GarhwaJharkhand

कृष्ण जन्माष्टमी विशेष : 136 वर्ष पुराने श्री बंशीधर नगर मंदिर में 1280 किलो सोने से बनी  है भगवान कृष्ण की मूर्ति, रोचक है इतिहास

Garhwa : झारखंड के पश्चिमी छोर पर यूपी की सीमा से सटे गढ़वा जिले के श्री बंशीधर नगर (नगर ऊंटारी) में श्री बंशीधर भगवान स्वयं आकर विराजमान हुए हैं. श्री बंशीधर जी के आगमन के बाद उनकी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कर मंदिर का निर्माण हुआ है. भगवान के स्वयं आकर विराजमान होने के कारण श्री बंशीधर नगर को योगेश्वर कृष्ण की भूमि और इस धरती को द्वितीय मथुरा और वृंदावन माना जाता है. श्री बंशीधर मंदिर की स्थापना संवत् 1885 में हुई है. मंदिर में स्थित योगेश्वर श्रीकृष्ण की वंशीवादन करती प्रतिमा की ख्याति देश में ही नहीं विदेशों में भी है. इसलिए यह स्थान श्री बंशीधर धाम के नाम से भी प्रसिद्ध है.

 

1280 किलो सोने से किया गया है मूर्ति का निर्माण

advt

भगवान श्रीकृष्ण की देश भर में सबसे कीमती मूर्ति इस मंदिर में स्थापित है. 1280 किलो सोने से इस मूर्ति का निर्माण किया गया है. इसकी कीमत आज सोने के भाव के अनुसार 640 करोड़ रूपए है. हालांकि बीएचयू के पुरातात्विक विभाग की टीम ने 2500 करोड़ रूपए इस मूर्ति की वैल्यू लगायी है. साथ में राधा की अष्टधातु की मूर्ति भी कान्हा के साथ है. जानकारों के अनुसार प्रतिमा करीब पांच फीट लंबी दिखाई देती है पर इतनी ही जमीन के अंदर भी है, जिसमें श्रीकृष्ण शेषनाग पर विराजमान हैं. मूर्ति की कुल लंबाई 10 फीट है.

 

adv

रानी शिवमानी कुंवर ने खुदाई कर निकलवायी प्रतिमा

श्री बंशीधर जी के आगमन के बारे में इतिहासकारों के अनुसार उस दौरान राजा स्व. भवानी सिंह देव की विधवा शिवमानी कुंवर राजकाज का संचालन कर रही थी. रानी शिवमानी कुंवर धर्मपरायण एवं भगवत भक्ति में पूर्ण निष्ठावान थी. एक बार जन्माष्टमी व्रत धारण किये रानी साहिबा को 14 अगस्त 1827 की मध्य रात्रि में स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन हुआ. स्वप्न में श्री कृष्ण ने रानी से वर मांगने को कहा. रानी ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि प्रभु आपकी सदैव कृपा हम पर रहे. तब भगवान कृष्ण ने रानी से कनहर नदी के किनारे महुअरिया के निकट शिव पहाड़ी अपनी प्रतिमा के गड़े होने की जानकारी दी और उन्हें अपने राज्य में लाने को कहा.

 

नगर द्वार पर हाथी के बैठने पर वहीं बना मंदिर

भगवत कृपा जान रानी ने शिवपहाड़ी जाकर विधिवत पूजा अर्चना के बाद खुदाई करायी तो श्री बंशीधर जी की अद्वितीय असाधारण प्रतिमा मिली जिसे हाथियों पर बैठाकर श्री बंशीधर नगर लाया गया. गढ़ के मुख्य द्वार पर अंतिम हाथी बैठ गया. लाख प्रयत्न के बावजूद हाथी नहीं उठने पर रानी ने राजपुरोहितों से राय मशविरा कर वहीं पर मंदिर का निर्माण कराया तथा वाराणसी से राधा रानी की अष्टधातु की प्रतिमा मंगाकर दिनांक 21 जनवरी 1828 स्थापित करायी. श्री बंशीधर जी प्रतिमा कला के दृष्टिकोण से अति सुंदर एवं अद्वितीय है. बिना किसी रसायन के प्रयोग या अन्य पॉलिस के प्रतिमा की चमक पूर्ववत है.

 

 

श्रीकृष्ण के हैं त्रिदेव स्वरूप

भगवान श्री कृष्ण शेषनाग के उपर कमल पीड़िका पर बंशीवादन नृत्य करते विराजमान हैं. भूगर्भ में गड़े होने के कारण शेषनाग दृष्टिगोचर नहीं होते हैं. श्री बंशीधर मंदिर के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों स्वरूप में हैं. मंदिर में स्थित प्रतिमा को गौर से देखने पर यहां भगवान के त्रिदेव के स्वरूप में विद्यमान रहने का अहसास होता है. यहां स्थित श्री बंशीधरजी जटाधारी के रूप में दिखाई देते हैं. जबकि शास्त्रों में श्रीकृष्ण के खुले लट और घुंघराले बाल का वर्णन है इस लिहाज से मान्यता है कि श्रीकृष्ण जटाधारी अर्थात देवाधिदेव महादेव के रूप में विराजमान हैं. श्रीकृष्ण के शेषशैय्या पर होने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है, लेकिन यहां श्री बंशीधर जी शेषनाग के उपर कमलपुष्प पर विराजमान हैं, जबकि कमलपुष्प ब्रह्मा का आसन है. इस लिहाज से मान्यता है कि कमल पुष्पासीन श्री कृष्ण कमलासन ब्रह्मा के रूप में विराजमान हैं. भगवान श्रीकृष्ण स्वयं लक्ष्मीनाथ विष्णु के अवतार हैं इसलिए विष्णु के स्वरूप में विराजमान हैं. त्रिदेव के रूप में विराजमान भगवान सबकी मनोकामना पूरी करते हैं.

 

कहां पर स्थिति है मंदिर

चुनार-चोपन-गढ़वा रोड रेलखंड और एनएच 75 किनारे पर बसे श्री बंशीधर नगर (नगर ऊंटारी) शहर के बीच में स्थित श्री बंशीधर मंदिर में दर्शन के लिए सालों भर देश ही नहीं विदेशी श्रद्धालुओं का भी तांता लगा रहता है. जो भी श्रद्धालु एक बार श्री बंशीधर जी की मोहिनी मूरत का दर्शन करता है, वह उनके प्रति मोहित हो जाता है। महाशिवरात्रि एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है. महाशिवरात्रि के मौके पर प्रसिद्व मेला लगता है जो एक माह तक चलता है. श्री बंशीधर नगर में प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण की जयंती जन्माष्टमी मथुरा एवं वृंदावन की तरह मनाई जाती है. इस मौके पर एक सप्ताह तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है जिससे श्री बंशीधर नगर सहित आस पास के गांवों का माहौल भक्तिमय हो जाता है.

 

दूसरी बार दर्शन नहीं देंगे भगवान कृष्ण

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर श्रीवंशीधर राधिका जी मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया. इस मौके पर एक सप्ताह तक चलने वाले श्रीमद्भागवत कथा का समापन शनिवार को हुआ. श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर मंदिर में पूजा-अर्चना, श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कर फूल माला, इलेक्ट्रॉनिक झालर, गुब्बारा, फल आदि से मंदिर को बड़े ही आकर्षक व भव्य तरीके से सजाया गया पर मंदिर के 136 वर्ष के इतिहास में यह दूसरा अवसर है, जब स्थानीय या बाहरी कोई भी भक्तगण भगवान श्री कृष्ण का दर्शन पूजन कृष्ण जन्माष्टमी को नहीं कर पाए. ऐसा वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर हुआ है. मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से बंद है.

 

इसे भी पढ़ें : ससुराल पहुंची बीमार अयांश की मां नेहा, आंचल फैला मांग रही बेटे के लिए मदद

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: