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परिवहन विभाग के मौन ने सरकार को लगाया दो करोड़ का चूना

Ranchi : सरकार का किसी भी तरह का नया कानून राजस्व को देखते हुए होता है. लेकिन, केंद्र सरकार के नियम परिवर्तन की वजह से झारखंड सरकार को राजस्व का चूना लगा है. बात हो रही है राज्य के परिवहन विभाग की. मोदी सरकार के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 2016 में बस कोड लाइसेंस का नया कानून बनाया. इस कानून के पीछे सुरक्षा का हवाला दिया गया. बसों की होती लगातार दुर्घटना के मद्देनजर सरकार ने कानून बनाया कि अब हर कोई बस की बॉडी नहीं बनायेगा. बस की बॉडी बनाने का काम वही कर सकता है, जो केंद्र सरकार द्वारा तय गयी अर्हता को पूरा करता हो. बस बॉडी बिल्डिंग पांच तरह की होती है. पहले से यह व्यवस्था है कि कोई भी बॉडी बिल्डर किसी भी तरह की बॉडी बना सकता था, लेकिन अब नये नियम के मुताबिक एक तरह की बॉडी बिल्डिंग बनाने के लिए 7.5 लाख रुपये सरकार के खाते में बतौर फीस जमा करनी होगी. मतलब जो बस बॉडी का काम करना चाहता है, वह पहले सरकार को 7.5*5 =37.5 लाख रुपये दे. साथ ही और भी कई सारे ऐसे नियम हैं, जो एक आम बॉडी बिल्डर कभी पूरा ही न कर सके.

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सरकार को लगा 1.5 करोड़ का चूना, 3000 लोग बेरोजगार

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झारखंड सरकार का परिवहन विभाग अगर इस नये नियम को लागू करने में दूसरे राज्यों की तरह कदम उठाता, तो सरकार को 1.5-2 करोड़ रुपये का नुकसान नहीं होता. बस व्यापार से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि बस कोड लाइसेंस भारत में एक जनवरी 2017 से लागू हुआ. बिहार, ओड़िशा समेत कई राज्यों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जब तक उनके यहां अर्हता पूरा करनेवाला स्ट्रक्चर तैयार नहीं हो जाता, तब तक पहलेवाले नियम से काम होने दिया जाये, लेकिन झारखंड ने उसी दिन से वह कड़ा कानून राज्य भर में लागू कर दिया. ऐसे में एक भी बॉडी बिल्डर बस की बॉडी बनाने का काम नहीं कर सकता था. लेकिन, इस बीच झारखंड में करीब 400 बस की बॉडी बन रही थी. बॉडी बनकर तो तैयार हो गयी, लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया. लिहाजा बस मालिकों को बिहार और ओड़िशा से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ा, जिससे सरकार को सालाना करीब 1.5 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. वहीं, रजिस्ट्रेशन के दूसरे शुल्क से करीब 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ.

ऐसे बच सकता था राजस्व

दूसरे राज्यों की तरह अगर झारखंड भी केंद्र सरकार से कानून लागू करने के लिए थोड़ी मोहलत ले लेता, तो आज बॉडी बिल्डिंग करनेवाले करीब 3000 लोकल लोग अचानक से बेरोजगार नहीं हो जाते. साथ ही, दूसरे राज्यों के खाते में रजिस्ट्रेशन के नाम पर जो शुल्क जमा हुआ, वह झारखंड राज्य सरकार के खाते में जाता. लेकिन, परिवहन विभाग के मौन रहने की वजह से झारखंड को करीब दो करोड़ का नुसकान हुआ.

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