National

लोकतंत्र सूचकांक में भारत के लुढ़कने पर शिवसेना ने केंद्र से अर्थव्यवस्था पर किए सवाल

Mumbai: शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि विरोध के स्वरों को दबाने के प्रयास हो रहे हैं और यही एक वजह है कि भारत 2019 लोकतंत्र सूचकांक की वैश्विक रैंकिंग में 10 स्थान लुढ़क गया है. 

शिवसेना के संपादकीय सामना में कहा गया कि अर्थव्यवस्था में नरमी से असंतोष और अस्थिरता बढ़ रही है और यह देश में बने हालात से जाहिर है. मराठी अखबार में कहा गया कि अब (आर्थिक नरम के बाद) वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक की रैंकिंग (भारत की) भी लुढ़क गयी.

इसे भी पढ़ें- गुजरात के डिप्टी CM बोले- आजादी के नारे लगाने वालों को देश छोड़कर जाने दें

51वें स्थान पर आया भारत

दरअसल, द इकोनॉमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट (ईआईयू) द्वारा 2019 के लिये लोकतंत्र सूचकांक की वैश्विक सूची में भारत 10 स्थान लुढ़क कर 51वें स्थान पर आ गया है. संस्था ने इस गिरावट की मुख्य वजह देश में “नागरिक स्वतंत्रता का क्षरण” बताया है.

अखबार ने कहा कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने, नया नागरिकता कानून सीएए और प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन हुए. बीते एक साल से यहां आंदोलन चल रहे हैं.

इसमें कहा गया कि प्रदर्शन हुए और विरोध के स्वरों को दबाने के प्रयास हुए. जिन्होंने जेएनयू के छात्रों के प्रति सहानुभूति दिखायी उन्हीं पर जांच बिठाकर उन्हें ही आरोपी की तरह दिखाया गया. यही वजह है कि भारत लोकतंत्र सूचकांक में फिसल कर 51वें पायदान पर पहुंच गया.

इसे भी पढ़ें- #NationalGirlChildDay पर बोले नायडू- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ हमारा संवैधानिक संकल्प

अगर देश का प्रदर्शन अच्छा है तो RBI से क्यों मांग रही पैसे

संपादकीय में कहा गया कि अगर सरकार इस रिपोर्ट को खारिज भी कर देती है तो क्या सत्तारूढ़ दल के पास इसका कोई जवाब है कि आखिर क्यों देश आर्थिक मोर्चे से लेकर लोकतंत्रिक मोर्चे पर फिसल रहा है.

इमसें कहा गया कि सरकार को अगर ऐसा लगता है कि देश का प्रदर्शन (आर्थिक मोर्चे पर) अच्छा है तो फिर वह ‘आरबीआइ से पैसा क्यों मांग रही है’. 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button