल के अपोजिट फिल्म गुप्त- द हिडन ट्रुथ में नजर आयीं.  जो  ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

 

दिल से

मणि रत्नम की फिल्म दिल से में वे शाहरुख के साथ नजर आयीं. एक आतंकी के रोल में उन्होंने जान डाल दी . इसके बाद मणिरत्नम ने उन्हें बाम्बे फिल्म में अिभनय का कमाल दिखाने को मौका दिया. गांव की एक साधारण सी मुस्लिम युवती की भूमिका को उन्होंने शिद्दत से निभाया . फिर मुंबई के दंगों में अपने बच्चों के घिरने से एक मां की क्या हालत होती है उसे बेहतरीन ढंग से दिखाया.

साल 1999 में वह फिल्म मन और अजय देवगन स्टारर फिल्म कच्चे धागे में नजर आयीं.  फिल्म मन उनकी लाजवाब एक्टिंग देख आलोचकों ने उन्हें मीणा कुमार तक की उपाधि दे डाली थी.

साल 2000 में वह मल्टीस्टारर फिल्म लज्जा में उनका अभिनय काबीले तारीफ था.  उसके बाद वह वर्ष 2002 में अजय देवगन स्टारर फिल्म कंपनी में नज़र आयीं. इस फिल्म के लिए उन्हें तीसरा फिल्म फेयर क्रिटिक्स अवार्ड से भी नवाजा गया.

साल 2003 में इस्केप फ्रॉम तालिबान में नज़र आयीं. इस फिल्म के लिए उन्हें बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. उसके बाद वह फिल्म मार्केट में एक जवान बाजारू औरत की भूमिका में दिखाई दी.

कोइराला अभिनेत्री होने के साथ-साथ एक निर्माता भी हैं. उन्होंने फिल्म मेकिंग का डिप्लोमा न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से किया है.  कोइराला ने अपने बैनर के तहत फिल्म पैसा वसूल का निर्माण किया.

साल 2007 में वह फिल्म अनवर में एक सपोर्टिंग एक्ट्रेस के रूप में नज़र आयीं. उन्होंने हिंदी सिनेमा में फिल्म मुंबई एक्सप्रेस से एक जबरदस्त वापसी की.  इस फिल्म में वह इरफ़ान खान के साथ नज़र आई.

 

संजय दत्त की प्रेमिका से मां तक का सफर

संजू फिल्म में मनीषा ने संजय दत्त की मां नर्गिस की भूमिका अच्छे तरीका से  निभाई है. वे इससे पहले संजय दत्त की कई फिल्मों में नायिका का रोल कर चुकी थीं. ठीक राखी की तरह जो कभी कभी में अमिताभ बच्चन की प्रेमिका बनती हैं और शक्ति में मां .

 

पढ़ाई

मनीषा की शुरूआती पढाई वाराणसी के वंसत कन्या महाविद्यालय से हुई हैं. उसके बाद वह सेकंडरी की पढ़ाई करने के लिए आर्मी स्कूल धौलकुआं नई दिल्ली चली गयीं. मनीषा बचपन से डॉक्टर बन दूसरों की सेवा करने की चाहत थी, लेकिन मॉडलिंग ने उनके लिए फ़िल्मी दुनिया के द्वार खोल दिए.

 

शादी

मनीषा कोइराला की शादी नेपाली बिजनेसमैंन सम्राट दहाल से 19 जून 2010 को हुई थी.  लेकिन यह शादी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी, और 2012 में इस जोड़ी ने तलाक ले लिया.

 

कैंसर को दी मात

साल 2012 ,में मनीषा लाईलाज बीमारी ओवरी कैंसर से पीड़ित हो गयी. उन्होंने इसका इलाज मुंबई और यूएसए में कराया.  उसके बाद वे अपने हौसला के दम पर खतरनाक बीमारी से जीत गयी.

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: