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दुकानदारों ने जिला परिषद के खिलाफ खोला मोर्चा

Dhanbad : दुकानदार संघ ने शुक्रवार को जिला परिषद की जमीन पर बने दुकानों के भाड़े में 3 तीन रुपए 13 रुपए प्रति स्क्वायर सेंटीमीटर  वृद्धि के खिलाफ जिला मुख्यालय रणधीर वर्मा चौक पर एक दिवसीय धरना दिया. दुकानदारों ने एक सुर में कहा कि तत्कालीन उपायुक्त एवं उप विकास आयुक्त ने उन्हें भाड़ा कम निर्धारित कर दुकान आवंटित किया था. समय समय पर दुकानदारों से बातचीत कर सहमति के बाद भाड़ा बढ़ाने की शर्त पर दुकान सभी को दिया गया था, लेकिन वर्तमान समय मे जिला परिषद ने सारी नियम शर्तों को दरकिनार करते हुए भाड़े में अप्रत्याशित राशि बढ़ा दी है, जिसे दे पाने में सभी दुकानदार असमर्थ हैं. जिप बोर्ड ने ऐसा फैसला लिया जिससे व्यवसायी वर्ग भूखे ही मर जायेंगे.

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जिला परिषद के 2,800 दुकाने हैं

जिला परिषद के अधीन जिले में कुल 2,800 दुकानें हैं. इसमें शहरी क्षेत्रों के बीचो-बीच 800 दुकानें हैं और बाकी 2 हज़ार दुकाने ग्रामीण क्षेत्रों में हैं. पूर्व के दिनों में शहरी क्षेत्र के दुकानें से 3 रुपए से लेकर 3.50  रुपए प्रति स्क्वायर सेंटीमीटर  की दर से ली भाड़ा ली जाती थी और ग्रामीण क्षेत्रों में डेढ़ रुपए से लेकर ढाई रुपए तक लिया जाता था. लेकिन जिप बोर्ड ने किराये को लेकर एक समान  का हवाला देते हुए 13 रुपये प्रति स्क्वायर सेंटीमीटर के हिसाब से रेट बांध दिया.  जिसे लेकर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के दुकानदारों ने विरोध करना शुरू कर दिया है.

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क्या कहते हैं जिप अध्यक्ष

वहीं इस मामले में जिप अध्यक्ष रोबिन गोराई ने कहा कि जिला परिषद की दुकानों का रेट काफी सालों से नहीं बढ़ा था. रेट को लेकर बोर्ड तय करती है किस जगह पर कितना भाड़ा होना चाहिए. जिला परिषद अपने प्रवधान से ही हर कार्य कर रही है. उससे अलग ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिससे विवाद  खड़ा हो. व्यवसाय सिर्फ खुद का देखते हैं और जिला परिषद सभी को लेकर चलते हैं.

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क्या कहते हैं डीडीसी

वहीं है जिला परिषद के सचिव सह डीडीसी शशि रंजन ने कहा कि मैं कुछ ही दिन पहले ही पदभार लिया हूं. इसलिए मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता हूं. लेकिन जिला परिषद के अधीन  जितने भी दुकानें है सभी का  किराया अधिकारी नहीं बल्कि जिला परिषद बोर्ड तय करती है. अगर दुकान का भाड़ा को लेकर विवाद है तो फिर से एजेंडे में लाने का प्रयास करेंगे. इसमें जो  भी बोर्ड तय करेगी वही सभी लोगों के लिए  मान्य होगा.

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