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ब्रदर्स एकेडमी के शुवेंदु शेखर ने स्नातक भौतिकी से किया, बच्चों को पढ़ा रहे हैं गणित

बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन से चार लाख रुपये लेता है संस्थान

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Kumar Gaurav
Ranchi : अमूमन हर गार्जियन यही चाहता है कि प्लस टू के बाद उनका बच्चा इंजीनियर या डॉक्टर बने. लेकिन हर कोई अपने बच्चों को दिल्ली, कोटा या बेंगलुरु भेजकर आईआईटी या मेडिकल की तैयारी नहीं करा सकता है. लिहाजा रांची जैसे छोटे शहर में इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए कुकुरमुत्ते की तरह आईआईटी और मेडिकल की तैयारी करानेवाले संस्थान खुल गये हैं. यह खबर उन सभी मिडिल क्लास गार्जियन के लिए खास है, जो अपने बच्चों को रांची जैसे छोटे शहर में रखकर आईआईटी और मेडिकल की तैयारी कराते हैं. बात हो रही है रांची के नामी संस्थान ब्रदर्स एकेडमी की. कई सुनहरे सपने लेकर गार्जियन अपने बच्चों का ब्रदर्स एकेडमी जैसे संस्थान में एडमिशन तो करवा देते हैं, लेकिन उनके साथ धोखा किया जाता है. ब्रदर्स एकेडमी के नामी शिक्षक शुवेंदु शेखर बच्चों को उस विषय की तैयारी करा रहे हैं, जिससे उनका दूर-दूर तक कोई नाता-रिश्ता नहीं है. दरअसल, शुवेंदु शेखर बच्चों को आईआईटी और मेडिकल के लिए मैथ्स की तैयारी कराते हैं. जबकि उन्होंने खुद रांची कॉलेज से फिजिक्स ऑनर्स से ग्रेजुएशन किया है. इधर, बच्चों और अभिभावकों का कहना है कि नामांकन के दौरान उन्हें टीचर की योग्यता नहीं बतायी जाती है. संस्थान में एडमिशन के बाद पता चलता है कि कौन टीचर किस सब्जेक्ट की तैयारी करवायेंगे.

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ब्रदर्स एकेडमी के शुवेंदु शेखर ने स्नातक भौतिकी से किया, बच्चों को पढ़ा रहे हैं गणित
ब्रदर्स एकेडमी के मैथ्स टीचर शुवेंदु शेखर.

क्या है नियम बच्चों को पढ़ाने का

10वीं पास करने के बाद प्लस टू के बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकार द्वारा पीजीटी टीचर बहाल किये जाते हैं, जो किसी संबंधित विषय में मास्टर डिग्री पास होते हैं. यही नियम निजी स्कूलों में लागू सीबीएसई और जैक बोर्ड द्वारा निर्धारित किया गया है. लेकिन, कोचिंग स्थानों में यह नियम नहीं लागू किया जाता है. कई कोचिंग संस्थानों में तो 12वीं पास भी बच्चों को मेडिकल और आर्इआर्इटी की तैयारी करवा रहे हैं. कुछ बच्चों की आर्इआर्इटी और मेडिकल में सफलता का श्रेय लेकर कोचिंग संस्थान बच्चों और अभिभावकों को ठगने का कार्य कर रहे हैं.

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तैयारी के नाम पर अभिभावकों से वसूले जाते हैं तीन से चार लाख रुपये

बच्चों को आर्इआर्इटी और मेडिकल की तैयारी कराने के लिए अभिभावकों से फीस के नाम पर तीन से चार लाख रुपये लिये जाते हैं. किसी भी निजी स्कूल के छात्रों से ज्यादा बच्चे इन संस्थानों में सुनहरे भविष्य का सपना लेकर एडमिशन लेते हैं, लेकिन 20 फीसदी बच्चों को ही इसमें सफलता मिल पाती है.

एडमिशन टेस्ट एवं अंक-पत्र के आधार पर बच्चों का लिया जाता है नामांकन

ब्रदर्स एकेडमी जैसे संस्थानों में तेज-तर्रार बच्चों, जो बेहतर अंक के साथ 10वीं और 12वीं पास करते हैं, उनका एडमिशन लिया जाता है. प्रतिभावान बच्चों को छांटकर कोचिंग संस्थान एडमिशन लेते हैं. इनमें कुछ बच्चे अपनी प्रतिभा के बल पर सफलता प्राप्त करते हैं, जिसका श्रेय ये कोचिंग स्थान लेकर बच्चों और अभिभावकों को आकर्षित करते हैं.

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आर्इआर्इटी और नीट के हल प्रश्नपत्र नहीं करते हैं सार्वजनिक

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ब्रदर्स एकेडमी की ओर से बच्चों को आर्इआर्इटी और मेडिकल की तैयारी करायी जाती है, लेकिन जैसे ही बच्चे आर्इआर्इटी मेंस, जेईई एडवांस्ड और नीट की परीक्षा देकर आते हैं, उन्हें हल प्रश्नपत्र नहीं दिया जाता है, जैसा कि फिट्जी जैसे संस्थान करते हैं. केवल बच्चों के प्रश्नपत्र के हल ऑप्शन वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाता है. परीक्षा के तीन माह बीतने के बाद भी कम्लीेवट सॉल्यूशन अपलोड नहीं करना कहीं न कहीं शिक्षकों की योग्यता पर सवाल खड़े करता है.

स्कूलों से डेटा संग्रह कर बच्चों का लिया जाता है एडमिशन

ब्रदर्स एकेडमी जैसे कोचिंग संस्थानों द्वारा रांची के नामी स्कूलों में स्किल टेस्ट के नाम पर बच्चों के नाम, मोबाइल नंबर, अभिभावकों के नाम एवं उनके मोबाइल नंबर संग्रह किये जाते हैं. डेटा मिलते ही इन बच्चों को फोन के माध्यम से रिझाने का कार्य आरंभ कर दिया जाता है. इन्हीं के माध्यम से ज्यादातर बच्चों के एडमिशन लिये जाते हैं.

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प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन लेने की दी जाती है सलाह

जो बच्चे आर्इआर्इटी और नीट में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं, उन्हें प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन के लिए बोला जाता है. इसके बदले में लाखों की कमीशन प्राइवेट कॉलेजों से वसूलते हैं.

फिजिक्स वाले मैथ्स क्यों नहीं पढ़ा सकते : पारस आग्रवाल

ब्रदर्स एकेडमी के शुवेंदु शेखर ने स्नातक भौतिकी से किया, बच्चों को पढ़ा रहे हैं गणित
ब्रदर्स एकेडमी के संचालक पारस अग्रवाल.

न्यूज विंग ने जब संस्थान के संचालक पारस अग्रवाल से उनके शिक्षक शुवेंदु शेखर की योग्यता के बारे में जानना चाहा, तो उन्होंने बताया कि शिक्षक किसी विषय का हो, उससे आपको क्या लेना-देना है. बच्चे तो पढ़ रहे हैं न. फिजिक्स वाले मैथ्स क्यों नहीं पढ़ा सकते?

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