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स्‍वच्‍छता की जिम्‍मेदारी पूरी करने से ही मिलेगी शिव की शिष्‍यता: शिव शिष्‍य हरीन्द्रानन्द

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Ranchi: शिव शिष्‍य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन की ओर से रविवार को ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, श्रेश्ठ भारत’ विषय पर एक संगोष्‍ठी आयोजित की गयी. इस संगोष्‍ठी में शिव शिष्‍य हरीन्द्रानन्द जी ने कहा कि शरीर और वातावरण की स्वच्छता की जिम्मेदारी हम तभी ले सकते हैं जब हमारा मन स्वच्छ और सुंदर होगा. यह तभी हो पाएगा जब दुनिया शिव की शिष्‍यता से सुवासित होगी. उन्‍होंने कहा कि विश्‍व की सबसे पुरानी सभ्यता सिंधु घाटी की सभ्यता में अपनाई गई स्वच्छ पद्धतियां आज पूरी दुनिया में अनुसरण की जा रही है. उन्होंने कहा स्वस्थ मन में ही परमात्मा का निवास हो सकता है पर देखिये हमारे गुरू शिव तो जगत गुरू हैं. उनकी शिष्‍यता के लिए कुछ नहीं चाहिए, बस भाव और मन चाहिए.

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इक्कीसवीं सदी में स्‍वच्‍छता पर कानून बनाने की जरूरत दुर्भाग्‍य

स्वच्छता और श्रेष्‍ठता पर केंद्रित इस संगोष्‍ठी का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ. देश के विभिन्न हिस्सों से आये हुए लोगों का स्वागत निहारिका ने किया. अर्चित आनन्द ने स्वच्छता को मानव सेवा से जोड़ते हुए कहा कि जब तक हम स्वयं अपने आस-पास को स्वच्छ नहीं रखेंगे, तब तक देश का क्या निर्माण करेंगे. उन्होंने कहा कि हमारा दुर्भाग्य है कि इक्कीसवीं सदी में हमारे देश को स्वच्छता अभियान चलाने की और उसपर कानून बनाने की जरूरत पड़ रही है.

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स्‍वच्‍छता से ही देश बनेगा समृद्ध

न्यास की अध्यक्षा बरखा सिन्हा ने कहा कि तन की निर्मलता तो हम साफ कर सकते हैं पर मन और अध्यात्म की निर्मलता केवल महादेव की शिष्‍यता ही साफ कर सकती है. प्रोफेसर रामेश्‍वर मंडल ने कहा कि शिव की शिष्‍यता से मन निर्मल किया जा सकता है. पटना से आये डॉ अमित कुमार ने स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्वस्थ लोग ही स्वच्छ और समृद्ध देश बना सकते हैं. दूसरी ओर अभिनव आनन्द ने कहा कि हमारी चेतना का परिमार्जन हमारे मन और स्वस्थ जीवन से संबंधित है. दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं. संगोष्‍ठी में देश भर से लगभग दो हजार लोग आये थे. आगंतुकों ने भी स्वच्छ भारत पर अपनी बात रखी.

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