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श्रुति और विरेन रांचीवासियों को चखा रहे अलग स्वाद, फूड ट्रक से बनायी पहचान

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Chhaya
Ranchi: भले ही फास्ट फूड की ढेरों वेरायटी मार्केट में मिलती हो, लेकिन अगर पारंपरिक भारतीय खाने की बात की जाये तो इसका मुकाबला फास्ट फूड नहीं कर सकते हैं. इसके जायके की बात ही कुछ और है. वहीं अगर डोसा जैसा साउथ इंडियन फूड आपके सामने परोस दिया जाये, तो आपको कुछ और सोचने की भी जरूरत नहीं रह जाती. पूरे भारत में डोसा की अलग ही पहचान है. अगर यही डोसा आपको पाव भाजी, बेबी कॉर्न पिज्जा समेत अन्य जायकों में मिले तो आप कितना भी खा लें, आपका मन नहीं भरेगा. रांचीवासियों को कुछ ऐसे ही जायकों से रू-ब-रू करा रहे हैं श्रुति मोदी और विरेन मोदी. भाई-बहन की यह जोड़ी पिछले दो साल से कांके रोड में फूड ट्रक चला रही है, जिसका नाम बाबा मंचीस रखा है. ये लोगों को कुछ नया और अलग देना चाहते थे, जिसके कारण उन्होंने फूड ट्रक की शुरुआत की.

बिजनेस के साथ कर रहे पढ़ाई

वर्ष 2016 में श्रुति और विरेन ने इस फूड ट्रक की शुरुआत की. तब विरेन बीकॉम के विद्यार्थी थे. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने फूड ट्रक को अलग पहचान दिलायी. वहीं 24 वर्षीय श्रुति वर्तमान में फैशन डिजाइनिंग की विद्यार्थी हैं. जो पढ़ाई के साथ अपने बिजनेस को आगे बढ़ा रही हैं.

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ज्यादा लोगों तक पहुंचने की है इच्छा

22 वर्षीय विरेन ने बताया कि पहले उनकी योजना स्टार्ट-अप के तहत रेस्तरां खोलने की थी, लेकिन रेस्तरां की पहुंच आम जन तक नहीं होती है, वहीं राजधानी में कोई ऐसा फूड ट्रक नहीं है, जहां लोगों को कुछ नया और अलग मिले. ऐसे में फूड ट्रक को ही नये तरीके से भारतीय व्यंजनों के साथ लोगों के बीच लाने की बात सोची और इसमें सफलता भी मिली.

बजट और हेल्दी फूड पर ध्यान

स्ट्रीट फूड का नाम आते ही पास्ता, चाउमिन, चिल्ली आदि का ध्यान आता है, लेकिन यहां भारतीय व्यंजन के साथ ही हेल्दी फूड भी लोगों को मिलता है. विरेन ने बताया कि डोसा में बेबी कॉर्न, मशरूम, हरी सब्जियां समेत अन्य हेल्दी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. जो लोगों के बजट में भी होती हैं.

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डोसा की 101 वेरायटी


इनके फूड ट्रक में आपको डोसा की 101 वेरायटी मिल जायेगी. ट्रक की शुरुआत 99 प्रकार के डोसा के साथ की गयी थी, जिसके बाद अब उन्होंने आइटम की संख्या बढ़ायी है. इसके साथ ही इनके पास सैंडविच, मोमो, स्टफड बॉल आदि की कई नयी भी वेरायटी मिल जायेंगी.

बेंगलुरु के प्रशिक्षित कुक

फूड ट्रक में लोगों को डोसा का असली जायका मिले, इसके लिए उन्होंने अपने फूड ट्रक में काम करनेवाले युवाओं को बेंगलुरु में प्रशिक्षण दिलाया. बेंगलुरु में प्रशिक्षण के बाद उन्होंने डोसा में कई परिवर्तन कर कई नये तरह के डोसा बनाये. जिसमें पाव भाजी डोसा काफी अलग है.

होम डिलीवरी की भी है सुविधा

उनके ट्रक में खाने की सुविधा के साथ ही होम डिलीवरी की भी सुविधा उपलब्ध है. जो पिछले दो साल से लगातार जारी है. विरेन ने बताया कि शुरू में फूड ट्रक में होम डिलीवरी की सुविधा के बारे में लोगों को जानकारी नहीं थी. ऐसे में अधिक आॅर्डर तो आते नहीं थे, जिसके बाद आस-पास के संस्थानों, आवासों आदि में प्रचार किया गया. अब होम डिलीवरी के भी काफी आॅर्डर आते हैं. जो लगभर रांची के हर इलाके के होते हैं.

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